ललित बाबू : नाम जे मिथिलाक इतिहास बनि गेल


 

डॉ शेफालिका वर्मा

कोनो कोनो नाम अनायास एकटा पवित्र उच्चारण बनि जायत अछि, एकटा इतिहास बनि जायत अछि । भारत वर्षक सांस्कृतिक , राजनीतिक गरिमा के चारि चान लगव बला में मुख्यतः मिथिलाक विभूति सब रहल छथि। सुदूर अतीत सं मिथिला अपन अक्षय कोष सं देश के कोनो ने कोनो रुपे अपन अप्रतिम सहयोग दैत रहल।

ललित नारायण मिश्र जी के नाम मिथिला नै, बिहार नै समस्त भारत में विकासोन्मुखी चेतना लेल स्वर्णाक्षर से लिखल जायत। वो राजनीतिज्ञ नय , नेता नय वरन एकटा पूर्ण मानव छलाह ,एकटा निरहंकार व्यक्तित्व ,निःस्वार्थ। ओ एकटा एहेन व्यक्तित्व छलाह जकर शीतल ,निर्मल छाहरि में अपना के लोग आश्वस्त बुझैत छल , जिनक आदर ,स्नेह में जन जनक हृदय उच्छ्वसित भ उठैत छल।

कहवा ले वो कांग्रेस पार्टी में छलाह ,साँच ते ई छल जे वो जन जन के ह्रदय गगन में चमकैत सुरुज छलाह। सहजता हुनक स्वभाव छल ते सरलता हुनक आत्मीयता। आय यदि ओ रहितैथ ते सबसे पहिने मिथिला राज्य बनि जेतियैक , कतेक राज्य बनि गेल जकर कोनो अतीत नै छल मुदा ,मिथिला राज्य , सीताक नगरी उपेक्षिते रहि गेल।

मिथिलांचल के आर्थिक , सामाजिक विकास लेल ललित बाबूक योगदान अविस्मरणीय रहत। ओ बिहार के राष्ट्रीय मुख्य धारा से जोड़वा लेल प्रतिबद्ध छलाह , जखन विदेश मंत्री छलाह ते नेपाल से कोसी योजना पर गप्प कय बाढ नियन्त्रण एवम पश्चिमी नहर के निर्माणक नेपाल – भारत समझौता करौलनि। लखनऊ सं आसाम धरि लेटरल रोड बनेवाक सोचने छलाह . की भेल ,की नै भेल ओकर ज्ञान हमरो नै अछि
पश्चिमी नहर के निर्माणक नेपाल – भारत समझौता करौलनि। लखनऊ सं आसाम धरि लेटरल रोड बनेवाक सोचने छलाह . की भेल ,की नै भेल ओकर ज्ञान हमरो नै अछि

हुनक बेटी बीना आ हम दुनु गोटे बहुत नीक दोस्त छलौं , हम सब संगे मेट्रिक के परीक्षा देने रही। सुपौल सेंटर छल , मेट्रिक के परीक्षा के बीच हमरा ज्वर बोखार आबय लागल , माँ पापा पटना में रहैत छलाह , हम सुपौल अपन दीदीया लग रहैत छलौं।

परीक्षा खत्म भेलाक बाद कहियो कहियो ललित चाचा अपने आबि जायत छलाह , आ हमरा बीणा दुनु के कहियो अपन घर , कहियो कायस्थ टोली दिदिया ओतय छोड़ी दैत छलाह , हमरा हरदम उत्साहित करैत रहैत छलाह –कोनो बातक चिन्ता नय करह , खाली परीक्षा आ अपन स्वास्थ्य। .चूँकि हमर पापा श्री ब्रजेश्वर मल्लिक जखन सहरसा में सीनियर डिप्टी कलक्टर छलाह ,हुनका से चाचा जी के समय समय पर गप्प होइत रहैत छल। ओहि दिन अंग्रेजीक परीक्षा छल , वो वीणा के छोड़वा ले सेंटर आयल छलाह हमरा १०२ डिग्री ज्वर छल , चेहरा तमतमा रहल छल। हमर हालत देखतहि बजलाह –तो एहेन हाल में परीक्षा कोना देबही / तखन चचा जी जीप से उतरि हेडमास्टर से कहि हमरा लेल अलग से बेड के इंतजाम करा देलनि ।

