यात्रा संस्मरण :

धर्मेन्द्र विह्वल
धर्मेन्द्र विह्वल
२०८१ माघ १६ मे नेपालमे शहिद दिवस मनाओल जाइत अइछ । एहिबेरके शहिद दिवसक पूर्वसन्ध्या अर्थात माघ १५ गते नेपालक सीमान्त जिला वैतडीक मुख्यालय दशरथ चन्द नगरपालिकाक गोठालापानीमे राति वितेबाक अवसर हमरा प्राप्त भेल रहए । दशरथ चन्द नेपालक प्रसिद्ध चारि शहिदमेसँ एक छैथ, जिनकर जन्म इएह नगरपालिकाक वसकोट नामक जगहपर भेल रहए । इएह वसकोटसँ किछु किलोमिटरक दूरीपर अवस्थित छै नेपाल–भारतबीच पश्चिमक प्रसिद्ध नाका झुलाघाट । महाकाली नदिपर करिव डेढ सओ वर्ष पहिने बनल झुलुवा (झोलुङ्गे) पुल दूनु देशऽक जनताक आवतजावतलेल निरन्तर एकमात्र माध्यम बनैत आबिरहल अइछ । नेपालक सुदूरपश्चिम आ भारतक उत्तराखण्ड प्रदेशमे एहन पुलकेँ झुला कहैत जाइत छै । शायद तएँ पुल (झुला) रहल महाकालीक घाटकेँ झुलाघाट नाम पडल हेतै । पुलक दुनुकातधैर दूनु देशक गाडी अबैत अइछ मुदा लोक पैदले पुल पार कऽ एक दोसरऽक देश जेबालेल बाध्य अइछ । नेपालसँ पुल पार केलाक बाद ओम्हरसँ भारतक प्रसिद्ध सैनिक इलाका आ वजार पिथौरागढ पहुँचल जा सकैत छै । कहल जाइत छै, ई क्षेत्र दूनु देशबीचक पञ्चेश्वर सम्झौताअन्तर्गतक पञ्चेश्वर बाँध क्षेत्रक भितर अबैत अइछ । जँ ई बाँध बनि जाएत तँ ई पुलोक अस्तित्वपर प्रश्नचिन्ह लागत कहाँदन । कहिओकाल ई पुलकेँ विस्थापित कऽ मोटरेबल आधुनिक पुल निर्माणक बात सेहो चर्चामे अबैत छै । मुदा चर्चा तँ चर्चे न छियै …… ।

तृपुरासुह्दरी मन्दिर ।
हँ, एकटा बात महत्वपूर्ण अइछ, नेपाल दिसिसँ झुलाघाट होइत महाकाली नदिक किनारेकिनारे (महाकाली करिडोर) एक सडक निर्माणाधीन छै । कञ्चनपुर जिलाक भिमदत्त नगरपालिका ९ व्रम्हदेवसँ दार्चुलाक तुसारपानीधैर तीन सओ ३४ किलोमिटरक महाकाली करिडोर सडक आयोजना आ तुसारपानीसँ तिंकरधैर ९१ किलोमिटर आर आगाँ बढैत अइछ आ एकर कूल लम्बाई चारि सओ २५ किलोमिटर भऽ जाइत छै । एहि सडकऽक हालधैर दू सओ ४२ किलोमिटर ट्रयाक खुजिचुकल अइछ । ई सडकऽक निर्माण २०६६ सालसँ भऽ रहल अइछ । इएह सडकऽक झुलाघाट व्रम्हदेव खण्ड करिव दू सओ किलोमिटर दूरीक हएत । एखन अतरियाक रस्ता डडेलधुरा होइत एतऽ एबामे दू सओ ७० किलोमिटरसँ अधिकऽक यात्रा तय करऽ पडै छै । ई करिडोर सडकऽक निर्माणक बाद एतऽसँ तराई मधेश पहुँचबाक दूरी कम होबाक सँगहि पहाडी रस्ता कम होबाक कारणे यात्रा सुरक्षित होबाक सेहो अपेक्षा कएल जा सकैत अइछ । मूल बात दूरी कम होइते एकर आर्थिकलगायत चौतर्फी प्रभाव पडब निश्चित अइछ । स्थानीय जीवनस्तरमे गुणात्मक असरिक अपेक्षा अस्वाभाविक नहि ।
