काठमाण्डू, २० कातिकः संयुक्त राष्ट्रसङ्घीय वातावरण कार्यक्रम (युएनइपी)क अगुवाइमे युद्ध आ सशस्त्र द्वन्द्वमे वातावरणके दुरुपयोग रोकबाक अन्तर्राष्ट्रिय दिवस आइ विभिन्न कार्यक्रम क विश्वभैर मनाओल जा रहल अइछ ।
संयुक्त राष्ट्रसङ्घक आह्वानमे युद्ध आ द्वन्द्वक क्रममे वातावरणमे पड़ैबला असरप्रति चेतना जगेबाक उद्देश्यसहित सन् २००१ सँ ई दिवस मनेबाक सुरु भेल अइछ ।
संयुक्त राष्ट्रसङ्घद्वारा दीर्घकालीन शान्ति स्थापना आ द्वन्द्वक रोकथामके रणनीतिसभमे वातावरणीय सुरक्षाकेँ महत्त्वपूर्ण अङ्गके रुपमे समावेश कएल गेल अइछ ।
युद्धक क्रममे पाइनक प्रमुख स्रोत प्रदूषित होबाक, अन्न बाली नष्ट होबाक, वन जंगल नाश होबाक, माइट विषाक्त बनबाक आ जानवरक हत्या होबाक जेहन गतिविधिसँ वातावरणमे गम्भीर असर भेल अइछ ।
युएनइपीके अनुसार बितल ६० सालमे भेल सब आन्तरिक द्वन्द्वक क्रममे काठ, हीरा, सोना, तेल जेहन बहुमूल्य स्रोतसँ उर्वर भूमिक जमीन आ पाइनक स्रोतके कम्तीमे ४० प्रतिशत दुरुपयोग भेल अइछ ।
दिवसक अवसरमे राष्ट्रसङ्घक महासचिव एन्टोनियो गुटेरेस देने सन्देशमार्फत दीर्घकालीन शान्ति स्थापनाक लेल वातावरणीय सुरक्षा अनिवार्य भेल आ विश्वके सब देशकेँ जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण आ प्राकृतिक स्रोतसभक दुरुपयोग विरुद्ध एकजुट होबाक लेल आग्रह केलैन अइछ ।
“अपनासभ जाधैर पृथ्वीके रक्षा नै करब ताधैर मानव सभ्यता सुरक्षित नै रहि सकत । युद्ध आ वातावरणीय विनाश विरुद्ध लड़बाक दीर्घकालीन शान्ति आ विकासक मार्ग छै”, महासचिव गुटेरेस कहलैन अइछ । (रासस)