हमर ते माँ पापा सब पटना में छलैथ , हम दिदिया कते रहि परीक्षा दैत छलौं। पापा के नय बुझल छल जे हम बोखार में परीक्षा द रहल छी . जखन पापा के ज्ञात भेल जे हमर हाल तँ दीदीया कहि देलक रजनी मरि जेतै तैयो ओकर परीक्षा नय छोडायब। बड्ड कम अवसर भेटैत छैक , खास कय लड़कीक जीवन मे एक बरिस बहुत होयत छैक ।
डोमेस्टिक साइंस के प्रैक्टिकल छल , हम आ बीणा जल्दी जल्दी किछ किछ बना रहल छलौं , अन्तिम दिन परीक्षाक छल , कनिये काल में एकटा गोर धप धप लड़की हरियर कचोर नुआ गुलाबी पाढ़ि , भरि माथ सिन्दूर , उगैत सुरुज सन ज्योतित टीका माथ पर साटल , दुनु हाथ में लाल लाल लहठी जेना साक्षात् भगवती आबि गेल होइथ। कनिक काल बीणा सँ गप्प कय चलि गेलीह – हमर जिज्ञासा –के छल बीणा ? हमर चाची ? चाची — हम बीणा ? हमर चाची ? चाची — हम अकचका गेलौं एक रत्तीक छोउँड़ी एतेक बड़का सम्बन्ध ??

परीक्षा खत्म भेलाक बाद बीणा कहलक हमर छोटका कका मृत्युजंय बाबू के ब्याह किछ मास पहिने भेल छल , आय बाबूजी नय एलखिन तैं काकी के भेज देलखिन , बाप रे एतेक सुन्दर ! बीणा हँसि देलीह –नाम छै -अम्बिका — हमर मोने तुरत उठल सांचे भगवतीय ने !!
समय के अंतराल कखनो नदी कखनो पोखरि एहिना होइत रहे छैक

दोसर चित्र मन पड़ैत अछि , जखन ओ रेलमंत्री छलाह। एकबेर सहरसाक कांग्रेस ऑफिस जे सुपौल वाली रेलवे लाइन के बगल में छल – में मीटिंग चलि रहल छलैक –, अचक्के सहरसा जंक्शन से खुलल ट्रेन विजित योद्धा जकाँ हुंकार मारैत सुपौल दिस चलि गेल . मीटिंग में बैसल एक सज्जन बजलाह। .ललित बाबू ,ई ट्रेन ऑफिसक आगू सं चली जायत छैक , एहिठाम एकरा रुकवाक स्टेशन रहितैक ते आधा सहरसा वलाक फायदा भ जेतैक।

रेलवेक एकटा अधिकारी ओहिठाम बैसल छलाह –बागची , अभी जो ये सुपौल वाली ट्रेन यहाँ से गयी , क्या यहाँ फलांग स्टेशन बन सकता है . बागची तुरत जबाब देलनि –हाँ ,क्यों नहीं सर।
–तो फिर रुकवाइये

वागची ओहिठाम से तुरत सर्किट हाउस गेलाह , ओहि ठाम से गोरखपुर फोन लगाय आनन फानन में ओहि ठाम फलांग स्टेशन बनि गेल। हमर पीटीआई पतिदेव ललन वर्मा जी वकील क संग प्रेस रिपोर्टर सेहो छलाह , वो सेहो ओहि मीटिंग में प्रेस में बैसल छलाह। मीटिंग चलिए रहल छल कि सुपौल से आवै वाली रेलगाड़ी ओहिठाम रुकि गेल।

सबहक चेहरा पर अद्भुद उल्लास संगे ललित बाबू के जय जय के नारा। ई छल ललित बाबूक व्यक्तित्व , कार्य करेवाक अद्भुद क्षमता , निपुणता . आ हुनक अधीनस्थ पदाधिकारीक त्वरित कार्यवाही। आ ओहि दिन से सहरसा कचहरी स्टेशन बनि गेल । .
भपटियाही रेलवे स्टेशनक उद्घाटन छल , प्रेसक संग वर्मा जी सेहो छलाह –उजाड़ धरती , वीरान बस्ती कोसी पीड़ित क्षेत्र आ ओहि ठाम रेलवे लाइन के उद्घाटन अपने आप में इतिहास छल। हमर पित्ती स्व ललितेश्वर मल्लिक जी कहने छलाह — के माइक लाल होयत जे एहि क्षेत्र में रेलवे लाइन आनत – आ ओ माईक लाल आनि देखा देलक। एक एकटा बात पूर्ण करवा लेल कतेक प्रतिबद्ध —अनुकरणीय।

