बर्दियामे बाघ, कृष्णसार आ मिथिला


नियात्रा–मिथिला दलान

धर्मेन्द्र विह्वल

नेपालमे कोनो नदीपर बनल सब सँ लम्बा पक्की पुलके लम्बाई कतेक छै ? सामान्य लोकऽकेँ एहि प्रश्नके उत्तर नै बुझल भऽ सकैए । एकबेर यात्राक क्रममे हमरा इएह लम्बा पुल देखबाक अवसरि भेटल । देखि कऽ नैन जुरागेल । शायद सम्बतक २०७० सालऽक कोनो महिना छलए । हमरा मोन पड़ैए, हम वर्दिंयाक मुख्यालय गुलरिया सँ कैलाली जिलाक टीकापुर जा रहल छलौं । पुलके देखिते हम गाड़ी सऽ उतैर पैदल एहिपार सँं ओहिपार गेल रही । पुलपर चलैत नदीक दूनुदिस देखबाक आनन्दे अनुपम छलए । नदीक पसरल चतरल धार । कलकल बहैत शीतल जल । निर्मल कञ्चन । ओह, आइयो मोन पडैए तँ अनायस आह्लादित भऽ जाइत छी ।

कोठियाघाटऽक लम्बा पुल

बड़ लौल रहए नेपालऽक सब सँ लम्बा पुल देखी । कोठियाघाटमे कर्णाली नदीपर बनल वर्दिया आ कैलाली जिल्लाके जोडऽबला एक हजार १५ (१०१५) मीटर लम्बा पुल ई दूनु जिल्लाके लेल तँ महत्वपूर्ण अइछे, पश्चिम नेपालऽक ग्रामीण इलाकाकँे देशऽक मूलधार सँ सेहो जोडैत अइछ । हुलाकी सड़कपर बनल एहि पुलऽक निर्माणके बाद एहि क्षेत्रक सामाजिक–आर्थिक गतिविधिमे बहुत बेसी सकारात्मक प्रभाव पड़ल स्वीकार कएल जाइत छै । एहि पुलऽक अभावमे विगतमे ई क्षेत्र बहुत समय धैर एक टापुक रुपमे परिचित छलए । पुल सञ्चालनमे एलाक बाद अवस्थामे परिवर्तन एलैए ।

कर्णाली नदीक दू धारऽक बीचमे रहल एहि क्षेत्रमे ई पुल निर्माण सँ पहिने यातायातऽक साधन प्रभावी नै छलए । मुदा आब पुरान अवस्था नै छै । टीकापुर आ गुलरियाबीच कम समयमे सहजतापूर्वक यात्रा कएल जा सकैंए । तकरबाद हम अनेकबेर ई पुलपर सँ यात्रा केने छी । मुदा पहिलबेरक स्मृति किछु विशेष छलए । सँगमे रहैथ नेपाल पत्रकार महासंघके लुम्बिनी प्रदेशऽक वर्तमान अध्यक्ष शुक्रऋषि चौलागाई आ पत्रकार महासंघ वर्दियाक पूर्वअध्यक्ष राजेन्द्र धिताल । हमरा इहो मोन पड़ैए जे पुलपर यात्रा करैतकाल हम चौलागाई आ धितालकेँ अपन प्रशन्नता सँ अवगत करौने रहियैन ।

बर्दिया निकुञ्जऽक पहिल भ्रमण

लुम्बिनी प्रदेशके सीमान्त जिला वर्दिया अनेक कारण सँ चिन्हल जाइत अइछ । चर्चित वर्दिया राष्ट्रिय निकुञ्ज एतहि अइछ । बाघ आ हाथीक लेल विशेषरुपेँ चिन्हल जाएबला एहि निकुञ्जमे चितवन सँ गैंडा सेहो पहुँचाएल गेल अइछ । आब तऽ एतऽ बाघऽक सँगहि गैंड़ाक संख्या सेहो खुब बढ़ल छै । अन्य बन्यजन्तु तऽ छैहे । निकुञ्जऽक अवलोकन आ वन्यजन्तु जँ देखऽ चाहै छी तँ आहाँके ठाकुरद्वारा क्षेत्र जाए पड़त । अम्बासा नामक स्थान सँ करिव नओ दस कीलोमीटरऽक यात्राक बाद ठाकुरद्वारा पहुँचल जा सकैए । ठाकुरजीक भव्य मन्दिरक कारणे एहि स्थानके नाम ठाकुरद्वारा पड़ल अइछ । कर्णाली नदीक एक शाखाक किनारपर बसल ई वन्य क्षेत्र नेपालऽक महत्वपूर्ण पर्यटकीय गन्तव्य अइछ । हाथीपर चइढ कऽ या जीपके माध्यम सँ जंगल सफारी कऽ आहाँ वन्यक्षेत्र घुइम सकै छी आ वन्यजन्तु अवलोकन कऽ सकै छी । स्थानीयक मोताविक जँ आहाँक भाग्य नीक अइछ त बाघ देखबामे आएत अन्यथा गैंड़ा, चितुवा लगायतऽक अन्य जन्तुके देखि कऽ आहाँके सन्तोष करऽ पड़त । एहि जगह सँ हमर अनेक स्मृति जुड़ल अइछ ।

