बाजपेयीसँ लऽ कऽ नेपालक पूर्व प्रधानमन्त्री मातृकासँग गपसप कएने रहथि राम भरोस कापडि


नित्यानन्द मण्डल

मैथिली विकास कोष, जनकपुरधामक आयोजनमे बहुभाषाविद्, बहुविधावादी सिद्धहस्त, सशक्त हस्ताक्षर एवं सम्प्रति मधेश प्रज्ञा प्रतिष्ठानक अध्यक्ष श्रद्धेय रामभरोस कापडि ‘भ्रमर’ जीक दु गोट सद्यः प्रकाशित पोथी गपसप आ जंगलमे मंगलक लोकापर्ण एवं अन्तरक्रिया कार्यक्रम काल्हिखन कोषक सभागारमे सम्पन्न भेल अछि ।

मुर्धन्य साहित्यकार भ्रमरकेँ हिन्दी, नेपाली आ मैथिलीक प्रकाण्ड विद्वान व्यक्तित्वसभसँग अन्तरङ्ग बातचीत करबाक सुअवसर भेटल रहनि जे कहिओ गामघर, अर्चना आ आँजुर सन महत्तवपूर्ण मैथिली पत्रिकासभमे प्रकाशित भेल छलनि जाहिकेँ संग्रहक रूपमे गपसप नामसँ बहार कएलनि अछि ।

वस्तुतः राजनीति, समाज आ साहित्यक महान हस्ती सभक सँग ३० सँ लऽ कऽ ५० वर्ष पूर्वेहि भेल संवाद स्वयंमे एकटा समयक इमान्दार अभिव्यक्ति अछि जकरा अन्तवार्ता साहित्यमे परिलक्षित करब कम कठिन काज नहि । जाहिसमयमे ने रेकर्डर, नहि टेप करबाक तेहन संसाधन, ने आइकाल्हि जकाँ अडियो भिडियो अथवा रिर्कडिँग करबाक कोनो इन्तजाम, तेहनासन अवस्थामे बातो करब आ डाइरीमे टिपोट करब, फेर लिखिक लिपिबद्ध आ सम्पादन प्रकाशन करब सहजे कम चुनौतीपूर्ण काज नहि छल हएतैक, ताहिकेँ मुर्त रुप देवाक भागिरथी सत्प्रयास भ्रमर कएलनि ।

गपसपमे हिन्दी साहित्यक नक्षत्र अज्ञेय, भारतक सर्वाेच्च साहित्यकार, राजनीतिज्ञ एवं भारतक पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी, नेपाली साहित्यक महान विभूति एवं शिर्षस्थ व्यक्तित्व लोकनि सर्वश्री नेपालक प्रधानमन्त्री मातृका प्रसाद कोइराला, केदारमान व्यथित, माधव प्रसाद घिमिरे, परशु प्रधान, विजय मल्ल आ मैथिलीक सर्वाेच्च शिखरपर विराजमान डॉ. आनन्द मिश्र, पं. गोविन्द झा, प्रफुल्ल कुमार सिंह मौन आदि सम्मिलित छथि ।

तैं राजनीति आ साहित्यक शिर्षस्थ व्यक्तित्वलोकनिसँ भेल बातचित तत्कालिन समयक समाज, राजनीति आ भाषाक अवस्थितिक उद्दघाटन मात्र नहि करैत वरु ओहि समयक सांस्कृतिक उन्नति—अवनति, सत्ताक व्यवहार, विचार आ सम्बन्धक कालजयी दस्तावेजक रुपमे सेहो पर्यवेक्षण करैत अछि जे सुधि अन्वेषक, पाठक आ साहित्यमे रुचि रखनिहारलोकनिक वास्ते सेहो समादृत होइत से विश्वास कएल जा सकैए ।
निःसन्देह, पत्रकारिता आ संवादक मंच वास्तवमे जनसंवाद अछि । हमरा जनैत पत्रकारितामे तीनटा पक्ष बड बेसी महत्त्वपूर्ण होइत अछि—तथ्य, वस्तुपरकता आ समाज । समाजक अर्थ जनतासँ होइत अछि । पत्रकारिता हमरालोकनिक परिप्रेक्ष्यक याहए तीन प्रमुख आधार अछि । तैं कोनो प्रकारक सनसनी, शोर–गुल्ल, हंगामा आ दिखावाक बास्ते कोनो स्थान नहि । एहिसभसँ अपनाकेँ दूर रखैत छथि, भ्रमर । ग्रामीण पत्रकारिताक क्षेत्र आ इतिहासमे भ्रमरक सम्पादनमे दशकोंसँ प्रकाशित होइत आवि रहल गामघर पत्रिका एकटा ओहने महत्तवपूर्ण मिसाल अछि ।

