मिथिला मध्यमा परिक्रमाक महोत्तरी यात्रा पूरा, यात्री धनुषा प्रस्थान


महोत्तरी, १२ फागुनः मिथिला मध्यमा परिक्रमाक यात्रीसभ महोत्तरी जिलाक यात्रा पूरा केलक अइछ । जिलाके भङ्गाहा–९ कञ्चनवनमे आठम दिनके रात्रिविश्राम कएने यात्री आइ नवम् दिन धनुषाके लेल प्रस्थान कएने अइछ ।

कञ्चनवन यात्राके आठम रात्रि विश्राम स्थल अइछ । यात्राके चारिम दिन महोत्तरी प्रवेश कएने यात्रीसभ जिलाके मटिहानी, जलेश्वर, मड़ै आ ध्रुवकुण्डमे रात्रिविश्राम कएने छल । जनकपुरधामसँ सुरु भेल परिक्रमामे १ सओ ३३ किलोमिटर यात्रा कएल जाइत अइछ । १५ दिनधैर कएल जाएबला परिक्रमामे धनुषाके छ आ भारतक मधुवनी जिलाके चाइर स्थानमे रात्रिविश्राम करबाक परम्परा अइछ ।

फागुन अमावश्याके दिन धनुषाके मिथिलाविहारी नगरपालिकाके ठेराकचुरीस्थित मिथिलाविहारी मन्दिरसँ सुरु भेल ई यात्रा मिथिलाविहारी (श्रीराम) आ किशोरीजी (सीताजी)के प्रतिमा राखल गेल डोला (डोली)के सङे कएल जाइत अइछ । आइ कञ्चनवनसँ धनुषा प्रस्थान कएने यात्री पर्वतामे रात्रिविश्राम करत । तहिना १०म दिन धनुषाधाम, ११म दिन सतोखरधाम, १२म दिन औरही, १३म दिन करुणा, १४म दिन बिसौल आ अन्तिम अर्थात् १५म दिनके रात्रिविश्राम जनकपुरधामक रङ्गशाला मैदानमे हएत । अइ यात्रामे महोत्तरी आ धनुषासहित १ सओ ७ आ भारतदिस २६ किलोमिटर यात्रा कएल जाएत अइछ ।

त्रेतायुगमे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम आ देवी सीता विवाहक बाद तत्कालीन मिथिला राज्यक विभिन्न स्थानमे वनविहार कएने विश्वासमे ई परम्परा सुरु कएल गेल मटिहानीस्थित लक्ष्मीनारायण मठके उत्तराधिकारी महन्थ डा. रवीन्द्रदास वैष्णव बतौलैन । परिक्रमामे सहभागी भेलासँ पाप तथा अन्याय नष्ट होबाक आ मनोकामना पूर्ण होबाक तथा मोक्षप्राप्ति होबाक धार्मिक मान्यत रहल हुनक कहब छैन ।रासस

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