अख्तियार दुरुपयोग राज्यके वैधानिकता आ सामाजिक न्यायके लेल गम्भीर चुनौतीः राष्ट्रपति पौडेल


काठमाण्डू, २८ माघः राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल अख्तियार दुरुपयोग कोनो सामान्य त्रुटि नै भ ई राज्यके वैधानिकता आ सामाजिक न्यायके लेल गम्भीर चुनौती भेल बतौलैन अइछ ।

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोगक ३५म स्थापना दिवसके अवसरमे आइ आयोजित विशेष कार्यक्रमकेँ सम्बोधन करैत राष्ट्रपति पौडेल प्राप्त जिमेवारी पूरा क सुशासन कायम करएदिस आयोगके ध्यान देबाक चाही से बतौलैन ।

“अख्तियार दुरुपयोग कोनाे सामान्य त्रुटि नै छै । ई राज्यके वैधानिकता आ सामाजिक न्यायके गम्भीर चुनौती छै”, ओ कहलैन, “मुदा, आइ आत्मसन्तुष्ट होबाक समय नै छै, आयोग शक्ति आ पद रहलामे कानुनी जवाफदेहितासँ कियो मुक्त नै भ सकैत अइछ से विश्वास आम नागरिकमे कायम करैजका काज करबाक अभाव छै ।”

सत्ता, शक्ति आ धन प्राप्तिके अनावश्यक मोहसँ प्रक्रिया, पद्धति आ प्रणालीके दुरुपयोग क नागरिककेँ भ्रष्टाचारदिस प्रवृत्त कराबैत अइछ से हुनक कहब छैन । मुदा, व्यवहार, आचरण आ अभ्याससँ हम भ्रष्टाचार नै करब आ भ्रष्टाचार नै होबए देब से प्रण कएलासँ सत्ता, शक्ति आ धन प्राप्ति मोहकेँ नियन्त्रण कएल जा सकैय आ भ्रष्टाचारकेँ निर्मूल कएला जा सकैय से हमर विश्वास रहल ओ उल्लेख केलैन ।

“सदाचार, नैतिकता, निष्पक्षता, पारदर्शीता एवं निर्भीकताकेँ जीवन पद्धतिके रुपमे आगु बढ़ा क काज कएलापर भ्रष्टाचार न्यूनीकरण तथा नियन्त्रण सम्भव छै । अइ लेल नीति, पद्धति, प्रविधि आ प्रवृत्तिगत सुधारक प्रयासकेँ प्रभावकारी बना क अनुशासन आ सदाचार प्रणालीके विकास होए से हमर इच्छा अइछ”, राष्ट्रपति पौडेल कहलैन ।

लोकतन्त्रके सुदृढ़ीकरण, आर्थिक विकास, सुशासन, सामाजिक न्याय आ समृद्धि हमरासभक इच्छा अइछ कहैत ओ सुशासन आ पारदर्शिता बिना लोकतन्त्रके प्रतिफल जनताके घरधैर नै पहुँचाओल जा सकैय से उल्लेख केलैन । “जनताके अपेक्षाअनुसारक विकास आ समृद्धि हासिल करैबला प्रमुख आ अनिवार्य शर्त अख्तियार दुरुपयोगक अन्त आ भ्रष्टाचार नियन्त्रण छै । लोकतन्त्र अपेक्षा कएने सुशासन, सामाजिक न्याय आ समृद्धिक अवधारणाकेँ मूर्तरुप देबाक लेल सब प्रकारक भ्रष्टाचारकेँ छानबिनक दायरामे आनए पड़त”, राष्ट्रपति पौडेल कहलैन ।

सहज आ सरल तरिकासँ जनतामे सेवा प्रवाह तथा सुशासनमार्फत देशक समृद्धि संविधान आ लोकतान्त्रिक गणतन्त्रके अभिष्ट भेल कहतै राष्ट्रपति पौडेल संविधान आ व्यवस्थाद्वारा कायम अइ अभिष्टकेँ पूरा करबाक लेल सम्पूर्ण ध्यान केन्द्रित होबाक चाही से धारणा व्यक्त केलैन ।

भ्रष्टाचार नियन्त्रणक लेल दृढ़ राजनीतिक प्रतिबद्धता पहिल शर्त भेल स्पष्ट करैत राजनीतिक पदाधिकारीसभक कार्यसंस्कृतिमे होएबला सकारात्मक परिवर्तनसँ प्रशासनिक क्षेत्रकेँ सेहो मार्गदर्शन हएत से हमरा विश्वास रहल ओ बतौलैन । (रासस)

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