गामघरक माध्यमसँ तथ्यपरक, जिम्मेदार आ वस्तुपरक समाचार एवं विचार प्रस्तुत कएल जा रहल अछि । आजुक क्रूरता आ धूर्ततासँ भरल षड्यंत्र–आधारित साहित्यिक–राजनीतिक दौरमे एहन साहित्यिक पत्रिका आ पत्रकार कोना टिकि सकैछ, याहए गहन अनुसंधान आ विमर्शक विषय भऽ सकैत अछि ।

वरेण्य सम्पादक–प्रकाशक भ्रमरकसँग साहस आ समझदारी छनि । ओ अपन पत्रकारिताक यात्रामे कन्टेंट पर कोनो समझौता नहि करैत छथि । ओ अपन विचार पर अडिग रहबाक आ अपने ढंगसँ चलबाक हिनकामे जवरजस्त तर्जुवा छनि । मौजूदा गति किछु मधिम छनि, मुदा शीघ्रहि अपन काजकेँ गतिमे आओर तेजी लओताह से कार्यक्रममे विश्वास दिऔलनि । तैं ने एखनिधरि करिव विभिन्न विधाक ५३टा पोथी बहार कऽ चुकल छथि । समय आ समाजक धड़कन नीक जँका परेखबाक क्षमता रखैत छथि ।

इमान्दार बालक नामसँ प्रकाशित पहिल रचनासँ अपन साहित्यिक यात्रा आरम्भ कएनिहार भ्रमर बाल साहित्यक श्रीवृद्धिक बास्ते बाल सुलभ मोन, स्वाभाव, व्यवहार आ बच्चे जँका बच्चाक हृदयमे पैसिक ओहने राग, भास, सुर आ तालमे बालसाहित्यक तमाम अवयव आ व्याकरणक भरिपोख उपयोग करैत जंगलमे मंगल नामक पोथी बहार कएलनि । एहि पोथीकेँ बौआ बुच्ची लोकनि लोकार्पण कएलनि तऽ दोसर पोथी गपसपकेँ साहित्यकार डा.योगानन्द झा विमोचन कएलनि ।

मैथिली विकास कोषक अध्यक्ष जीवनाथ चौधरीजीक सभापतित्वमे आयोजित कार्यक्रममे नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्य सचिव रहि चुकल सशक्त हस्ताक्षर रमेश रञ्जन, त्रिविवि, मैथिली केन्द्रीय विभागाध्यक्ष प्रो. परमेश्वर कापडि, विश्लेषक एवं अध्येता रोशन जनकपुरी, बरिष्ठ साहित्यकार चन्द्रेश, साहित्यकार डा. योगानन्द झा आ मैथिलीक प्राध्यापक एवं साहित्यकार श्याम सुन्दर शशि आदि वक्तालोकनि पोथीपर जमिक बहस कएलनि । कार्यक्रममे जनकपुरधाम उपमहानगरपालिकाक प्रमुख मनोज कुमार साह, राजर्षि जनक विश्वविद्यालयक निर्देशक रामखेलावन साह, साहित्यकार हिमांशु चौधरी, सखी बहिन्नपाक भारती चौधरी लगायत कलाकार, साहित्यकार, पत्रकार, सामाजिक अभियन्ता लोकनिक महत्तपुर्ण उपस्थिति रहनि । अपनेलोकनिसँ एकटा अपेक्षा आ निवेदन जे हिनक टटका किताब अवश्य देखी । अपनेलोकनिक हरेक सुझाव, सहयोग आ आलोचनाक हार्दिक स्वागत कएल जाइत ।

