महोत्तरी, २ वैशाख: तराई मधेशमे जुडशीतल पावैन मनाएल जा रहल अइछ। सोमदिन ‘सतुवाइन’ मनाएल गेल क्षेत्रमे आइ जुडशीतल पावैन धूमधामसँ मनाएल जा रहल अइछ। विक्रम संवत् परम्पराक नयाँ सालक आरम्भमे मनाएल जाएवला एहि दुइदिनक पर्वमे पहिल दिनकेँ सतुवाइन आ दोसर दिनकेँ जुडशीतल कहल जाइत अइछ। तइयो सतुवाइन सेहो जुडशीतल पर्वक हिस्सा मानल गेल अइछ।
वैशाख संक्रान्तिक दिनसँ शुरू भेल एहि पर्वक विधि अनुसार पहिल दिन चना (बदाम), जौँ, मकैँ, कँगनो, गहुँम, चाओर आ मुँगसहित सात किसिमके अन्नसँ बनाएल गेल सातुवा आ माइटक अङ्खरामे सख्खरसँ बनाएल गेल सर्वत कूलदेवताकेँ चढ़ा क कूलपुरोहित, ब्राह्मण आ साधुजनकेँ दान देलाक बाद ओहि प्रसादकेँ ग्रहण कएल जाइत अइछ। दोसर दिन, अर्थात् वैशाख २ गते, घरक जेठजनसँ अपन छोट सदस्यक शिरपर जल सिञ्चन क आरोग्यता, शीतलता आ दीर्घजीवनक आशीर्वाद देबाक परम्परा अइछ।
मिथिलामे घरक कूलदेवताक पूजा–आराधना करबाक गिनतीक पर्वसभमे जुडशीतल सेहो एक महत्वपूर्ण पावैन मानल जाइत अइछ। एहि दिन पकाएल गेल समस्त परिकारसभ इष्टदेवताकेँ चढ़ाएल जाइत अइछ। गर्मीक मौसममे मनाएल जाएवाला एहि पर्वमे दहीक प्रयोग विशेष रूपसँ कएल जाइत अइछ। ओहने, सोहिजन (मुन्गा)के गुणकारी तरकारी, चनाक पीठोसँ बनाएल गेल बरी, जेकरा दहीमे पकाक कढ़ीबरी बनाएल जाइत अइछ, सङे काँचो केरा, लौका आ परवलक तरुवा एहि पर्वक खास परिकार मानल जाइत अइछ।
“नयाँ साल जीवनमे शीतलता आ शान्ति लाबय”—ई मुख्य सन्देश ल क जुडशीतल पर्वमे सुपाच्य आ शरीरकेँ स्वास्थ्य बनाक रखनिहार परिकारसभ—चना (बदाम)क सतुवा, दाल, सोहिजनक तरकारी, बदामक आटासँ बनाएल गेल बरी आ दही मोइथक बनाएल गेल कढ़ी खाएबाक परम्परा अइछ, ई बात मैथिल लोकसंस्कृतिक जानकार, पूर्वप्रशासक तथा साहित्यकार, जलेश्वरक बखरी बस्ती निवासी ८७ वर्षीय महेश्वर राय कहलैन।
सहकालक प्रतीक मानल जाएवला एहि पर्वमे वर्षभैर अनुकूल वर्षाक कामना करैत मैथिल लोक मध्याह्नमे संगी-साथीकेँ ल क धूल–माटि आ हिलोक सङ छ्यापाछ्याप करबाक तैयारीमे रहैत छैथ। जुडशीतल पर्वमे अपन खेत–बारीक गाछीमे जल सिञ्चन करैत ई कामना कएल जाइत अइछ जे गाछ–बिरिछ कहियो पाइन क अभावसँ पीड़ित नै होए।
मिथिलामेसभ जाति–समुदायक लोकद्वारा मनाएल जाएवाला एहि पर्वक मुख्य सन्देश आपसी सद्भाव, मेल–मिलाप आ सहकार्य रहबाक अइछ। खास क नयाँ सालक आरम्भ संग–संग ई पावैन एहेन सन्देश दैत अइछ जे पूरा वर्ष खेती–पातीक लेल अनुकूल समय रहए, बलवा–१० धमौराक ७० वर्षीय कामेश्वर झा एहन विचार व्यक्त कएलैन ।रासस





