नियात्रा–मिथिला दलान
धर्मेन्द्र विह्वल
सँगे रहल अग्रज वरिष्ठ पत्रकार हरिहर विरहीकेँ हम पुछलियैन– इएह छै कोरला ?
ओ कहलैन– हँ । इएह छै । हमहुँ त पहिलेबेर आएल छी एतऽ । जेहने आहाँ तेहने हम ।
हमरा मुहँ सँ निकलल– ओह ! तिब्बतके इएह पठार कोरला छै ? उत्तरमे नेपालऽक अन्तिम सीमानऽक एक प्रख्यात जगह जे चीन सँ जुड़ल अइछ ।
नेपालऽक उत्तरमे अवस्थित मुस्ताङ जिलामे पडऽबला कोरला पहुँचबाक सपना आई साकार भऽगेल छल । खुशी अस्वाभाविक नै छलए । हम अपन प्रसन्नता अभिव्यक्त करबामे पूर्णतः असमर्थ छलौं । मुदा कोरलाक भूमिमे हमरा लागल जे ओतऽ रहल हमर समूहक किनको चेहरापर प्रसन्नताक भाव नै छलए । सबहक चेहरापर एक तरहक निराशाक प्रभाव बुझाइत छलए । कोरला (४६०० मीटर) मे एकटा दुखद स्थिति छल जकर सीधा तुलना नेपाल आ चीनऽक विकासक आधारपर कएल जा सकैत छल । हमरासभक दिस (नेपाल) वञ्जर भूमिपर अस्थायी त्रिपाल आ ओहि पार विशाल अट्टालिका ठाढ़ छल । माथऽके चमडी घोकचबाक पर्यात कारण उपलब्ध छलए ।
२०८२ के पहिल मास अर्थात वैशाखके अन्तिम दिन.। नेपाल प्रेस यूनियनद्वारा आयोजित लोमान्थाङ अन्तर्राष्ट्रीय मिडिया शिखर सम्मेलनके अंन्तिम पडाव (लोमान्थाङ) सँ हमरालोकैन (ड्राइवरसहित १५ गोटे) फिर्ता होबाकाल कोरला जा रहल छलौं । लोमन्थाङमे घोषणापत्र जारी कएल गेलाक बाद सम्मेलन समाप्त भऽ चुकल छल । कोरलाके यात्रा हमरासबलेल एकटा ‘बोनस’ छल ।

नेपाल चीन सीमामे अवस्थित कोरला सीमा नाका (४६०० मि) : नाका स देखाइत नेपालतर्फक दृष्य । एत नेपालक अध्यागमन कार्यालय रहितो पूर्णत: सन्चालनने नै आइब सकल छै ।
कोरलाक मैदानमे हवा बइढ़रहÞल छल । हमरालोकैनकेँ बुझाएल जे आब एतऽ सँ विदा होबाक चाही । शायद लगऽक पहाड़पर रहल बर्फ सेहो हमरालोकैनकेँ इएह कहिरहल छलए । हिमाल होबाक लेल पहाड़पर बर्फ होबाक चाही, मुदा दुःखक सँग हमरा ई कहऽ पइड़रहल अइछ जे– एतऽ सँ मात्र ऊँच पहाड़पर कारी चट्टान देखबामें आइबरहल छलए । ई लिखैतकाल हमरा हालहिमे भेट भेल हनी हण्टर आ काराभानलगायत सिनेमाक माध्यम सँ नेपालकेँ अन्तर्राष्ट्रिय समुदायबीच परिचय करौनिहार प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एरिक वैलीके बात मोन पड़ल । काराभानके अमर पात्र थिन्लेके शब्दकेँ उद्धृत करैत ओ कहने रहैथ– बर्फऽक सँगहि संस्कृति सेहो पिघैल रहल छै ।

प्राचीन लोमान्थाङ्ग दरवारक भित्री भाग ।
एहि ठामऽक संस्कृतिकेँ संरक्षित करबालेल पहाड़ आ बर्फके संरक्षित करऽ पड़त । एतऽ रहैतकाल हमरा एहन कतेको लोक भेटलैथ जे बर्फबारीक कमीपर चिन्ता व्यक्त कऽ रहल छलैथ । एहि यात्राक क्रममे बर्फ आ पहाड़ेटा नै, आरो कतेको स्मृति मोनमें सुरक्षित अइछ.।