हम अनेकबेर गेल छी । अनेकबेर बहुतो समय बितेने छी । जँ हम गलत नै छी तँ बेरबेर कऽकऽ हम एतऽ दू महिना अर्थात साइठ दिन सँ बेसी समय वितेने हएब । हम पत्रकारिताक सँगहि प्रशिक्षण (सहजीकरण)क काज सँ सेहो जुड़Þल छी । विविधविषयक सहजीकरणक क्रममे कार्यभूमीक रुपमे ई जगह हमरा उपलब्ध होइत रहल । हम पहिने कहलौ,ं हम एतऽ अनेकबेर गेल छी आ अनेक स्मृति हमर मानसपटमे सुरक्षित अइछ मुदा एतऽ सबहक चर्चा सम्भव नै छै । मुदा किछु स्मृति हम चर्चा करऽ चाहब ।
हमरा कनेकने मोन अइछ ठाकुरद्वाराक पहिल यात्रा । शायद २०६७ सालके कोनो महिना हेतै, नेपाल पत्रकार महासंघ वर्दियाक पुर्वअध्यक्ष आ वर्तमानमे पर्यटन व्यवशायी श्रीराम सिग्देल आ ओहि समयमे विविसीमे क्रियाशील पत्रकार नेत्र केसीसँग हम ओतऽ गेल रही । बहुत पहिने सँ जेबाक प्रतीक्षासूचीमे रहल ठाकुरद्वारा पहुँचलाक बाद जे सुखद अनुभूति हमरा भेल छलए तकर वर्णन नै कएल जा सकैत अइछ ।

अखन तऽ एतऽ स्थानीय वस्ती किछु विस्तारो भेल छै । छोटछिन वजार क्षेत्र आकार लऽ रहल छै । मुदा जहिया हम पहिलबेर गेल रही तहिया तँ ई पूर्णरुपेँ जंगल छलए । वास्तवमे कही तँ कोनो जंगलक एतेक सघन अनुभूति हमरालेल ओ पहिल छलए । साँझमे पहुँचल रही । खानपिनऽक बाद रात्रिविश्राम आ प्रातःकाल हाथीपर सवार भऽ जंगल सफारी । सब जानवर देखलियै मुदा बाघ नै देखलियै । शायद भाग्य नै छलए । श्रीराम तहिया धैर पत्रकारे छलैथ, मुदा एखन भूमिका परिवर्तन भेल छैन, पर्यटन व्यवशायी छैथ । शायद ई भूमिका परिवर्तनक प्रयास ओ तहिये सँ कऽ रहल छैथ । पहिलबेर ई भूमी देखेबालेल श्रीकृष्ण आ नेत्रप्रति आभार ।

जंगलमे बाघ दर्शन

पहिलबेर बाघ नै देखलौं । मुदा एकबेर हमरो भाग्य बदलल आ हमहुँ बाघ देखलौं । शायद २०७०÷७१ सालऽक कोनो महिना । संयुक्त राष्ट्र संघीय कार्यक्रमऽक अग्रसरतामे एतऽ एक प्रशिक्षणक आयोजन भेल छलै । हम सहजकर्ता रही । कार्यक्रमऽक अन्तिम दिन जीप चइढ़ जंगल सफारी जेबाक नियार भेल । ओहि समूहमे मित्र बबिता वस्नेत, शिव विश्वकर्मा, एलिजावेथ, एकगोटे आरो (शायद) आ हम छलौं । गाड़ीक प्रवन्ध केने रहैथ होटलके सञ्चालक राम जी ।

