आइ मिथिलामे ‘बर्साइत’ पावैन मनाएल जा रहल


महोत्तरी, २ जेठः मधेशक सहितक प्राचीन मिथिला क्षेत्रमे आइ विवाहित मिथिलानी ‘बर्साइत’ पावैन मना रहल छैथ।

वटसावित्री सेहो कहल जाएबला ई पावैनमे विवाहित मिथिलानी (मिथिलाक महिला) अपन-अपन बस्तीक वटवृक्ष (बरक गाछ) लग जमा भ क सामूहिक रूपसँ मनाबैत छैथ। नव-नव कपड़ा पहिरने मिथिलानी सती सावित्रीक उच्च चरित्रक वर्णन कएल गेल गीत सामूहिक रूपसँ गाबैत अपन अटल सौभाग्यक कामना करैत छैथ। अइ अवसरमे सावित्रीक कथा कहल आ सुनल जाइत अइछ।

सत्य युगमे सती सावित्री अपन तपस्या आ साधनासँ अटल सौभाग्यक वरदान पओने छलीह ई विश्वासके आधारमे ई पावैन मनाबैत छैथ। जेठ कृष्ण चतुर्दशीक दिन निराहार व्रत क वटवृक्षके जइड़मे महिलासभ सामूहिक रूपसँ सावित्रीकेँ स्मरण करैत ब्रह्मा, विष्णु आ महेश सहितके इष्टदेवक पूजा आराधना करैत छैथ।

मिथिलामे किछु दशक पहिनेधैर ब्राह्मण, कायस्थ आ सोनार जातिक महिलासभ मात्र मनाबैबला ई पावैन आब सब जाइतके महिलासभ मना रहल छैथ। मिथिलामे पछिला समयमे विभिन्न जातजातिक मिश्रित बस्तीमे एक दोसरक संस्कृति परम्परा सिखैत ई पावैनसभ जातजाति मनाबए लागल याज्ञवल्क्य लक्ष्मीनारायण विद्यापीठ मटिहानीक प्राचार्य हेमनारायण लाल कर्ण बताबैत छैथ। पावैनसँ सांस्कृतिक एकता आ पर्यावरण संरक्षणके सन्देश दैत छै से हुनकर कहब अइछ। (रासस)

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