जनता आ रोटी


बर्थाेल्ड ब्रेख्त

न्याय जनताके रोटी अइ
जखन रोटी दुर्लभ हो तखन चारु दिस भूख रहैछै
जखन बेस्वाद हाे, तखन असन्तोष रहैछै
खराब न्यायके लुलुआ दे
दहिया फोफरी पडल गन्धहीन न्याय
जे देरी स भेटय, ओ बासी अइ
जहिना रोटी सबदिन चाही
न्याय सेहो सबदिन चाही
लोकसबके चाही
सबदिन भइर पेट, पोष्टिक, न्यायके रोटीे
न्यायके रोटी सेहो
जनतेके हाथे पाकक चाही
भइरपेट, पौष्टिक सबदिन

(अनुवाद – राेशन जनकपुरी)

ताजा खबर
लोकप्रिय