जीपऽक माध्यम सँ जंगल सफारीक अनुभव ई हमर पहिल छलए । रोमाञ्चऽक अनुभूति कोना व्यक्त करु । जंगलऽक बीचमे कच्ची रस्ता । चारुकात गाछवृक्ष, झाड़झंखार, खढ़पात आदिआदि । हरिण, जंगली सुगर, नील गाय, विविध जाइतक वानर, चितुवा, मयुर, विभिन्न चिड़ै देखैत हमसभ गाड़ीपर आगाँ बइढ़रहल छलौ । गाड़ीक चालक हमरासभकेँ कहने रहैथ–आहाँसभ बाजब नै । आवाजक हल्ला सँ जानवरसब भाइग सकै छै । हँ, दोसर बात जँ बाघ देखाएत तँ ओकरादिस नै ताकलजकाँ करब । गाड़ीमे बैसले रहब, नै उठब । फोटो त खिचबे नै करब । ओ कहिरहल छलैथ–साकांक्ष रहब । बाघ कखनो देखबामे आइब सकैए । मुदा ३÷४ घण्टा भऽ गेल छल, बाघ देखबामे नै आएल । हमसभ एकहिसाबे निराश भऽ गेल छलौं, आ कि तखने गाड़ीचालक कहलैन–चूप भऽ जाउ । वामादिस खढ़ऽक झाड़झंखारमे शायद बाघ आराम कऽ रहल अइछ । ओ गाड़ीक गति कने कम करैत आगाँ देखैत कहलैन–बाघे छै । आहाँसभऽकेँ बाघके देखबामे आसान हुअए तएँ गाड़ीके गति कम कऽ देने छी । मुदा हम गाड़ी रोकब नै । खतरा भऽ सकैंए । हमरासभऽक रोमाञ्च, उत्कुकता, कौतुहलता एकसँग बइढ रहल छलए ।

मोनऽक कोनो कोनमे एक प्रकारक त्रास, संशय आ डर । हम गाड़ीक पाछुक सीटपर आ बबिताजी आगाँ । गाड़ी बाघऽक सोझाँ सँ आगाँ बढ़लै । गाड़ीमे सवार हमसभकेओ बाघके देखलियै । तखने गाड़ीमे सँ केओ एकगोटे फोटो खिचबाक प्रयास केलैन । शायद ई बात बाघके भनक लाइग गेलै । हमरासभऽक गाड़ी आगाँ बइढ गेल छलै, तखने बुझाएल जेना बाघ पाछाँ आइबरहल अइछ । पाछाँ घुइर देखलियै । बाघ हमरासभऽक गाड़ीक पाछाँ दौडैत खिहाइर रहल छलए । चालक गाड़ीक गति तीब्र बनौलैन । बाघ पछोड़ धेनहि छलए । गाड़ी आगाँ दौडि़रहल छलए आ बाघ पाछाँ । हमरा बुझायए ई क्रम करिव दू किलोमीटर धैर चललै । कनेकालके बाद बाघ दौड़ब छोइड जंगलमे कतौ चइल गेलै । हमरासभऽक गाड़ी आगाँ बइढ़ तऽ रहल छलए, मुदा लगै छलए जेना जंगलक सब जानकारी रहल महान जानवर कोनो दोसर रस्ते जा हमरासभऽकेँ आगाँ सँ घेरऽ तँ नै गेल अइछ ? मोने छियै ने, अनेक प्रकारक तर्कवितर्क । बहुत दूर धैर बाघकेँ पुनः नै देखलाक बाद हमसभ धीरेधीरे निश्चिन्त भऽ रहल छलांै जे आब बाघ नै आएत । नै आएल । ओहि दिनके स्मरण हम कोना करु ? शव्द नै अइछ । जीवनपर्यन्त अविष्मरणीय क्षणके रुपमे रहत बाघ–दर्शनऽक ओ स्मृति । बाघसन जानवर जाहिखन आहाँक गाड़ीके खिहारैत हुअए आ आहाँक गाड़ीक छत उघारे हुअए आ कच्ची रस्ताक कारण आहाँक गाड़ीकेँ अपेक्षित गति नै प्राप्त भऽ रहल होइक, ओहि अवस्थामे विकसित मनःस्थितिके मात्र बोध कएल जा सकै छै । अभिव्यक्ति आ व्याख्या असम्भव । होटल पहुँचलाक बाद बुझाएल जे आब जी गेलौ । लागल जेना प्राण घुइर आएल ।

