धनुषामे सम्बन्धविच्छेदके घटना बढ़ल


जनकपुरधाम, २० साओनः धनुषा जिलामे बितल समय सम्बन्धविच्छेदक घटना बइढ़ रहल अइछ ।

जिला अदालतके तथ्याङ्क अनुसार सामाजिक संरचना, बसाइँसराइ, आधुनिक जीवनशैली, आर्थिक अवस्थाक कारण सम्बन्धविच्छेदके घटना बढ़ल अइछ ।

अदालतक सूचना अधिकारी हेम कुमार महतोके कहब अनुसार आर्थिक वर्ष २०८२/८३ मे सम्बन्धविच्छेद सम्बन्धी ३ सओ ३३ टा मुद्दा दर्ता भेल छल । बितल आर्थिक वर्षके एक सओ ६७ सरूवा भ आएलसहित सम्बन्धविच्छेदके ५ सओ मुद्दा अदालतमे छल । ओइमध्ये २ सओ ८१ मुद्दामे फैसला भ चुकल अइछ, तँ २ सओ १९ मुद्दा विचाराधीन रहल सूचना अधिकारी महतो बतौलैन ।

बितल आर्थिक वर्ष २०८१/८२ मे सम्बन्धविच्छेदके ३ सओ १५ नयाँ मुद्दा दर्ता भेल छल । ओइ साल ३ सओ ४७ मुद्दामे फैसला कएल गेल छल । बितल सालके एक सओ ६७ मुद्दा चालु आर्थिक वर्षमे सरूवा भेल अइछ । सम्बन्धविच्छेदसम्बन्धी मुद्दा लगातार बइढ़ रहलाक कारण दर्ता सङ्ख्यासँ धनुषामे वैवाहिक सम्बन्धमे तनावक प्रवृत्ति बइढ़ रहल देखल गेल अइछ ।

शिक्षामे चेतना सङे महिलाके आर्थिक तथा सामाजिक अवस्थामे सुधार, वैदेशिक रोजगारीके कारण लम्बा समयधैर श्रीमान–श्रीमती अलग रहबाक परिस्थिति, सामाजिक सञ्जालके बढ़ैत प्रयोग, पारिवारिक विवाद तथा घरेलु हिंसाके घटनासँ वैवाहिक सम्बन्ध अन्त्यके घटना बइढ़ रहल कानुन व्यवसायी राज कुमार महासेठ बतौलैन ।

हुनक कहब अनुसार गरिबी, बेरोजगारी, वैदेशिक रोजगारीसँ आएल परिवर्तन, एसगर रहबाक जीवनशैली तथा व्यक्तिगत स्वतन्त्रताके बढ़ैत चेतनाके कारण दाम्पत्य सम्बन्धकेँ चुनौती द रहल अइछ ।

बितल समय महिला वा पुरुष दूनु गोटे अन्याय भेल महसुस कएलापर कानुनी उपाय खोजबाक प्रवृत्ति बढ़ल हुनक कहब छैन ।

कानुन व्यवसायी दीपक कुमार विश्वकर्माके कहब अनुसार सम्बन्धविच्छेद सम्बन्धी मुद्दा बढ़लाक बाद अदालतमे पारिवारिक विवाद समाधानक लेल मध्यस्थताके आवश्यकता सेहो बइढ़ रहल अइछ । समयमे परामर्श, मनोवैज्ञानिक सहयोग, वैवाहिक शिक्षा आ पारिवारिक संवादकेँ प्रोत्साहन कएलापर सम्बन्धविच्छेदक घटनाकेँ किछ हदधैर न्यूनीकरण कएला जा सकैय । (रासस)

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