मधेशके विद्यार्थी कहिया पढतै?


सिरी संपादक जी,
पैरनाम ।

कुशल छेम बड बनिहाँ, अपनेके सेहो निम्मने होइत, दशमी सेहो समाप्तीक कगार पर हएत आ सुकरातीक चढानी त दुनू हाथ घीमे ओहिना होएत । जहाँतक मधेशक सन्दर्भमे कहल जाए त मधेशके विद्यार्थी कहिया पढतै? गरमी महिनामे ततेक नँई गरम लगैय हई जे घरमे रहबामे बर्दास्त नँई होई हई।

मच्छरजालीओमो मच्छर ततेक नँई लुधकई हई से नँई जानि, स्कुलमे सेहो विना पंखा आ चदराबाला कोठरी सोझे धाह मारैत रहै हई, गामघरक छोटछिन बोर्डिग स्कुल त बुझु जे मुर्गा फारमसँ कम नई , जारामे ततेक नँई जार होइ हई जे सिरक तरमेसँ हाथ निकालि किताब पकडबाक, पढबाक हिम्मत नँई होई हई,, बर्षातमे मोन भिनिर भिनिर करैत रहै हई ।

विआह शादीमे, स्कुलेमे बरिआति रहै हई, ओहिना अघोषित छुट्टी, भोज खाएला विद्यार्थीक माय,बाबु आ बाबा दाईके अलगे सुरता घिँचने रहै है जे कखनु बौआ आओत भोज खिआब ल जेबै, विद्यार्थीके सेहो भोज दिश ध्यान अटकल रहै है, जँ मास्टर साहेब आउरके निमन्तर रहल त ओहिना टेवाटाही सभ अपना अपनीके पार, डीजे आ लउडीस्पीकर त सबदिनमा जतबे मन्दिर पर ओतबे मस्जिद पर तरमतोर केओ ककरोसँ कम नँई उपरा उपरीके टेरने रहै हई,

आब त जानिएके लगपाचे त सभ पबनी नाचे, छठि त सभ पबनि बठि- विश्वकर्मा, गणेश, सरस्वती, ईनर, सन्तोपीमाता, शिवगुरु, दशमी, सोकराती, छठि, आ जलसा सभमे गीतनाद, छोकरबाजी, आर्केस्टरा, नाचगान होइते रहतै, मेलाठेला, पावनि, उत्सवमे सभ दिन बाजाछाजो अंकाल रहबे करतै त मधेशके विद्यार्थी कहिया पढतै?

अपनेक खुरलुच्ची समदिया
लबरसटकानन्द

(प्रस्तुत व्यंग्यात्मक पत्र चर्चित पत्रकार, साहित्यकार एवम् विश्लेषक नित्यानन्द मण्डलद्वारा लिखल गेल अइछ । (सं.)

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