हमसभ आजुक ई घटना ओतऽ सबकेँ सुनेलियै । सभकेओ हमरासभऽकेँ भाग्यशाली होबाक बात कहिरहल छलए । हम मोनेमोन कहलौ, कनिएलए जान चइलगेल छलए आ ई सभ भाग्यशाली होबाक बात कऽ रहल छैथ । ई स्मरण हम अनेकोबेर लिखबाक प्रयत्न केलौंं मुदा एहि सँ पहिने लिखल नै पार लागल । एहिबेर अपनेसभ सँ पहिलबेर साझा कऽ रहल छी ।

वर्दियाक अनेक स्मृति

एहि जिलाक अनेक स्मृति सुरक्षित अइछ हमरालग । राजापुर यात्रा आ एतऽ स्थापित प्रसिद्ध राइसमीलके अवलोकन । बबइ नदीक किनारमे रहल गोही प्रजनन केन्द्र । २०६६ सालके पुस महिनाक एक दिन, भुरीगाउँ सँ गुलरिया धैरके ३५ किलोमीटर यात्रा तय करबामे गाड़ीमे हमरा आ पत्रकार महासंघके हमर कार्यसमितिक महासचिव पोषण केसीकेँ करिव सात घण्टा लागल रहए । कारण रहए कुहेश । एहन कुहेश सँ हमरा आइ धैर फेर नै पाला पड़ल अइछ । एकबेर नेपालगञ्ज सँ गुलरिया धैरके ३६ किलोमीटरके यात्रा करिव पाँच घण्टामे तय केने छी ।

पत्रकार मीनराजसँगे सूचनाक हकसम्बन्धी तालिम सञ्चालनके सन्दर्भमे बँसगढी, बारवर्दिया, भुरिगाउँलगायत ५÷६ टा स्थानीय तहऽक भ्रमण । संवाद प्रशिक्षण कार्यक्रमके सहभागी कुलराज चौधरी, तोफा यादव, बडघर कमलेश चौधरी, कोइराला चौधरी, अधिवक्ता काशीराम चौधरी, तेजबहादुर भाट (हाल– मेयर मधुवन नगरपालिका)आदिसँगक भेटघाट । तहिना गुलरियालगेमे रहल कृष्णसार संरक्षण क्षेत्रमे कृष्णसार (हरिणक एक प्रकार)सँ सान्निध्य सेहो हमरालेल अविष्मरणीय अइछ । करिव दू सओ ५० सँ बेसीक संख्यामे कृष्णसार रहल ई क्षेत्र कृष्णसारलेल प्रसिद्ध आ विश्वविख्यात अइछ ।

एतऽ पत्रकार मित्रलोकैन सँ भेटघाट हमरा आह्लादित करैत अइछ । प्रशिक्षण, सेमिनार आ अन्य जमघटमे पत्रकारलोकैन स्व. कृष्णप्रसाद बस्याल, स्व. ईश्वरीप्रसाद बस्याल, युवराज श्रेष्ठ, कमल पन्थी, ठाकुरसिंह थारु, यादव आचार्य, राजेन्द्रप्रसाद धिताल, श्रीराम सिग्देल, मिनराज शर्मा, निर्मल घिमिरे, कुसुम सेन्चुरी आदिसँगे विताओल गेल क्षणसब सेहो हमरालेल महत्वपूर्ण अइछ । तहिना नेपाल प्रेस युनियनके पूर्व केन्द्रीय अध्यक्ष बद्री सिग्देलके गाम ढोढरीमे करिव दस वर्ष पहिने विताएल राइत आ ओतऽ एकटा किराना दोकानमे भाँटा पका कऽ सन्ना बना चखनाक रुपमे खाएल काइलेजकाँ लगैए । एतबए नै एकबेरके यात्रामे बद्रीजीके नामपर एकटा होटेलमे जमि कऽ खाएलपिअल सेहो कम स्मरणीय नै अइछ । दोसर पत्रकार छैथ भावुक योगी, टाइगर एफएमके सञ्चालक । हम जँ कहिओ वर्दियाक राजमार्ग होइत यात्रा करैत छी तँ भावुकऽक आतिथ्य हमरालेल महत्वपूर्ण भऽ जाइए । जँ समय रहैत अइछ तँ हुनकर आतिथ्य स्वीकार करैत हुनकासँगे भोजन हम करितेटा छी ।