वैतडीक ई क्षेत्रक हम विगमे कएकबेर भ्रमण केने छी । हमर पुत्र आदित्य झुलाघाट पारक पिथौरागढस्थित शैनिक विद्यालयमे अध्ययनरत रहैथ । आदित्यकेँ विद्यालय पहुँचाएब आ आनब तथा अन्य प्रयोजनार्थ हम बेरबेर बैतडी अबैत रहलौ अइछ । हम जहिया नेपाल पत्रकार महासंघक अध्यक्ष रही ताहि समय (२०६६)मे वैतडीक पाटनमे सुदूरपश्चिम क्षेत्र स्तरीय पत्रकार भेला (सम्मेलन)क आयोजन भेल रहए । सम्भवतः सुदूरपश्चिममे एहि तरहक ई पहिल आयेजन छल । इएह आयोजनमे लक्खाभाई आ हेमबाबुसँ हमर पहिल प्रत्यक्ष भेट भेल रहए । एहि आयोजनक बाद हम अनेकबेर बैतडी गेल रही । एहिबेर पाटन आ गोठालापानीक अवस्था किछु फरक बुझाएल । मिजाज किछु बदललसन लागल । वजारक रौनक किछु कम छलए । लोकऽक चहलपहल सहो कम लागल ।

तृपुरासुह्दरी मन्दिर ।
समग्रमे कही तँ वजारमे मानवीय आ व्यवशायिक गतिविधि रुकलरुकलसन लागल । पहिने एना नहि छलै । स्थानीय लोकसभसँ जानकारी भेटल–ठिके लोक आब एतऽसँ सनैःसनैः पलायन भऽ रहल अइछ । होटल, दोकान आदि व्यवशायिक प्रतिष्ठानसब वन्द भऽ रहल छै । जे होटलसब छैहो ओसब व्यवशायकऽ अभावक समस्या झेलिरहल अइछ । आखिर एना किए ? एकर समुचित जवाफ ककरोलग नहि अइछ । उच्च शैक्षिक प्रतिष्ठानक कमी, रोजगारीक अभाव, सुविधासम्पन्न स्वास्थ्य सेवाक अनुपलब्धता, स्थानीय व्यक्तिमे बढैत शहरप्रतिक मोह, वैदेशिक रोजगारप्रतिक आशक्ति या वानरक बढैत संख्या ? एतहुका ढेर घरसबमे लोक कम हएब या घर पूर्णरुपेण खाली हएब तकर कारण अनेक भऽ सकैए । किछु लोक तऽ इहो कहैत छैथ जे जँ तराई मधेशमे घर जमिन नहि हुअए तँ लडकाक विवाहक लेल लडकी भेटनाई मुश्किल । तएँ बहुत परिवार एतऽसँ जमिनजाल बेचि कऽ नीचा खसैकरहल अइछ । ई बातमे सत्यता कते छै से खोजीक विषय अइछ मुदा एते निश्चय जे एतऽ दिनानुदिन लोकऽक संख्यामे कमी आबिरहल छै ।
बात कने दोसरदिसि चलिगेल बुझाइए । पुनः लिकपर लौटबाक प्रयत्न करै छी । जीवनमे बहुतरास सम्बन्ध एहन होइत छै जकर परिभाषा केनाई कठिनाह होइत छै । किछु सम्बन्ध एहन होइत छै जतऽ भेटघाट कमो भेलापर सम्बन्ध आत्मीय होइत छै, हार्दिक होइत छै । एक दोसरपर अधिकारऽक भाव होइत छै । आग्रह या अनुरोध–विरोधकेँ स्वाभाविक मानल जाइत छै । हमरा बुझाइए किछु व्यक्तिसभसँ हमरो एहने भावनात्मक सम्बन्ध अइछ । एहने दू गोटे छैथ नेपालक सुदूरपश्चिम प्रदेशक बैतडीक पुष्करराज जोशी आ हेमबाबु लेखक । जोशी, जे लक्खाभाईके नामसँ सेहो प्रसिद्ध छैथ, बैतडी जिलाक सदरमुकाम दशरथ चन्द नगरपालिकाक मेयर अर्थात नगरप्रमुख छैथ तँ लेखक नेपालक चर्चित साहित्य आ संस्कृतिकर्मी छैथ । हिनकसभसँ कहियासँ हमर सम्बन्ध अइछ से तँ नहि कहि मुदा सम्बन्ध अत्यन्त प्रगाढ आ भावनात्मक अइछ । हम लक्खाभाई आ हेमबाबुक आग्रह सामान्यतया अस्वीकार नहि कऽ सकैत छी ।
एहुबेर तहिना भेल । हमर एहिबेरुक बैतडी यात्रा हिनकेसभक खास कऽ लेखकजीक आग्रहपर भेल से स्वीकार करबामे हमरा कनेको संकोच नहि अइछ । शहीद दिवसक अवसरिपर लेखकजीक संयोजनमे २०८१ माघ १६ आ १७ गते (२०२५ जनवरी २९ आ ३०) दशरथ चन्द साहित्य उत्सव तथा अन्तर्राष्ट्रिय काव्य गोष्ठीक आयोजन होबाक पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम छलए । दशरथ चन्द नगरपालिकाक मुख्य प्रवद्र्धन तथा शहीद दशरथ चन्द स्मृति प्रतिष्ठानक सहकार्यमे राष्ट्रियता संरक्षण अभियानद्वारा ई कार्यक्रम शहीद चन्दक जन्मघरमे आयेजित भेल रहए । साहित्यकार लेखक राष्ट्रियता संरक्षण अभियानक अध्यक्ष छैथ ।
लेखक जी बहुत पहिनेसँ बैतडी एबाहेतु हमरा आमन्त्रित कऽ रहल छलाह । ओ हमरा किछु मास पहिने कहने रहैथ–आहाँकँे हमसभ बैतडीमे सूदूरपश्चिमक अग्रज पत्रकार स्व रामबहादुर चन्द स्मृति पत्रकारिता सम्मानसँ सम्मानित करऽ चाहैत छी । आहाँकेँ आबऽ पडत– ओ जोड दैत कहने रहैथ । अग्रज पत्रकार स्व चन्दक नाम जुडल सम्मान । हम लेखकजीक आगहकेँ अस्वीकार नहि कऽ पाएल रही । ई सम्मान हमरालेल बहुत महत्व रखैत अइछ । हम अपन पत्रकारिताक प्रशिक्षणक क्यारियरमे सुदूरपश्चिममे बहुत समय आ सामथर््य व्यतीत केने छी । हमर दावी अइछ, एखन सुदूरपश्चिममे क्रियाशील बहुतो पत्रकारसभसँग हमरा प्रशिक्षणक क्रममे अन्तरक्रियाक अवसरि प्राप्त भेल अइछ । कहिओकाल अपन दावीसँ बेसी समाजिक स्वीकृति अर्थ रखैत छै । हमरा एखनधैर सुदूपश्चिममे एहन सामाजिक स्वीकृति नहि भेटल छल । एहनमे हेमबाबुक प्रस्ताव हमरालेल निश्चय महत्वपूर्ण हएब स्वाभाविक छल आ तएँ हम हुनक प्रस्ताव चट दऽ स्वीकार कएल । धन्यवाद आ आभार हेमबाबु ।