एहि तरहेँ मैथिली साहित्य, पत्रकारिता, भाषासँ भ्रमरक अटुट प्रेम, अटल विश्वास आ अविकल समपर्ण रहलनि । तैं होइए जे एक वेर किएन नहि हिनक जीवनक आलोकमे हथोरिया देल जाए । साहए त मैथिली संसारक लब्ध प्रतिष्ठित आ स्थापित नाम अछि श्री राम भरोस कापडि भ्रमर । हिनक जन्म २००८ साल÷(१९५१)ई.मे धनुषा जिल्लाक बघचौरा गाममे भेलनि । हिनक प्रारम्भिक शिक्षा धनुषा जिल्लाक बेलही गामक श्री यादव निम्न माध्यमिक विद्यालय आ कालेजक शिक्षा रा.रा.ब. क्याम्पस, जनकपुरधाममे भेलनि । ओ त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ १९८५ ई.मे मैथिलीमे स्तातकोत्तर डिग्री प्राप्त कएने छथि । हिनका पी.एच.डी. (मानद) प्राप्त छनि । मैथिली विकास कोषक संस्थापक छथि ।

ओ स्वतन्त्र पत्रकारिताक जीवन स्वीकार कऽ ओहि माध्यमसँ भाषा–साहित्यक सेवामे समर्पित छथि । ओ सर्वप्रथम ‘अर्चना’ (१९७४ ई.)क प्रकाशन–सम्पादन आरम्भ कएलनि । तकरबाद ‘ऑजुर’ (मासिक)क, प्रकाशन एवं सम्पादन आ’ फेर ‘गामघर’ साप्ताहिक प्रकाशन–सम्पादन कएलनि जे निरन्तर प्रकाशित होइत आवि रहल अछि । जनकपुरधामसँ अफसेट प्रविधिमे नेपाली भाषाक दैनिक पत्रिका ‘सुप्रभात’ दैनिक आ ‘जनकपुर एक्सप्रेस’क प्रधान सम्पादक कापडि अनेकहुँ साहित्यिक पत्र–पत्रिकाक प्रकाशन एवं सम्पादन कएने छथि । पूर्व प्रधान सम्पादक आंगन अद्र्धवार्षिक (प्रकाशक नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान, कमलादी ।) छथि ।

रामभरोस कापडि भ्रमरक पहिल रचना ‘इमानदार बालक’ नेनाभुटकाक चौपाडि’ मिथिलामिहिर (२६ अप्रैल, १९६४ ई.)मे प्रकाशित भेल छनि । पहिल कविता १९६८ ई. ’आखर (सं. कीर्तिनारायण मिश्र, कलकत्ता १९६८ ई.) में छपल । ओहि समयसँ निर्वाध रुपमे आइधरि निरन्तर लिखैत रहलाह अछि । सम्भवतः लेखनमे एतेक निरन्तरता आ’ वैविध्यक सङ्ग पत्रिका–प्रकाशनद्वारा भाषा, साहित्यिक समृद्धिक लेल हिनक योगदान अतुलनीय अछि ।