स्मृतिमे गुलरियाक पहिल भ्रमण

वर्दिया पहिलबेर आएल बात सेहो हमरालेल स्मरणीय अइछ । २०५६ सालऽक जेठ महिना । कमैयासम्बन्धी एक फेलोशिप पूरा करबालेल हमरा गुलरिया जेबाक छलए । मुदा वर्दिया सँ हम पुरा अनभिज्ञ छलौं । तहिया हम हिमालय टाइम्समे काज करैत रही आ एहि पत्रिकालेल वर्दिया सँ युवराज श्रेष्ठ रिपोर्टिग करैत छलैथ । हम गुलरिया गेलौ आ युवराजेके सहयोग सँ फेलोशिप पुरा केलौं । तहिया एतऽ नीक होटल सेहो नै रहै । हम ओहि यात्रामे युवराजेक डेरामे रहल छी । तहिआ आ आजुक गुलरियाक तुलना नै कएल जा सकै छै । सबकिछु बदलल छै । ओहि यात्रामे निकटता विकसित भेल मित्र राकेश वस्याल आब एहि जगतमे नै छैथ । हार्दिक श्रद्धाञ्जलि ।

वर्दियामे मिथिला

ओहिबेरके यात्राक बाद गुलरिया सँ आर एक प्रकारऽक हमर सम्बन्ध स्थापित भेल । ओ अइछ, मिथिला सम्बन्ध । पहिलेबेरके यात्रामे युवराज, राकेश, पन्थी आ धितालजी हमरा एतऽ मैथिलीभाषीसब होबाक बात कहने रहैथ । हमर जिज्ञासा अनायसे बढल रहए । मूल मिथिलाभूमी सँ एतेक दूर गुलरियामे मैथिलीभाषी ! खुशीयो लागल रहए आ अजगुत सेहो । बादमे एक यात्रामे (शायद २०७० सालके प्रतिनिधिसभा निर्वाचनके समय) नेपाली कांग्रेसके नेता सञ्जय गौतम सँ भेट भेल छलए । ओ हमरा जानकारी दैत कहने रहैथ–एतऽ नीक संख्यामे मैथिलीभाषी छैथ, नीक संख्यामे मतदाता सेहो छैथ । ओ हमरा कहने रहैथ–जँ सम्भव छै तँ आहाँ एतऽ एक÷दू दिन रुइक कऽ ई मतदातासभ सँ भेट कऽ कऽ हमरा (ओ उम्मेदवार रहैथ) कने सहयोग कऽ दिअ । हम ओहिबेर दू÷तीन दिन तऽ नै रुइक पेलौं । एक राइत रहि हम गौतमजीकेँ सहयोग करबाक प्रयास केने रहियैन । ओहिबेरमे हमरा किछु मैथिल परिवार सँ भेट भेल रहए । खुशी लागब स्वाभाविक । किछु परिवार सँ तऽ हम एखन धैर निरन्तर सम्पर्कमे छी । एखनो जहिआ कहिओ गुलरिया जाइत छी हिनकासभ सँ भेट करबाक प्रयत्न रहैए । गुलरियालगायत वर्दियाक शिक्षा, उद्योग–व्यवशाय, समाजसेवा आदि क्षेत्रमे स्थानीय मैथिल समाजऽक महत्वपूर्ण योगदान अइछ ।