एखन ई लिखैतकाल, कोरलाक स्थानीय व्यापारीलोकैनकेँ शिकायत सेहो मोन पड़ैत अइछ । तात्कालीन गृहमन्त्री रमेश लेखक जखन (१४ कार्तिक २०८१) कोराला सीमा–नाकापर अध्यागमन कार्यालयके उद्घाटन केलैन तँ स्थानीय लोककेँ आशा छलैन जे आब एतौका आर्थिक गतिविधि बढ़त । मुदा किछु दिनऽक बाद अध्यागमन सेवा बन्द भऽ गेल । लम्बा समय धैर अध्यागमन कार्यालय सञ्चालन नै भऽ सकबाक कारण स्थानीय व्यवसायी प्रभावित भेल छैथ, मुदा हुनकासभक समस्याकेँ केम्हरो सँ सम्बोधन नै भऽ पाइबरहल अइछ ।

उपरजा (अपर) मुस्ताङ्क छुसाङ- चराङ सडक खण्डमे देखाएबला पर्वतीय शृङ्खला । प्रकृतिद्वारा निर्माण कएल गेल अनुपम कलाकृतिसन लागबला ई पर्वतीय दृष्य पर्यटकके बेस आकर्षित करैत अइछ ।
नेपालदिसके अध्यागमन कार्यालयमे ताला लगा देलगेल छै । भन्सार (कस्टम) क सँगसँग पशु आ खाद्य क्वारेन्टाइन सेहो सञ्चालनमे नै अइछ । स्थानीय लोकऽक शिकायत अइछ जे सरकार कोरला सीमाकेँ प्राथमिकतामे नै रखने अइछ ।
सीमामे अध्यागमन कार्यालयक स्थापनाक बाद स्थानीय लोककेँ सीमा आरपार कऽ व्यापारिक कारोबार करबामे सहज होबाक आश कएल गेल छलै मुदा एहन नै भऽ सकलै । लोमन्थाङ गाउँपालिकाके अध्यक्ष टासी न्यहर्वु गुरुङके अनुसार सीमा–नाकापर सुरक्षा व्यवस्था सेहो नीक नै छै । सीमालगऽमे दक्षीणदिस चदरा सँ बनल चाइर कोठलीबला भवनऽक अलावा ओतऽ आन कोनो पूर्वाधार नै छै । स्थानीयलगायत अन्य पर्यटक ओतऽ नै रुइक सकै छैथ । एतेक धैर जे बरखा भेलापर शरण लेबाक सेहो कोनो सुरक्षित जगह उपलब्ध नै छै ओतऽ ।

नेपाल चीन सीमामे अवस्थित कोरला सीमा नाका (४६०० मि) : नाका स देखाइत नेपालतर्फक दृष्य । एत नेपालक अध्यागमन कार्यालय रहितो पूर्णत: सन्चालनने नै आइब सकल छै ।
लोमन्थाङ सँ २४ किलोमीटरके दूरीपर सीमा अवस्थित छै । न्हेछुङ नामक स्थानमे पुलिस चौकी (एहि इलाकामे नेपालके अन्तिम पुलिस चौकी)अइछ, जे सीमा सँ १३ किलोमीटर पहिने पडैÞत अइछ । अध्यक्ष गुरुङ जनतब देलैन, सीमालगायत एहि क्षेत्रमे पुलिसऽक उपस्थिति कमजोर अइछ । ‘सुरक्षाकर्मीके रहबालेल कोरलामे कोनो भवन नै अइछ, खम्भा ठाढ़ अइछ, मुदा बिजली नै पहुँचल अइछ’ गुरुङके अनुसार यदि सीमाके प्रभावी ढंग सँ सञ्चालन कएल जा सकए तँ मुस्ताङऽक लोमन्थाङ आ लो–घेकर दामोदरकुण्ड गाउँपालिकाक निवासी उचित लाभ लऽ सकै छैथ । सीमापर पीबऽबला पाइन आ ल्याण्डलाइन फोनके सुविधा सेहो नै अइछ । स्थानीय लोकऽक कहब अइछ, जँ सीमा चालू भऽ जाइए तँ चीनिया पर्यटकऽक नेपाल आगमन सेहो सहज भऽजाएत ।
