ललितपुर, १० असोज : नेपालमे पहिल बेर मैथिली भाषाक गद्य शैलीमे रचल ‘मैथिली गद्य अर्चनाकृत सम्पूर्ण महाभारत’ ग्रन्थक शुक्रबार ललितपुरस्थित पुल्चोक इन्जिनियरिङ कलेजक लाइब्रेरी हलमे भव्य विमोचन कएल गेल। प्रथम पूर्व उपराष्ट्रपति परमानन्द झाक प्रमुख आतिथ्यता तथा लेखिका अर्चना झाक अध्यक्षतामे सम्पन्न समारोह श्री मानव सेवा फाउन्डेसनक संस्थापक श्री विजय कृष्णमूर्ति महाराजक आयोजनामे तथा मधेसी प्राध्यापक सङ्घ आ हिन्दू सम्राट नेपालक सहयोगमे सम्पन्न भेल।
करीब १ लाख २१ हजारसँ बेसी शब्द आ ६१३ पृष्ठमे तैयार एहि ग्रन्थमे महाभारतक १८ टा पर्व समेटल गेल अछि। मैथिली लोकभाका तथा मिथिला चित्रकलासँ सेहो सजाओल एहि कृतिक प्रकाशक विनयकुमार झा आ सम्पादक प्रेम नारायण झा छथि।
विमोचन समारोहमे पूर्व उपराष्ट्रपति परमानन्द झाले मैथिली भाषाभाषी लोकनिक लेल ई ऐतिहासिक आ उपयोगी ग्रन्थ होएबाक बतबैत महाभारत जेकाँ गहन ग्रन्थकेँ सरल आ सहज मैथिली गद्यमे प्रस्तुत केनिहार लेखिका अर्चना झाकेँ धन्यवाद देलन्हि। अपने पुस्तकक ६१३ पन्नामेसँ करीब चारि सयसँ साढ़े चारि सय पृष्ठ अध्ययन केने उल्लेख करैत कहलन्हि जे कठिन विषयवस्तुकेँ सेहो सहज रूपमे बुझबाक योग्य बनाओल गेल अछि। महाभारतकेँ ‘पाँचम वेद’क रूपमे सेहो मानल जाइत अछि, उल्लेख करैत झाले ई ग्रन्थ मैथिली भाषाभाषीक घर-घर धरि पहुँचनाइ आवश्यक रहल बतौलन्हि।
श्री पशुपतिनाथ मन्दिरक मूलभट्ट (अर्चक) रावल गणेश भट्टले मैथिली भाषा, संस्कृति आ धर्मक संरक्षण तथा प्रवर्द्धनमे एहि ग्रन्थक महत्वपूर्ण योगदान रहत बतबैत लेखिका झाकेँ धन्यवाद तथा शुभकामना देलन्हि। महाभारत विश्वक महत्वपूर्ण तथा व्यापक रूपसँ पढ़ल जाएवला ग्रन्थमे सँ एक रहल उल्लेख करैत उहाँ मैथिलीमे प्रस्तुत एहि कृतिक अध्ययन करबाक लेल सभसँ आग्रह कएलन्हि।
लेखिका अर्चना झाले गहन अध्ययन, अनुसन्धान, मनन आ साधनाक बाद महाभारतकेँ अपन शैलीमे सरल, सहज आ पठनीय मैथिली गद्यमे प्रस्तुत कएल गेल बतौलन्हि। उहाँ स्पष्ट कएलन्हि जे ई कृति कोनो पुस्तकक हुबहु अनुवाद नहि अछि। एहि ग्रन्थमे धर्म, कर्म, संस्कार, संस्कृति, सभ्यता, राजनीति, राज्यनीति, न्याय, कूटनीति आ मानवीय जीवनमूल्यक विविध पक्षकेँ समेटल गेल अछि। संगहि श्रीमद्भगवद्गीताक आध्यात्मिक तथा दार्शनिक सन्देश आ महाभारतक महिला पात्रसभक संघर्ष, त्याग, शक्ति आ योगदानकेँ सेहो विशेष स्थान देल गेल अछि।
प्रतिनिधिसभाक सांसद नितिमा कार्कीले ई कृति मिथिलाञ्चल मात्र नहि, बल्कि नेपाली साहित्यक लेल सेहो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज बनत बतौलन्हि। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्य रुपा झाले पारिवारिक तथा घर-गृहस्थीक जिम्मेवारीक संग-संग एहन विशाल ग्रन्थक सिर्जना करब उल्लेखनीय उपलब्धि रहल बतौलन्हि।
विश्व हिन्दू महासङ्घ नेपालक अध्यक्ष अरुणकुमार पाण्डेले एहि ग्रन्थक माध्यमसँ नेपालक सनातन संस्कृति, ज्ञान, भक्ति आ कर्मक परम्पराकेँ मातृभाषामार्फत नव पुस्ताधरि पहुँचाबएमे महत्वपूर्ण भूमिका रहत बतौलन्हि।
पत्रकार तथा विश्लेषक सिके लालले एहि कृतिक माध्यमसँ मैथिलीभाषी समुदायमे महाभारतक ज्ञान, विश्वास आ भावकेँ मातृभाषामार्फत हस्तान्तरण करबाक महत्वपूर्ण काज भेल बतौलन्हि। सम्पादक प्रेम नारायण झाले ज्ञान, कर्म आ भक्तिक समन्वय रहल महाभारतकेँ अपन मातृभाषामे बुझबाक अवसर एहि ग्रन्थसँ प्राप्त होएत विश्वास व्यक्त कएलन्हि।
प्रकाशक विनयकुमार झाले मैथिली भाषा, संस्कृति, परम्परा आ सभ्यताक संरक्षण तथा पुस्तान्तरणमे ई पुस्तक महत्वपूर्ण माध्यम बनत बतौलन्हि।
झाले यससँ पहिने ‘अर्चनाकृत रामायण’ रचना कएलाक बाद पाठकसभसँ प्राप्त प्रेम, हौसला आ प्रेरणासँ महाभारत लेखन दिस अग्रसर भेल बतबैत ई कृति अपनामे मात्र सीमित नहि भऽ मैथिली भाषा, साहित्य, मिथिला संस्कृति आ सनातन परम्पराप्रति समर्पित साझा सम्पदा रहल धारणा व्यक्त कएलन्हि। शब्दःअर्चना झा





