काठमाण्डू, १५ जेठः प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली अपनासँ अपनकेँ नेता चयन करैबला सङ्घीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्रात्मक शासन व्यवस्थाके विकल्प नै भेल बताैलैन अइछ ।
गणतन्त्र दिवस, २०८२के उपलक्ष्यमे टुडिँखेलमे ओयोजित विशेष समारोहकेँ सम्बोधन करैत प्रधानमन्त्री ओली हरेक नागरिकके आत्मससम्मान सुरक्षित रहैबला गणतान्त्रिक व्यवस्थाके विकल्प दोसर कोनो नै भेल बतौलैन । गणतान्त्रिक शासन व्यवस्थामे शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यम, रोजगारी, पूर्वाधारसहितके क्षेत्रमे अतुलनीय उपलब्धिसहित परिवर्तन भेल उल्लेख करैत ओ गणतन्त्रकेँ आओर सुदृढ आ मजबुत बनाबए अपनासभ सब एक बनैबामे जोड़ देलैन ।
प्रधानमन्त्री कहलैथ, “सुशासन, पारदर्शिता आ उत्तरदायित्व गणतान्त्रिक व्यवस्थाके रीढ़ छियै, हमरासभ तकरा मजबुत बनाबएमे लागल छी । समृद्ध नेपाल सुखी नेपालीके राष्ट्रिय आकाङ्क्षा पूरा करएमे लागल छी ।”
ओ कहलैथ, “गणतन्त्र कोनो दलके स्वामित्व नै एकर मालिक जनते छी । लोकतान्त्रिक गणतन्त्र ‘जनताक’ लेल जनताद्वारा जनताके शासन प्रणाली’ छी । एकरे मर्मअनुसार अपन प्रणालीमे जनता वाड सदस्यसँ राष्ट्रपतिधैर अपनेसँ चयन आ बदलाब क सकैत छै । तँए बढ़िया वा नै नीक शासन दुनुके उत्त्रदायित्व सेहो जनतेके हातमे अइछ ।”
प्रधानमन्त्री ओली एखन जनता मतदान क, वाडक सदस्यसँ देशक राष्ट्रपतिधैर समावेशी रूपमे विभिन्न जात/जाति आ समुदायक कम्तिमे ३६ हजार ५७ प्रतिनिधिसभ चयन करबाक व्यवस्था रहल स्पष्ट कएलैन ।
ओ कहलैथ, “गणतन्त्र आबैसँ पहिने देशक विकासक सूचकाङ्कसभ कत रहए, आइ कत पहुँचलै। गणतन्त्र आबैसँ पहिने मानव विकास सूचकाङ्क कत छल, आइ कत पहुँचलै । राजतन्त्रमे २५० वर्षमे कतेक विद्यालय रहए, कतेक अस्पताल रहए, एखन कते छलै । राजतन्त्रकालमे सड़क कते किलोमिटर छल, एखन कते भेलै, गरिबी कते छल, कते घटल, खानेपानी आ बिजुलीके सुविधा कते जनतामे छल आ आइ कते जनतामे पहुँचल। जनताके जीवनस्तर कत छल, एखन कत पहुँचलै । ई सबै उपलब्धि लोकतान्त्रिक गणतन्त्रसँ सम्भव भेल अइछ”
प्रधानमन्त्री कहलैथ, “आइएके दिन, अपनासभके लेल विशेष दिन छी । वर्षौं लम्बा सङ्घर्ष, हजारौँ दिदीबहिन भाइसभके बलिदान आ हमरासभ सबके अथक मेहनतसँ २०६५ साल जेठ १५ गते देशमे लोकतान्त्रिक गणतन्त्रके स्थापना भेल दिन । ताहि ऐतिहासिक दिनके स्मरणमे आइ अपनासभ गणतन्त्र दिवस मना रहल छी । गणतन्त्र – अपनासभ प्राप्त नै कएने रहियै, आर्जन कएने छी– हजारौं जनताके बलिदानसँ आ त्यागसँ । मुकुटके हुकुमी आदेशसँ सञ्चालन होएबला राज्य प्रणालीके हटा क जनताके हृदयसँ कएल निर्णयसँ देश चलैबला प्रणाली स्थापित कएने छी । तँए एहि गौरवपूर्ण दिवसके मूल्य हमरासभ कहियो नै बिसरबाक चाही, नै बिसरल छी । रासस