भवनऽक अभावऽक कारण कोरला सीमापर खुला मैदानमें त्रिपाल टाइङ कऽ व्यापार करऽवला नेपालीक संख्या बहुत अइछ । ओहिमे एक छैथ, जिग्मे आङमा गुरुङ । हुनकासन व्यापारीसभ भोर नओ बजे चीन जा दुपहर दू बजे धैर ओत सँ सामान लऽ घुइर अबै छैथ । ओतऽ हमरासभकेँ जानकारी भेटल जे उपरका (अपर) मुस्ताङऽक लो–घेकर दामोदरकुण्ड आ लोमन्थाङ गाउँपालिकाकँे स्थानीय वासिन्दाकेँ सीमा आरपार करबालेल प्रवेशपास उपलब्ध कराएल जाइत छै, ओ सभ आसानी सँ चीन जा सकैत छैथ । जिग्मे एहने एक व्यापारी छैथ । आन ठामके लोकऽलेल कोनो विशेष पासके व्यवस्था नै छै ।

हम जिग्मे सँ पुछने छलियैन,–‘अहाँसभ जे सामान एतऽ अनै छी तकर खरीददार के अइछ?’ हमर बात समाप्तो नै भेल छलए कि ताहि सँ पहिने ओ कहलैथ– ‘अपनेसभऽक नेपाली भाए–बहिन, जे एतऽ आइब किछु सनेस लेबाक प्रयास करैत छैथ ।’
स्थानीय वासिन्दा चीनके बाजार सँं दैनिक आवश्यकताक वस्तु, मदिरा, फर्नीचर आ कपड़ा किनैत छैथ । नेपाल सँ चाउर, आटा, चुरा, चाउचाउ (नूडल्स), जड़ी–बूटी, आ पश्मिनासन वस्तु निर्यात कएल जा सकैत अइछ, मुदा एहिमे अपेक्षित उपलब्धि नै प्राप्त कएल जा सकल अइछ ।
कोरला सीमा राजनीतिकरूप सँ सेहो महत्वपूर्ण अइछ, एहिमे कोनो शंका नै । मुदा एहि सीमाक सम्बन्ध स्थानीय समाज सँ सेहो अइछ । २०७२ (सन २०१५)सालके भूकम्पऽक बाद काठमाण्डूक नजदिक मानल जाएबला तातोपानी आ केरुङऽक सँग एहि सीमाके चर्चा सेहो भेल छलए । जिग्मेके कहब छैन कि भौगोलिक दृष्टिएँ अपेक्षाकृत सुविधाजनक मानल जाएबला कोरला सीमा जँ सञ्चालन हएत तँ ई क्षेत्रकेँ बहुत लाभ पहुँच सकैत छै ।
आब कने फराक बात । कने बात करी मिथिला आ मुस्ताङके सम्बन्धमे । मिथिलाक प्राचीन अवस्थाक विश्लेषण कएल जाए तँ एहि क्षेत्रक सम्बन्ध मिथिला सँ होबाक सम्भावना व्यक्त कएल जा सकैत छै । विगतमे सिमरौनगढ़ राज्य समृद्ध होबामे चीन सँ व्यापारिक सम्बन्ध सेहो एक कारक भऽ सकबाक बात स्वीकार कएल गेल अइछ । उपर कहल जा चुकल अइछ जे प्राचीन मिथिलाक सीमा पूर्वमे कोसी, पश्चिममे गण्डकी, दक्षीणमे गण्डकी आ उत्तरमे हिमालय कहि परिभाषित कएल गेल अइछ । एहि आधारपर मिथिलाक विस्तार मुस्ताङ धैर होबाक सम्भावना व्यक्त कएल जा सकैत छै ।
नेपाल आ चीनबीचऽक व्यापारऽक बात चलैतकाल हमरा इतिहासमे प्रसिद्ध ‘साल्ट ट्रेड रुट’ अर्थात नून व्यापार मार्गके सन्दर्भ मोन पड़ैए । गाड़ीमे हम आ प्रेस यूनियनके अध्यक्ष शिव लम्सालके सँगहि नेपाल पत्रकार महासंघकेँ पूर्व अध्यक्ष हरिहर विरही आ तारानाथ दाहाल सेहो रहैथ । एहि मार्गके सम्बन्धमे दाहालऽक अध्ययन आधिकारिक अइछ । ओ कहलैन– ई मार्ग एखन तँ महत्वपूर्ण अछिए । एतबए नै, ई तँ एकटा पारम्परिक व्यापारिक मार्ग सेहो अइछ जे तात्कालीन मिथिला आ वैशाली होइत तिब्बतकेँ वर्तमान दक्षिण एशिया सँ जोड़ैत अछि । दाहालऽक बात सुनिते इतिहास ऽक एक विद्यार्थी होबाक हिसाबे हमरा मोन पड़ल जे इतिहासऽक कोनो कालखण्डमे मिथिला आ वैशाली दुनू राज्य वज्जी महासंघऽक सदस्यक रूपमे संघीयताक अभ्यास करैत छलए । किछु इतिहासकारक अनुसार प्राचीन मिथिलाक दक्षिणी सीमा गंगा धैर छलए । एहि आधारपर वैशाली सेहो वृहत मिथिला गरणराज्यक एक अंग रहल मानल जा सकैत अइछ ।
