काठमाण्डू, २८ फागुनः प्रतिनिधि सभा सदस्यके निर्वाचन सङे प्रत्यक्ष आ समानुपातिकदिसके नतिजा सार्वजनिक भेल अइछ । राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी पहिल, नेपाली कांग्रेस दोसर, नेकपा (एमाले) तेसर आ नेपाली कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) चारिम पार्टी बनल अइछ ।
अइ बेर सीमान्तृकत समुदायके उपस्थिति कमजोर देखल गेल अइछ । प्रत्यक्षदिस १ सओ ६५ मध्ये जमा १४ गोटे (८.४८ प्रतिशत) अइछ । आदिवासी जनजाति २६ (१५.७६ प्रतिशत), मधेशी २८ (१६.९७ प्रतिशत), थारू पाँच (३.३ प्रतिशत), मुस्लिम चाइर (२.४२ प्रतिशत) आ दलित एक गोटे (०.६१ प्रतिशत) अइछ ।
सीमान्तकृतमे १३.४ प्रतिशत जनसङ्ख्या भेल दलित समुदायके प्रतिनिधित्व आओर बेसी कमजोर अइछ । समानुपातिकमे दलसभ प्राप्त कएने मतके आधारमे दलित क्लष्टरमे रास्वपासँ सात महिला दू पुरुषसहित नौ गोटे, कांग्रेससँ दू महिला एक पुरुष, एमालेसँ एक दलित महिला, नेकपासँ एक दलित महिलासहित १४ गोटे आओत । जेकर अर्थ बेसीमे पाँच प्रतिशत हएत ।
अन्तरिम व्यवस्थापिका–२०६३ मे १८ (५.४७) गोटे दलितके सहभागिता छल । वि.सं. २०६४ के संविधान सभामे ई सङ्ख्या बइढ़ क ५० (८.३२) पहुँचल छल । तहिना, २०७२ सालके संविधान सभामे ४० (६.६५), प्रतिनिधि सभा २०७४ सालमे २० (७.२७) आ प्रतिनिधि सभा २०७९ मे १६ (५.८१) गोटे दलितक सहभागिता छल । अइ तथ्यांकके देखलासँ प्रतिनिधि सभामे दलित समुदायक प्रतिनिधित्व घटबाक क्रम बढ़ल अइछ ।
वि.सं. २०७२ के नयाँ संविधानक प्रस्तावनामे कहल गेल अइछ जे, ‘समानुपातिक समावेशी आ सहभागिता सिद्धान्तक आधारमे समतामूलक समाजक निर्माण करब’ विषय सेहो व्यावहारिक रुपसँ लागू नै भेल अइछ । अइ बेरके निर्वाचनमे नेपाली कांग्रेस बझाङसँ सहमहामन्त्री प्रकाश रसाइली स्नेहीकेँ मात्रे उम्मेदवार बनौने छल । एमाले डडेल्धुरामे चक्र स्नेहीकेँ आ बर्दिया–२ सँ विमला विककेँ उम्मेदवार बनौने छल ।
तहिना, नेपाली कम्युनिष्ट पार्टी स्याङ्जा–२ सँ पदम विश्वकर्मा आ कञ्चनपुर–३ सँ मान बहादुर सुनारकेँ मात्रे टिकट देने छल । राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) बाँके–३ सँ खगेन्द्र सुनारकेँ टिकट देने छल । हुनकासभमध्ये खगेन्द्र सुनार मात्रे निर्वाचित भेल छैथ ।
नेपालक संविधान, २०७२ मे पहिल बेर दलित समुदायक सहभागिताके बात कएल गेल अइछ । संविधानक धारा ४० ‘राज्यके सब निकायमे दलितकेँ समानुपातिक सामावेशी सिद्धान्तक आधारमे सहभागी होबाक हकके व्यवस्था कएल गेल अइछ । मुदा, एकर व्यावहारिक कार्यावंन नै भेल अइछ ।
दलित अधिकारकर्मी पदम सुन्दास कहलैन, “दलित सुमदायके प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करबाक लेल महिलाके ३३ प्रतिशतजका दलितके लेल सेहो जनसङ्ख्याके आधारमे संवैधानिक आ कानुनी व्यवस्था होबाक चाही ।” (रासस)





