नयाँ दिल्ली, १८ चैतः लम्बा समयसँ स्थगित होइत आएल भारतक राष्ट्रिय जनगणना अन्ततः सुरु भेल अइछ । अइ बेरक जनगणना देशक जनसाङ्ख्यिक वास्तविकताकेँ नयाँ ढङ्गसँ उजागर करैत कल्याणकारी कार्यक्रमसँ ल क राजनीतिक संरचनाधैर व्यापक प्रभाव होबाक अपेक्षा कएल गेल अइछ । विश्वके सबसँ पैघ जनसङ्ख्या गणनाके रूपमे रहल अइ अभियानसँ एक अरब ४० करोड़सँ बेसी नागरिकके विवरण सङ्कलन करबाक लक्ष्य राखल गेल अइछ ।
अइसँ पहिने सन् २०११ मे कएल गेल जनगणनासँ भारतक जनसङ्ख्या एक अरब २१ करोड़ रहल तथ्य देखौने छल । अखन ई सङ्ख्या एक अरब ४० करोड़ पार क चुकल अनुमान अइछ । जे भारतकेँ विश्वके सबसँ बेसी जनसङ्ख्या भेल देशके रूपमे स्थापित भेल अइछ । सन् २०२१ मे सुरु करबाक योजना भेलाक बादो कोभिड–१९ महामारी आ व्यवस्थापकीय चुनौतीके कारण जनगणना स्थगित होइत आएल छल।
नयाँ जनगणनाके पहिल चरण आइसँ सुरु भ सेप्टेम्बरधैर सञ्चालन हएत । अइ अवधिमे खटाएल गेल कर्मचारीसभ घरपरिवारके अवस्था, उपलब्ध सुविधा तथा आवाससम्बन्धी विवरण सङ्कलन करत ।
तहिना, दोसर चरण सेप्टेम्बरसँ आगामी अप्रिल १ धैर सञ्चालन हएत । जइमे व्यक्तिके सामाजिक आ आर्थिक अवस्थासहित धर्म आ जाइतसम्बन्धी विस्तृत विवरण सङ्कलन कएल जाएत । अइ अभियानमे करिब ३० लाख सरकारी कर्मचारी परिचालन होबाक अनुमान कएल गेल अइछ ।
स्वतन्त्रताके बाद सन् १९५१ सँ भारत केवल अनुसूचित जाइत आ जनजाति—अर्थात् दलित आ आदिवासी समुदायके मात्रे गणना करैत छल । पूर्ण जातिगत गणनासँ सामाजिक तनाव बढ़ेबाक आशङ्का व्यक्त करैत पहिनेके सरकारसभ एकरा आलटाल करैत आएल छल । मुदा, अखनके प्रयाससँ नीति निर्माणक लेल आवश्यक यथार्थपरक तथ्याङ्क उपलब्ध कराओत से अपेक्षा कएल गेल अइछ । रासस/एपी