इतिहासकारलोकैनकेँ अनुसार विगतमें लम्बा समय धैर नून, ऊन, सोना आ खनिज आयात–निर्यातक मुख्य मार्ग इएह छल । एहि विषयक सम्बन्धमे अध्ययन केनिहार अधिवक्ता रोशनकुमार झासहित इतिहासकार कहने छथि जे तिब्बत सँ मैदानी भूभाग धैरकेँ व्यापार इएह मार्ग सँ आगू बढ़ल छल हएत आ सिमरौनगढ़केँ व्यापारिक केन्द्र बनाओल गेल हएत । अधिवक्ता झाकेँ अनुसार सिमरौनगढ़ ओहि समयमे व्यापारऽक एक प्रमुख केन्द्र छलए । झा एहि विषयमे अपन नेपालीमे प्रकाशित पुस्तकमे विस्तार सँ लिखने छैथ ।
नेपालऽक गण्डकी प्रदेश सरकार चीनऽक कोरला आ भारतऽक त्रिवेणी नाका जोडऽबला सड़ककेँ प्रदेशऽक भाग्यरेखाक रूपमे प्राथमिकतामे राइख स्तरोन्नतिक कार्यकेँ प्राथमिकतामे रखने अइछ । इतिहास साक्षी अइछ जे वर्तमान त्रिवेणी नाका सिमरौनगढ अर्थात मिथिलाक अधीन छल । एहि आधारपर तिब्बत आ सिमरौनगढ़ऽक पारम्परिक सम्बन्धकेँ मादे सहजे अनुमान लगाओल जा सकैत अइछ । अनुमान अइछ जे बुद्ध धर्मक महान प्रचारक विद्वान पद्यमसम्भव सेहो इएह मार्ग सँ तिब्बत पहुँचल छलैथ । एतबए नै, कोरेला टा नै केरुङ नाका सेहो विगतमे मिथिलाकँे जोड़ने छलए । केरुङ सँ प्रारम्भ होबऽबला सड़कके सम्बन्ध सेहो वर्तमानऽक ठोरी नामक स्थान होइत सिमरौनगढ़ सँ जुड़ल मानल जा सकैत अइछ ।

एहि आधारपर कहल जा सकैत अइछ जे विगतमे सिमरौनगढ़ऽक समृद्धिमे एहि व्यापारिक सम्बन्धऽक भूमिका महत्वपूर्ण रहल हएत । उपर सेहो चर्चा कएल गेल जे प्राचीन मिथिलाक सीमा पश्चिममे गण्डकी धैर विस्तारित छलए । एहि परिभाषाअनुसार पश्चिममे अवस्थित नदी गण्डकी (कालिगण्डकी)के उत्पत्ति नेपालऽक मुस्ताङ जिलाक दामोदर कुण्ड सँ भेल मानल जाइत अइछ । एहि आधारपर मिथिलाक सीमा इतिहासक कोनो समयमे दामोदर कुण्ड धैर पसरल हएत से मानल जा सकैत अइछ । स्मरणीय अइछ, कालिगण्डकी नदी विश्वमे शालिग्राम पाथरऽक एकमात्र स्रोत मानल जाइत अइछ आ शालिग्राम पाथर प्रत्येक मैथिल घरमें भगवान नारायणकँे रूपमें पूजल जाइत अइछ । एहि आधारपर सेहो मिथिला, मुस्ताङ आ कालिगण्डकी नदीक सम्बन्धऽक विश्लेषण कएल जा सकैत अइछ ।
हमरासभक गाड़ी तेजी सँ आगाँ बइढ़रहल छलए । हम अपन मैथिल समुदाय, सिमरौनगढ़, गण्डकी, शालिग्राम आ मुक्तिनाथबीचऽक परस्पर सम्बन्धऽक विश्लेषण करबाक प्रयास कऽ रहल छलौं । हम स्वयंकेँ प्रश्न कऽ रहल छलौं– कि ठिके विगतमे मुस्ताङ धैर मिथिलाक प्रभाव छल ?
राष्ट्रिय समाचार समितिक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा, पत्रकारिता, साहित्य एवम् समसामयिक विषयसबमे सशक्त रुपमे कलम चलबैत आइब रहल छइथ । सं.





