
विजेता चौधरी कर्ण
विजेता चौधरी कर्ण / रासस
चलु सखी हिलमिल जनकके आङ्गन, दुल्हा बनल श्री राम हे ।।
जनकपुरधाममे एखन विआह पञ्चमीक उत्साह देखल जा सकैत अइछ। धार्मिक पर्यटकसभक आगमन आ विआहक अनेक विधिसभ सुरू भेलाक सङे जानकी मन्दिर परिसर विआहमय भ जाइत अइछ। त्रेता युगमे मार्गशीर्ष शुक्ल पञ्चमीक दिन सीता–रामक विआह भेल छल, ओहीक स्मरण स्वरूप मिथिलामे धूमधामक सङ विआह पञ्चमी मनाएल जाइत अइछ। मिथिलावासीक लेल विआह पञ्चमी महान् पावैन जकाँ अइछ। विआह पञ्चमीक समयमे जनकपुरक वातावरणमे सेहो विआहमय उत्साह पसरल रहैत अइछ।
मिथिलाक घर–घरमे विआह पञ्चमीक उत्सव मनाएल जाइत अइछ। उत्सवमे महिला आ पुरुषसभ व्रत क भगवान राम–सीताक पूजा–अर्चना करबाक परम्परा अइछ। मिथिलाक अपन मौलिक विआह परम्परा रहल अइछ। जाहिमे मटकोर आ सिन्दूर दान करबाक पद्धति आइयो कायमे अइछ। ओइ प्राचीन विआह संस्कार आ संस्कृति अनुसार दू गोट बालक वा बालिकाकेँ राम आ सीताक प्रतीक स्वरूप बना क सम्पूर्ण विधि अनुसार विआहक संस्कार पूर्ण कएल जाइत अइछ। जाहिमे मटकोर, तिलकोत्सव, स्वयंवर, विआह आ रामकलेवाक बाद विआह पञ्चमी विधिवत् रूपसँ सम्पन्न होइत अइछ। तइयो, ई एकटा झाँकीक रूपमे मात्र प्रस्तुत कएल जाइत अइछ।
ई सब विधि सम्पन्न भ रहल समयमे मिथिलाक नारीसभ मुक्तकण्ठसँ भगवान रामक सङ परिहास करैत छैथ। अर्थात् गीत गाइब क भगवान रामचन्द्रकेँ हसि-मजाक करैत छैथ। संस्कृतिविद्–साहित्यकार रेवतीरमण लालक अनुसार मिथिलामे साइरसभ पाहुनके सङे, देवर भाैजीक सङे आ भाैजी देवरक सङे रमनगर परिहास करबाक परम्परा रहल अइछ। किंवदन्ती अनुसार राम सीताक विआहक समयमे सेहो मिथिलाक नारीसभ रामचन्द्र आ हुनकर भाए तथा वरियातीसभकेँ विभिन्न राग सुनाबैत परिहास क मनोरंजन कएने छलाह। एहिना एकटा गीतमे कहल गेल अइछ:
‘सखी हे ! रसे–रसे दुलहा चलै छैथ कोना
जेना कोल्हुआके बरद घुेमे अइछ तेना।।’
गीतक माध्यमसँ मिथिलानीसभ परिहास करैत कहैत छैथ, सखी! विआहक बेदीकेँ दुलहा धीरे-धीरे एहिना घुमैत छैथ, मानू ओ कोल्हुआ बरद छैथ। मिथिलामे जतए सीताजीकेँ बहिन अथवा बेटीक रूपमे देखल जाइत अइछ, ओतहि भगवान रामकेँ पाहुनके रूपमे पूजा करबाक सङे हास–परिहास करबाक चलन रहल अइछ। मिथिला सीताजीक नहिरा भेलाक नातासँ भगवान रामक ससुराइर होएत। तेँ भगवान रामकेँ गाइर स्वरूप परिहास करबाक अधिकार मिथिलाक महिलासभकेँ मात्र रहल सन्तसभक ई कहब अइछ।
एहिना दोसर एकटा गीतमे रामकेँ सम्बोधित करैत महिलासभ गाबैत छैथ,
राम जीसँ पुछए जनकपुरीके नारी, लोग दैत काहे गारी ?
