जलेश्वर (महोत्तरी), ८ असोजः
‘तोहरे भरोसे बरहम बाबा झिझिया बनैलियै हो,
बरहम बाबा झिझिया पर होइयाै न सहाय अबोधवा बालक तोहर किछियो नै जनै छह हो ।
‘चल चल गे डनिया कदम तर, तोहर बेटा के खैबौ बरहम तर’
‘माछ मार गेले गे डनिया बाबाके पोखरिया, माइर लेले कोतरी मछरिया गे’
ई आ एहने मैथिली गीतसङ्गीतसँ अखन मिथिला क्षेत्रमे रौनकता बढ़ल अइछ । दशमी सुरु भेलाक बाद मिथिला क्षेत्रमे राइतके समय झिझिया नाँच सेहो सुरु भेल अइछ । महोत्तरी, धनुषा, सिरहा, सप्तरी, सर्लाही, रौतहट, बारा, पर्सासहितक मधेश प्रदेशक जिला तथा भारतक सीतामढ़ी आ मधुवनी जिलासहित सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्रमे झिझिया नाँचक रौनक बढ़ल अइछ ।
सुख, समृद्धि आ पारिवारिक सुरक्षाके लोक अनुष्ठानक रुपमे झिझिया नाँच महोत्तरीलगायत मिथिलाभैर नाँचल जाइत अइछ से जलेश्वरनाथ महादेव मन्दिरके पुजारी उपेन्द्र पाठकके कहब छैन ।
झिझिया नाँचमे पूर्ण रुपमे तान्त्रिक विधिअनुसार घटस्थापनासँ दशमीधैर कएल जाएबला देवी दुर्गा स्तुतिके प्रस्तुत कएल जाइत अइछ । झिझियाके उद्देश्य समाजमे भेल नकारात्मकतासँ सन्तानक सुरक्षा करबाक रहल जलेश्वर नगरपालिका–५ के संस्कृतिविद् ध्रुव राय बतौलैन ।
मिथिलामे झिझिया नाँचक अपने मौलिकता, पहिचान आ इतिहास अइछ । समाज रुपान्तरणक क्रममे भेल समयमे ई लोकनृत्य अखनो गामघरमे मात्रे नै भ सहरमे सेहो प्रसिद्ध अइछ । (रासस) File Pic. Jhijhiya/Ghanshyam Mishra