पत्रकार यादव आचार्यक कहब छैन, बर्दियामे आठ दशक पहिने विजारोपण भेल मिथिला समाज एखन बेस सुदृढ भऽ रहल अइछ । हुनक कहब छैन, विभिन्न रोजगारी एवं नोकरीक सिलसिलामे बर्दिया आएल मिथिलाञ्चलवासी एखन कमोवेश जिलाभरि वसोवास कऽ रहल छैथ ।
स्थानीय कलेजमे प्राध्यापन करैत विगत तीन दशक सँ गुलरिया रहिरहल अञ्जनी मिश्र कहैत छैथ, प्रारम्भक दिनमे सदरमुकाम गुलरियामे रहल मिथिलावासी एखन जिलाक मधुवन, राजापुर, ठाकुरबाबा, बारबर्दिया, बाँसगढी नगरपालिका, गेरुवा तथा बढैयाताल गाउँपालिकामे सेहो छिटफुटरुपेँ बसोवास कऽ रहल छैथ । पत्रकार आचार्य जानकारी दैत कहैत छैथ, राणाकालमे गुलरियामे स्थापित भाषा पाठशालामे प्रधानाध्यापकके रुपमे २००४ सालमे आएल पण्डित पद्मकान्त झा एतऽ आएल पहिल मिथिलावासी छलैथ । तत्पश्चात २०१२ सालमे पद्मकान्तक सहोदर भाए सुभद्र झा (गुरुजी) सेहो उएह पाठशालामे सहायक शिक्षकके रुपमे आएल छलैथ । झा परिवारक श्यामचन्द्र एखनो अध्यापन पेशामे संलग्न छैथ ।
पत्रकार आचार्यक मोताविक २०१८ सालमे सुखदेव पाठक आ सुरेन्द्र मिश्रा मिथिलाञ्चल सँ बर्दिया आएल छलैथ । सिभिल ईन्जिनियरक रुपमे एतऽ आएल मिश्राजी बादमे व्यापार–व्यवशायमे संलग्न भेलैथ । स्थानीयक अनुसार एतऽ व्यापार–व्यवशाय शुरु केनिहारमध्य मिश्रा परिवारक गणना प्रमुखताक सँग होइत छै । वागेश्वरी स्टोर एतहुका चर्चित आ प्रतिष्ठित व्यवशायिक प्रतिष्ठान अइछ । एकर प्रारम्भ सुरेन्द्रजी केनै छलैथ जे एखन पुत्रसभ सम्हाइर रहल छथिन । तहिना २०२६–२७ सालदिस कृष्णचन्द्र ठाकुर शिक्षकके रुपमे बाँसगढी आएल रहैथ । इएह समयमे फरेस्टरक रुपमे जयनारायण झाक आगमन भेल रहए ।

हाल बर्दियामे हुनक पुत्र रहैथ छथिन । पत्रकार राजेन्द्र धितालऽक अनुसार बर्दियामे करिव दू सओ ५० घरपरिवारऽक लगभग सात सओके संख्यामे मैथिलीभाषी मतदाता छैथ । पत्रकार धितालक मानव छैन, वर्दियाक शिक्षा, विकास आ जागरण अभियानमे मैथिलीभाषीसभऽक योगदान अतुलनीय अइछ । धिताल, सुधाकर मिश्र, अञ्जनी मिश्र, वैद्यनाथ झा, सुमन झा, आशिष चौधरी, दिनवन्धु यादव, राजेन्द्र मण्डल, अरुण यादव आदिक नाम गनबैत आइयो हिनकालोकैनकेँ योगदान महत्वपूर्ण रहैत आएल बतौलैन । धिताल कहैत छैथ, एहन व्यक्तिसभऽक सूची बहुत लम्बा भऽ सकैए, सभऽक नाम गनेनाइ सम्भव नै अइछ ।

पछिला समयमे एतऽ मिथिला प्रतिष्ठान सेहो स्थापित कएल गेल अइछ आ एहि प्रतिष्ठानमार्फत संगठित भऽ मैथिलीभाषीलोकैन निज भाषा, सँस्कृति एवम् समुदायक उत्थानसम्बन्धी कार्य कऽ रहल छैथ । गुलरिया नगरपालिका वार्ड नम्बर ७ मे प्रतिष्ठानक कार्यालय भवन निर्माणाधीन अइछ । एहि जिलामे जतऽ जतऽ मैथिलीभाषी छैथ ओ सब ठाममे मिथिला संस्कृति पल्लवित भऽ रहल अइछ । एतऽ छैठ, अनन्त पूजा, कोजाग्रत पूर्णिमा, होलीलगायतक पर्व भव्यतापूर्वक आयोजित होइत अइछ । शायद एकबेरके होलीमे एतऽ हमहुँ सहभागी भेल छी । पर्वमे सहभागी भऽ साँझ डेरा घुरलाक बाद हम ई सोचबालेल बाध्य भेल रही जे संस्कृति संरक्षणक सन्दर्भमे वर्दियाक मैथिलीभाषी सँ बहुतकिछु सिखनाई जरुरी अइछ ।

राष्ट्रिय समाचार समितिक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा, पत्रकारिता, साहित्य एवम् समसामयिक विषयसबमे सशक्त रुपमे कलम चलबैत आइब रहल छइथ ।) सं.

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