एआईसँ बलिउडके नयाँ दौड़


मुम्बई, ३ वैशाख (रासस/एएफपी) :
कृत्रिम बौद्धिकता (एआई) फिल्म उद्योगमे जोखिम आ अवसर दुनू उत्पन्न क रहल समय भारतमे अइ प्रविधिसँ पूर्णरूपेण बनल पहिल सफल बलिउड फिल्म निर्माण करबाक प्रतिस्पर्धा तीव्र भ रहल छै। अइ दौड़के अग्रपङ्क्तिमे ‘महाराजा इन डेनिम्स’ विशेष रुचिके केन्द्र बनल अइछ।

खुशवन्त सिंहके सन् २०१४ क लोकप्रिय उपन्यासपर आधारित ई फिल्म अइ गर्मीमे प्रदर्शनक लेल तैयारी अवस्थामे अइछ। परम्परागत फिल्म निर्माणसँ अलग, अइमे कलाकार, महग सेटअप वा लम्बा सुटिङके आवश्यकता नै पड़ल निर्माण समूह जनौने अइछ। “एत कलाकारके पारिश्रमिक नै छै, देरीक झंझट सेहो नै छै, सेट निर्माणके भारी सेहो नै छै—ई दिमाग आ मेसिन बीचके सृजनात्मक सहकार्य छै”, सिंह कहलैन।

प्रतिवर्ष दू हजारसँ बेसी फिल्म उत्पादन करबाक क्षमता रहल भारतीय फिल्म उद्योग एआईकेँ शीघ्रतासँ आत्मसात क रहल अइछ। एकर विपरीत, हलिउडमे एआई प्रयोगपर विवाद, हड़ताल आ कड़ा युनियन सर्तसभ राखल गेल अइछ। भारतमे ‘चिरञ्जीवी हनुमानः द इटर्नल’ आ कन्नड भाषाक ‘लभ यु’ जेहन परियोजनासभ सेहो एआईपर आधारित अग्रगामी प्रयासक रूपमे प्रस्तुत भ रहल अइछ।

तइयो,सब परियोजनासभ सहज नै छै। ‘नाइशा’ नामक आन एआई फिल्म प्राविधिक समस्याक कारण निर्धारित समयमे प्रदर्शन नै भ सकल। ‘महाराजा इन डेनिम्स’ सेहो एआई प्रविधिक तीव्र विकासके कारण बारम्बार परिमार्जन करए पड़लासँ देरी भेल छल। “नयाँ प्रविधि प्रयोग करएबला लोभसँ पहिनेसँ तैयार सामग्री सेहो असन्तोषजनक लागै छै, मुदा अइ कारण लागत सेहो बढ़ै छै”, सिंह स्वीकार केलैन।

सन् २०२४मे सुरू कएल गेल अइ परियोजनामे सिंह आ इन्टेलिफ्लिक्स स्टुडियोक सह–संस्थापक गुरदीप सिंह पाल निर्देशक आ सिनेमाटोग्राफर सहित छोट समूह बना क काज आगाँ बढ़ौलैन। पाल अइसँ पहिने माइक्रोसफ्टमे एआई आ प्रोडक्ट विकाससँ सम्बन्धित जिमेवारीमे काज करैत छल।

फिल्मके कहानी एकटा युवाके विषयमे छै, जे अपन १९म शताब्दीक सिख शासक महाराजा रणजीत सिंहके पुनर्जन्म भेल विश्वास करैत अइछ। एहन ऐतिहासिक आ बहुपरत कथामे सामान्यतया भारी लागत चाही, मुदा एआई लागतकेँ करिब दशम भागमे सीमित कएने निर्माण पक्षके दाबी छै।

मुदा यथार्थपरक दृश्य निर्माण करब सबसँ बडका चुनौती छै। एआई मोडेलसभ भारतीय चेहरा आ सिख ऐतिहासिक पात्रसभके लेल पर्याप्त प्रशिक्षित नै भेलासँ बारम्बार समस्या आएल छल। “पश्चिमी कथामे बनाएब सहज होइ छै, ताहिमे मोडेलसभ बहुत तैयार छै”, सिंह कहलैन, “चुनौती पहिने थाह जँ रहतियै तँ शायद अगल कहानी बनेतौँ।”

फिल्ममे पूर्ण एआई प्रयोग भेलापर सेहो किछु मानवीय पक्ष बचाएल गेल अइछ। विशेष क , संगीतमे परम्परागत शैली समेटल गेल अइछ, जाहिमे चर्चित गायक सुखविन्दर सिंहके स्वर रहत। “भारतमे दर्शकसभ सङ्गीत देखैत छैथ, ओइ लेल ई समावेश करब आवश्यक होइत अइछ”, सिंह कहलैन।

एआई फिल्म निर्माण प्रति रुचि फिल्म उद्योगक बाहर सेहो फैलनाइ सुरू भ गेल अइछ। सिंहक अनुसार किछु मन्दिर ट्रस्टसभ सेहो पौराणिक कथामे आधारित एआई फिल्म बनेबाक लेल प्रस्ताव पठाने छै।

चुनौतीसभ भेलापर सेहो सिंह एआई फिल्म उद्योगकेँ नवका दिशा देत विश्वास व्यक्त करैत छैथ। “प्रविधि एहिना आगाँ बढ़ैत गेलासँ कोनो गाममे बैसल १८ वर्षक युवा सेहो पैघ स्टुडियोसभकेँ चुनौती द सकत”, ओ कहलैन।

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