काठमाण्डू, १६ अगहनः विश्वके विभिन्न देशमे आइ अन्तर्राष्ट्रिय दासता उन्मूलन दिवस मनाओल जा रहल अइछ ।
मानव तस्करी, जबरजस्ती श्रम, यौन शोषण, बालश्रम, जबरजस्ती विवाह तथा बालबालिकाकेँ सशस्त्र द्वन्द्वमे जबरजस्ती भर्ती करबाकलगायत दासत्वके आधुनिक स्वरुप विरुद्ध विश्वव्यापी चेतना फैलेबाक दिवसके उद्देश्य अइछ ।
संयुक्त राष्ट्रसङ्घद्वारा सन् १९४९ के २ डिसेम्बरमे मानव बेचबिखन तथा यौन शोषण रोकबाकसम्बन्धी महासभा सङ्कल्प प्रस्ताव पारित कएल गेल दिनक यादमे प्रत्येक साल ई दिवस मनाओल जाइत अइछ ।
राष्ट्रसङ्घक अनुसार आइ सेहो विश्वभैर पाँच करोड़ व्यक्तिसभ आधुनिक दासत्वके जोखिममे अइछ । अइमध्ये अधिकांश महिला आ बालबालिकाकेँ बलपूर्वक श्रम करबाक लेल बाध्य बनाएल गेल अइछ ।
जातीय विभेद, गरीबी, सामाजिक बहिष्कार तथा असमानतामे आधारित व्यवहारके कारण किछ समुदायसभ अखनो सेहो शोषणके गम्भीर जोखिममे अइछ । प्रवासी तथा असुरक्षित श्रमिकसभकेँ घरेलु काम, निर्माण, कृषि, वस्त्र उद्योगसँ यौन क्षेत्रधैर विभिन्न आर्थिक शोषणक क्षेत्रमे खटाएल जाइत अइछ ।
अन्तर्राष्ट्रिय श्रम सङ्गठनद्वारा दासत्व आ आधुनिक शोषण अन्त्य करबाक लेल सरकार, नागरिक समाज तथा समुदाय बीच सहकार्य आवश्यक भेल कहैत पीड़ितके उद्धार, पुनःस्थापना, न्याय आ दीर्घकालीन सुरक्षामे जोड़ देल गेल अइछ । (रासस)
तस्बिर सौजन्यः अन्तर्राष्ट्रिय श्रम सङ्गठन