तोहरा से पुछु हम हे धनुषधारी, एक भाए गोर आ दोसर किए कारी ?
राजा दशरथ जी केलैन होसियारी, एकटा मरदपर तीन तीनटा नारी ?
लोग देत काहे गारी ?
एना मनाएल जाइत छै विआहक विधि
गोस्वामी तुलसी दास रामायणमे वर्णन अनुसार जे मिथिलाक राज कुमारी सीताक विआह अयोध्याक राज कुमार रामक सङ भेल दिनक स्मरण करैत प्रत्येक वर्ष विआह पञ्चमी मनाएल जाइत अइछ। त्रेता युगमे मार्गशीर्ष शुक्ल पञ्चमीक दिन रामसीताक विआह भेल छल, ओहीक स्मरण स्वरूप जनकपुरक प्रख्यात जानकी मन्दिरमे सेहो सप्ताहव्यापी रूपमे विआह पञ्चमी महोत्सव आयोजित होइत अइछ।
सप्ताहव्यापी रूपमे मनाएल जाएबला विआह पञ्चमीक पहिल दिन नगर दर्शन करबाक चलन अइछ तँ दोसर दिन जानकी मन्दिरक बगलमे रहल विआह मण्डपमे फूलबारी लीला मनाएल जाइत अइछ। रामायणमे वर्णन अनुसार राम–सीताक पहिल भेट फूलबारीमे भेल छल। गिरिजा पूजनक लेल फूल तोड़य गेल सीताजी आ रामजीक पहिल भेट फूलबारीमे भेल छल आ ओकर बाद सीताजी रामकेँ वरक रूपमे पाबयकेँ कामना कएने छल से वर्णन भेटैत अइछ। ओहीक स्मरण स्वरूप विआह पञ्चमीमे फूलबारी लीला रचाएल जाइत अइछ।
विआह पञ्चमीक तेसर दिन धनुष यज्ञक आयोजन होइत अइछ। जाहिमे रामस्वरूप रहल बालक धनुष तोइड़ क धनुष यज्ञ पूरा करैत छैथ। संस्कृतिविद् रेवतीरमण लाल सुनबैत छैथ, “त्रेता युगमे परशुराम शिव धनुष राजा जनककेँ प्रदान कएने छलाह, ई वर्णन रामायणमे अइछ। किओ हिला सेहो नै सकएबला ओइ धनुषकेँ जनक पुत्री सीता सहजे हटा क ओ स्थान निपैत आ साफ करैत देइख राजा जनक आश्चर्यमे पइड़ गेल छलाह। ओ प्रण लेने छलाह जे एतेक बहादुर बेटीक विआह ओकरे सङ करब, जे शिव धनुष उठा सकत। सीता स्वयंवरमे धनुष यज्ञक आयोजन भेल छल, ई वर्णन रामायणमे भेटैत अइछ। धनुष यज्ञमे कियो नै उठा सकयबला शिव धनुषकेँ राम उठौलनि, ओकर बाद राम–जानकीक विआह भेल छल।”
मैथिली अभियानी पुनम झाक अनुसार जनकपुरमे धनुष यज्ञक लेल पैघ मञ्च, धनुष आ सभाक सेहो आयोजन होइत अइछ। जानकी मन्दिरक महन्त रामतपेश्वर दास आ हुनकर उत्तराधिकारी महन्तक रूपमे रहल रामरोशन दास रामायणकालीन विआह महोत्सवकेँ सम्पूर्ण विधान पूरा क विआह पञ्चमी मनाबैत आइब रहल छैथ। ओहिना चारिम दिन तिलकोत्सव आ पाँचम दिन मटकोर, छैठम दिन विआह समारोह आ अन्तिम तथा सातम दिनमे रामकलेवाक आयोजन क क विधिवत् रूपसँ विआह पञ्चमीक समापन होइत अइछ।