प्रकाशन

१. कथा संग्रह ‘तोरा संगे जयबौ रे कुजबा’ (१९८४ई.) एवं ‘हुगली उपर बहैत गंगा’(२००८), २. कविता संग्रह ‘बन्न कोठरीमे ओनाइत धुआँ (२०२९साल), ‘नहि, आब नहि’(दीर्घ कविता,२०३६साल) एवं ‘अप्पन अनचिन्हार(१९९०) । नाटक— ‘रानीचन्द्रावती’, ‘एकटा आओर वसन्त’, ‘महिषासुर मुर्दावाद’ एवं अन्य नाटक’, ‘भैया अएलै अपने सोराज (२०६७) ४. गीत गजल—‘मोमक पघलैत अधर’, (१९८३ ई.) ५. सम्पादन—‘लाबाक धान’ (कविता संग्रह, १९९४ ई.) ‘त्रिशुली’ (माथुरानन्द चोधरी माथुर), ‘मैथिली गद्य संग्रह’ (सह–सम्पादन), ‘नेपालक मैथिली लोकनृत्य भाव, भंगिमा एवं स्वरूप’, ‘महाकवि विद्यापति आ’ नेपाल’ (२०६८÷२०११ई.), ’नेपालक मैथिली पत्रकारिता (२०४४ साल) ।
शोध÷निबन्ध ‘राजकमलक कथा साहित्यमे नारी’ (२०६४), ‘लोकनाट्यः जटजटिन’(२०६४ साल)आदि ।

भ्रमरक अनेकहुँ रचनाक अनुवाद एवं प्रकाशन नेपाली एवं हिन्दीमे भेल अछि । ओ नेपालीमे सेहो लिखैत रहलाह अछि । हिनक दीर्घ कविता ‘नहि, आब नहि’क नेपाली अनुवाद मनु ब्राजकी कएने छथि । ‘चीन जे हम देखल’ यात्रा–साहित्य छनि ।

नेपाली कृति : आजको धनुषा, जनकपुरधाम र यस क्षेत्रका सांस्कृतिक सम्पदाहरु (आलेख–सीधा भ्रमरका उत्कृष्ट नाटकहरु (अनुवाद)।
“अंजुली“ नेपाली मासिक पाक्षिकक सम्पादन प्रकाशन, अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन आ नेपाल ।

सम्मान/पुरष्कार

मायादेवी प्रज्ञा पुरस्कार (२०५२÷१९९५ ई., राजकीय प्रज्ञा प्रतिष्ठान), ५० हजार टकाक पुरस्कारक पहिल प्राप्तकर्ता । प्रधानमंत्रीद्वारा प्रशस्तिपत्र एवं पुरस्कार प्रदान।, यात्री चेतना पुरस्कार (२०११ई.,चेतना समिति,पटना), शेखर सम्मान (शेखर प्रकाशन,पटना) आदि प्राप्त भेल छनि । विद्यापति सेवा संस्थान दरिभङ्ङ्गाद्वारा सम्मानित, मैथिली साहित्य परिषद, वीरगंजद्वारा सम्मानित, “आकृति“ जनकपुर द्वारा सम्मानित, दीर्घ पत्रकारिता सेवाक लेल नेपाल पत्रकार महासंघ धनुषाद्वारा सम्मानित, जिल्ला विकास समिति धनुषाद्वारा दीर्घ पत्रकारिता सेवाक लेल पुरस्कृत एवं सम्मानित, नेपाली मैथिली साहित्य परिषदद्वारा २०५९ सालक वैदेही प्रतिभा पुरस्कारसँ सम्मानित, अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन मुम्बईद्वारा “मिथिला रत्न“ द्वारा सम्मानित, शेखर प्रकाशन “पटना“ द्वारा “शेखर सम्मान“, मधुरिमा नेपाल (काठमाण्डौ) द्वारा २०६३ सालक मधुरिमा सम्मान प्राप्त । विद्यापति पुरस्कारकोषद्वारा स्थापित नेपाल विद्यापति भाषा, साहित्य पुरस्कारसँ सम्मानित कएल गेल छनि ।

काठमाण्डूमे आयोजित सार्क कवि गोष्ठीमे मैथिलीकें प्रतिनिधित्व कए चुकल श्री भ्रमर नेपाल सरकारक संस्था साझा प्रकाशनक पूर्व अध्यक्ष एवं प्रज्ञा प्रतिष्ठानक पूर्व प्राज्ञ (साहित्य एवं संस्कृति) छथि । नेपालक प्रतिनिधि मैथिली गल्पमे डा. धीरेन्द्रक ई कहब सत्य अछि जे मैथिली भाषा एवं साहित्यक उत्थानक लेल भ्रमर पूर्णतः समर्पित छथि ।

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