आय ललित बाबू नय छथि सिंहेश्वर , महिषी आदि मिथिलाक समस्त तीर्थस्थल पर रेलक लाइन बिछा देवाक हुनक संकल्प ,हुनक स्वप्न हुनक संगे चलि गेल —-कोसी क्षेत्रक संग हरदम राजनीति होइत रहल। , सहरसा में बड़ी लाइन आनवाक स्वप्न देख बला आय ललित बाबू नय छथि सिंहेश्वर , महिषी आदि मिथिलाक समस्त तीर्थस्थल पर रेलक लाइन बिछा देवाक हुनक संकल्प ,हुनक स्वप्न हुनक संगे चलि गेल —-कोसी क्षेत्रक संग हरदम राजनीति होइत रहल। , सहरसा में बड़ी लाइन आओत , जनता सपनाइते रही गेल आ बड़ी लाइन सहरसा ,पूर्णियाक उपेक्षा करैत मानसी से कटिहार चलि गेल वैमातृक आ क्रूर व्यवहार कोसी निवासी के सहन नए भेलैक मुदा साधन नय।

हम आ बीणा अलग भ गेलौं मुदा ओकर चिट्ठी हरदम अवैत छल –आ –एक दिन ओकर पत्र मुजफ्फरपुर से आयल –‘ रजनी हमर ब्याह भ गेल – जिनगी बदलि गेल ।

सहरसा में एक बेर सुनलौं जे ललित बाबू आयल छथि ते हमरा बड़ मन भेल जे भेंट करी , हमर पतिदेव जी एतेक पैघ आदमी , बड़का रेल मंत्री–तुरत हमरा दुनू गोटे के बजाय , अपना लग बैसय हाल चाल पुछलनि , वर्मा जी के अपन जमाय जकाँ आदर देलनि। ओ अंतिम भेंट छल , तकर बाद ते ओ एतेक व्यस्त भेलाह जे नाम सुनि सुनि हम सब खुश होइत छलौं। . रोज समाचार जे रेलमंत्री सौँसे मिथिलांचल के ट्रेन से बान्हि देथिन , झंझारपुर ,लौकहा रेल लाइन , भपटियाही सँ फारबिसगंज धरि रेल लाइन आह ! हम सब कल्पना करी कोना सब ठाम हम सब ट्रेन से घुमब ।

जखन वर्मा जी पीपी छलाह सहरसा जिलाक त सर्किट कोर्ट बीरपुर में होइत छल ते हम जरूर संग जाइत छलौं। कारन चाचा जीक बनवायल डोरमेट्री से हमरा प्यार भ गेल छल , ओकर छत खड़ पात , खड़िका नय जानि की की चीज स बनल , प्रकृतिक कोर में बनपाखी जकाँ उड़वा ले उद्धत , नै जानि चाचा जी कोन कलाकार के अनने हेताह , कल्पनाक उड़ान अकास छुबैत होयत ओकर , कतेक कविता ओहि डोरमेट्री में हम लिखने छी , पागल भ गेल रही ओहि डोरमेट्रिक प्यार में हम , पता नै आब ओ कोना होयत , ओकरा प्यार कर बला केओ अछि की नै –एतेक दूर दिल्ली से किछ नै बुझैत छी ।

समूचा मिथिलांचल हुनक व्यक्तित्वक शारदीय छाहरि में आश्वस्त भ विकासक स्वप्न देखि रहल छल , मैथिली के संविधान में जगह नै भेटल छल मुदा, ओ पण्डित जवाहर लाल नेहरू से बात कय साहित्य अकादमी मे मैथिली भाषा के स्थान देलनि
मिथिला पेंटिंग सौँसे रेलगाड़ी में छापि देलनि , लगैत छल जेना मिथिलांचल की सौँसे बिहार में विकासक बाढ़ि आबि गेल होइ। . मुदा काल के

गति केओ नै जनैत छैक ,केम्हर से चुपचाप आबि जायत छैक—ओ नै रहलाह ई खबर अचक्के सुनि सौँसे सहरसा के काठ मारि गेल , ककरो घर चूल्हा नै जरलै –सब के लागय जेना हुनकर घर के ,परिवार के कोनो सदस्य चलि गेल होइ। .
प्रत्येक ३ जनवरी के सहरसा के अकास कनैत छल , सब बाजय आय ललित बाबू चलि गेलाह आय ते पानि जरूर पड़तैक ..

डॉ शेफालिका वर्मा 2 जनवरी 2026
दिल्ली

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