अभियानी झाक अनुसार ई सम्पूर्ण विधिसभमे जनकपुरक स्थानीय महिला आ गायक कलाकारसभकेँ बजा क विभिन्न संस्कारक गीत गाबयकेँ अभियान चलाएल जाइत अइछ, जे अइ उत्सवक प्रमुख आकर्षणमेसँ एक छी। ओ कहैत छैथ, “वरियाती एनिहार भारतीय सीमाक्षेत्रक साधु-सन्त आ पर्यटकसभकेँ लक्षित क महिलासभ परिहासपूर्ण गीत सुनाबैत छैथ। मिथिलामे कोनो सेहो संस्कार वा विधि गीत बिना सम्पन्न नै कएल जाइत अइछ। विआह, ब्रतबन्ध, पूजा आदि प्रत्येक संस्कारक लेल विशेष गीत गाएल जाइत अइछ।”
‘हे पहूना ! अइ मिथिलेमे रहु ना,
रोज सबेरे उबटन मलिक‘, इत्रसे नहबायब हे,
एक महिनाके भितर करियासँ गोर बनायब हे।।’
उक्त गीतमे मिथिलाक बेटीसभ भगवान रामकेँ ‘पाहुन’सँ सम्बोधन करैत मिथिलामे रहबाक आग्रह करैत कहैत छैथ, मिथिलामे रहब तँ भोरमे (उबटन) एक प्रकारक लेप शरीरमे द क इत्रसँ स्नान करा देब आ एक महिनाक भीतर अहाँकेँ कारीसँ गोर बना देब।
जनकपुर स्थित राम मन्दिरसँ बाजागाजा आ विशेष झाँकीक सङ भगवान रामक प्रतिमाकेँ डोलामे राइख क रङ्गभूमि मैदान (बाह्रविघा) पहुँचाएल जाइत अइछ तँ जानकी मन्दिरसँ सीताजीकेँ विशेष डोलामे राइख क मङ्गलगानसँ रङ्गभूमि मैदान ल जाएल जाइत अइछ आ ओतय भव्य समारोहक बीच स्वयंवर विधि आ परीक्षण विधि सम्पन्न क क दुनू डोला अर्थात् राम आ सीताजीकेँ जानकी मन्दिर आनएल जाइत अइछ।
रङ्गभूमि मैदानमे विआह विधिक समयमे भारतसँ आएल भक्तजन आ श्रद्धालु सहितक वरियाती आ स्थानीय मिथिलावासीसभके भारी उपस्थिति रहैत अइछ। हास–परिहास आ मैथिली संस्कार गीत वास्तविक विआहक वातावरण बना दैत अइछ।
अइ समयमे आन्तरिक पर्यटकक सङे देश आ पड़ोसी देश भारतसँ सेहो पैघ संख्यामे धार्मिक पर्यटकक आगमन होबाक जनकपुर–१० देवीचोक निवासी किशोर साह बताबैत छैथ। हुनकर अनुसार विआह पञ्चमीमे मात्र होटल–धर्मशाला, मिठाईक दोकानसँ ल क पूजा सामग्री बेचनिहार आ कपड़ाक दोकानदारक व्यापारमे उल्लेखनीय वृद्धि होइत अइछ। ओहिना पैघ संख्यामे साधु–सन्तसभक भीड़ होइत अइछ। मैथिली संस्कृतिक अभिन्न अङ्ग बइन गेल विआह पञ्चमीक रौनक, जनकपुरमे मात्र नै, बल्कि मैथिल जनसमुदायक बसोबास रहल प्रायः स्थानमे देखल जा सकैत अइछ।
