प्रवीणनारायण चौधरी
एकटा उमेर धरि लोक ‘प्रेम’ के सही परिभाषा बुझिते नहि छैक । लेकिन ‘प्रेम विवाह’ पर ध्यान चलि गेल करैत छैक ।
आब तहिया हमर उमेर कतेक हेतय ? मुश्किल सँ १८-१९ साल । ई हिरोइन एतबी नीक लागि गेल छल जे बाकी सब हिरोइन केँ साइड कय एकरे बड़का-बड़का पोस्टर सब अपन विद्यार्थी जीवनक असगर रूम मे लगा लेने रही । अचानक एक दिन पता लागल जे ई मरि गेल, रौ बहिं, भैर दिन खाना तक नहि खेलहुँ… आ दोसर दिन सँ रूम मे एकर भूत देखाय लागल । प्रेम छू-मन्तर भ’ गेल ।
आब एहनो नहि जे ‘प्रेम’ पहिने नहि भेल छल । ‘सिन्दूर’ सिनेमा मे नीलम केँ देखलियैक, ओ सरिसो खेत मे गोविन्दा संगे डान्स करैत त मुंगेरीलाल जेकाँ आँखि मिरमिरा गेल आ कनियेकाल मे पर्दा पर गोविन्दाक स्थान पर अपने रही आ नीलम सद्यः हमरहि संग छल तेना लागल । भक् टूटल, दरभंगाक पूनम सिनेमा हौल सँ बाहर निकलिते एमआरएम गर्ल्स कालेज लग कहीं नीलम भेटि जायत कि… से सोचि ओहि देने वापस भेलहुँ ।
नेशनल सिनेमा मे लागल छलैक ‘मैंने प्यार किया’ । भाग्यश्री संग सलमान खान छल । फेर सँ वैह सिन्ड्रोम । सलमान साइड, अपने पर्दा पर फिट । फेर भक् टूटल । सिनेमा हौल सँ बाहर अबिते ‘भाग्यश्री’ केर खोज शुरू । मुदा एहि बेर किछु ज्ञान बढ़ल छल । ओ जे पहाड़ तोड़ैत सुटहा सलमान केँ देखने रही, ततेक ताकत हमरा नहि अछि आ एना हम हिरोइन के चक्कर मे जंगल-पहाड़ नहि जा सकब, ई सब सिनेमाक पर्दे टा पर सम्भव छैक से बुझने रहियैक । मुदा ‘भाग्यश्री’ केर खोज लगभग ५-६ मास धरि करैत रहलहुँ, धरि भेटल नहि ।
एहिना-ओहिना मे ‘दिव्या भारती’ सँ अन्तिम ‘मोहब्बत’ भेल छल, सेहो मरिये गेल । वास्तविक जीवन मे आखिरकार एकटा हिरोइन संग मोहब्बत के इजहार तक सवाल उठल । मुदा काकी ओकर फोटो देखिकय कहि देलनि, ‘जबानी में कुतिया भी हसीन लगती है’ । हे भगवान् ! काकीक आत्मा केँ चिर शान्ति भेटनु । आब मोन पड़ैत अछि हुनकर बात । ई खचरहबा ‘प्रेम’ सँ नीक बरु हमर गामक ‘प्रेमजी’, गप्पो छाँटय मे माहिर आ पढ़इयो-लिखय मे ओस्ताज !
तेकर बाद जाबत अपन रियल हिरोइन संग १९९८ मे २५म् वर्ष भेंट नहि भेल, ताबत बुझू जे ‘नीलम’, ‘भाग्यश्री’, ‘जूही चावला’, ‘ममता कुकुरनी’, आदि अनेकों हिरोइन अबिते-जाइते रहल छल । आ जेना भोर मे फूल फुलायल, साँझ मे मुरझायल – तहिना चलैत रहल । बाद मे, जखन गारा मे ढोंढी धरिक माला ‘वन्दनियाँ’ भेंट भेल, फेर त ई तेनाक शासन पद्धति चालू कयलक जे आखिर मे हिरोइन सभक सपनों देखनाय बन्न !
बन्धुगण! हमर समय सँ बहुत आगू के समय मे आजुक युवा-युवती सब जिबइ य’ जीवन । हमरा लग त वेद प्रकाश शर्मा आ सुरेन्द्र सक्सेना सभक लिखल गोटेक उपन्यासक सहारा छल । जेम्स हेडली चेज केर लिखल जासूसी उपन्यास आ एडल्ट सिन सभक वर्णन मार्फत थोड़-बहुत काम-कामुकता आदिक नौलेज भेटैत छल । आब त खुलेआम पठ्य, श्रव्य, दृश्य आदिक संग प्रैक्टिकल फोटो-वीडियो केर सारा टूल्स खुल्ला अछि ।
इन्टरनेट देवताक कृपा आ ताहि पर मोबाइलक टच स्क्रीन, गूगल आ एआई केर जमाना – सरबे जे हिरोइन कि हिरो जखन चाहब तखन आँखिक सोझाँ हाजिर… हमरा सब जेकाँ पूनम सिनेमा हौल सँ एमआरएम गर्ल्स कौलेज दिश घुमबाक सोच या चने के खेत मे जोड़ाजोड़ी वला विम्ब केँ त गोलिये मारू – तखन त ‘प्रेम’ आ ‘प्रेम विवाह’ कतेक हद तक हावी अछि से कहय के जरुरते नहि । आ प्रेम केहेन जे कनिके-कनिके दिन पर अपन ‘हेट’ मे परिणति पबैत ‘नीला ड्रम आ सिमेन्ट’ केर विम्ब धरि पहुँचि रहल अछि, खचरहबा टेलिविजन पर आ रील्स मे आब यैह सब ट्रेन्ड कय रहल अछि । बुझू ! बेसी कि लिखू !
हरिः हरः!!
पुनश्चः बेचारी दिव्या सहित सम्पूर्ण मृत् प्रेमिका सभक प्रति प्रवीणक विनम्र श्रद्धाञ्जलि सुमन अर्पित !
साहित्यकार चौधरी भाषिक एवम् सामाजिक अभियानमे सक्रिय छइथ । सं