विआह पञ्चमी उत्सवभैर मन्दिर परिसरमे श्रद्धालु तथा भक्तजन भजनकीर्तन, प्रवचन आ झाँकी प्रस्तुत करबाक चलन पुराने अइछ। अइ बीच रामलीलाक सेहो प्रदर्शन होइत अइछ। अभियानी पुनम झाक अनुसार दू दशक पहिनेधैर जनकपुरक जानकी मन्दिर सहित सम्पूर्ण रामजानकी मन्दिर सभमे होएबला विआह पञ्चमीकेँ एकटा मेलाक रूपमे मात्र देखबाक आम दृष्टिकोण छल तँ एखन विआह पञ्चमी एकटा भव्य उत्सव आ महोत्सवकेँ रूपमे विस्तारित भ चुकल अइछ। प्रत्येक वर्ष विआह पञ्चमीकेँ आओर आकर्षक बनेबाक काज होइत आइब रहल अइछ। बितल साल विश्व कीर्तिमान रचबाक उद्देश्यसँ स्थानीय सरकार, उद्योग वाणिज्य सङ्घ आ जानकी मन्दिरक सहयोगमे रङ्गभूमि मैदानमे लगभग ११ हजार एक सओ ११ स्क्वायर फिटक राम सीताक अनाजक प्रतिमे बनाएल गेल छल। एकर लेल अनुमानित ७५ क्विन्टल अनाजक प्रयोग कएल गेल छल। तइयो, उक्त काजक किछु ठाम विरोध सेहो भेल छल।
सुनसान तीरहुतिया गाछी
संस्कृतिविद् लालक अनुसार “पहिने जनकपुरक तीरहुतिया गाछीमे रामसीताक डोला आइन क स्वयंवर करबाक चलन छल। जाहिमे स्थानीय सहित भारत सीमाक्षेत्रक मैथिल जनसमुदाय आ पर्यटकसभ विआहपञ्चमी देखय लेल अबैत छलाह। एत स्थित पवित्र गङ्गासागर आ विभिन्न धार्मिक जलाशयसभमे स्नान क पूजा-आजा सहितकेकाज होइत छल। मुदा पछिला एक दशकमे बहुत परिवर्तन आइब चुकल अइछ। उक्त उत्सव पहिने–पहिने एक महिनाधैर सेहो चलैत छल। साधु–महात्मासभक लेल भोजन आ आवासक व्यवस्था, अन्य भक्तजन आ पर्यटकके लेल उचित व्यवस्थापन कएल जाइत छल। मुदा धीरे-धीरे ओ महोत्सव पाँच दिनमे खसि गेल तँ एखन सात दिनधैर विभिन्न कार्यक्रमक सङ मनाएल जाइत अइछ। अइ समयमे तीरहुतिया गाछी सुनसान प्रायः रहैत अइछ।”
पछिला समय प्रविधिक बढ़ैत प्रयोगक सङे एकर प्रचार-प्रसार बढ़लाक कारण सेहो विआह पञ्चमीक लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बइढ़ रहल अइछ। जानकी मन्दिरक महन्त आ व्यवस्थापन समिति प्रत्येक वर्ष विआह पञ्चमीकेँ भव्यताक सङ मनाबैमे कोनो कसर नै छोड़ैत छैथ। संस्कृतिविद् लालक अनुसार, विआह पञ्चमीक लेल पहिने जनकपुर स्थित राम मन्दिरसँ रामक डोला आ जानकी मन्दिरसँ जानकीक डोला अबैत छल आ ओकर बाद विआह संस्कार सम्पन्न कएल जाइत छल तँ एखन भारतक अयोध्यासँ सेहो ओतयकेँ पूजारी, भक्तजनसभ भगवान रामक डोलाक सङ अबैत छैथ। एखन प्रत्येक पाँच वर्षमे अयोध्यासँ रामक डोलाक सङ वरियाती अबैत छैथ, मुदा विआह संस्कार आइयो जनकपुरक राम मन्दिरसँ डोला चइढ़ क आबैबला भगवान रामजीक सङे होइत अइछ। जनकपुर सहित मिथिला क्षेत्रमे रहल प्रत्येक राम–जानकी मन्दिरसभमे सामर्थ्य अनुसार अलग-अलग विवाहोत्सव मनाएल जाइत अइछ।