हम १४ गते साँझ काठमाण्डूसँ धनगढी एलौ आ ओतऽ रात्रिविश्रामक बाद दोसर दिन राष्ट्रिय समाचार समिति (रासस)क सुदूरपश्चिम प्रदेश प्रमुख सिद्धराज भट्ट आ पर्यटन व्यवशायी मायाप्रकाश भट्ट तीनुगोटे मायाजीक गाडीमे वैतडी आएल रही । १६ गतेक कार्यक्रममे हमरा अतिरिक्त सिद्धराज आ मायाजीकेँ सेहो सम्मानित कएल गेल छलै । मायाजीसँ हमर ई पहिल भेट अइछ । भेट ठिकठाक आ सार्थक रहल । मायाजी भरिरस्ता सुदूरपश्चिमक पर्यटनक अवस्था, कार्यक्रम आ उपलब्धि तथा पर्यटकीय केन्द्रक मादे जानकारी देलैन । हमरालेल ई जानकारी बहुत महत्वपूर्ण रहल ।

बैतडीक पाटन नगरपालिका आ सुर्नया गाउपालिकाक सिमानमे अवस्थित पाताल भुमेश्वर गुफा क्षेत्रमे रहल शिव मन्दिर ।
आबऽकालमे सतबाँझ (एतऽसँ दार्चुला जेबाक रस्ता अलग होइत छै)सँ कने उपर निङ्गलाशैनी देवीक मन्दिर छै, ओतऽ रुकलौ । इएह देवीक नामपर ई जगह सेहो प्रसिद्ध अइछ । परापूर्वकालसँ लोकआस्थाक देवीक रुपमे स्थापित ई स्थान लोकऽक आस्था आ श्रद्धाक केन्द्र रहि आएल अइछ । मायाजीक प्रभावसँ पूजारी विशेष पूजा करेलैन । एहिबेर एकटा अन्तर बुझाएल । पछिलाबेर जहिया हम एतऽ आएल रही ओकर तुलनामे एहिबेर लोक कम बुझाएल । जखनि कि मन्दिरक ठीक नीचाक मैदानमे नगरस्तरीय खेलकुदक तैयारी भऽ रहल छलैक ।
हमसभ ओतऽसँ आगाँ बढैत जा रहल छलौं कि रस्तामे गोठालापानीक मुहेँपर माया घरद्वारा सञ्चालित कपडा बेैक देखलियैक । जकरालग छै से देतै आ जकरालग नहि छै से लेतै ताहि उद्देश्यसँ परोपकारी कार्य करबालेल मौसमअनुसारक कपडा वितरण करबालेल ई बैकक स्थापना कएल गेल बात एकर व्यवस्थापक महेश भट्ट बतौलैन । अति विपन्न, एकल, असहाय, बेसहारा, टुग्घर बालबालिकाकेँ लक्षित कऽ ई काजऽक सुरुवात कएल गेल जानकारी भट्ट करौलैन । सञ्चालनऽक एक वर्ष (ओहि दिन एक वर्ष १५ दिन भेल रहैकं)मे एहि बैंकद्वारा आठ सओ ६६ परिवारके कपडा वितरण कएल गेल अइछ । मायाजी धनगढीसँ एहि बैंकक लेल कपडा अनने रहैथ । ओ कपडा देलैन आ हमरालोकैन ओतऽसँ विदा भेलौं । बैतडीसन जगहपर सञ्चालित एहन कार्यक्रमकेँ जते प्रशंसा कएल जाए से कम अइछ ।
हमसभ ओतऽसँ गोठालापानी वजार जा सिधे आगाँ बढलौ आ पुजारास्थित त्रिपुरासुन्दरी देवीक मन्दिर जा दर्शन केलौं । एतहुका दर्शन हमरालेल सदति विशेष रहैत अइछ । हमरासभक कूलदेवी पञ्चभगिनी छैथ आ ओहिमे एक त्रिपुरासुन्दरीक सेहो गणना होइए । एतऽ दर्शन कऽ हमरालोकैन गोठालापानी वजार घुरलौ आ कनेकालक घुमफिरऽक बाद होटलक शरण । बैतडीमे एखन नीक शर्द छै । होटलमे हेमबाबु, पत्रकार महासंघ बैतडीक अध्यक्ष नरी वडु, पत्रकार नरेन्द्र भट्ट, जिज्ञासु आ शिद्धराज तथा मायाजीसँ कनेकाल बात भेल । विनोद विष्ट आ लक्ष्मी पाण्डेजीसँ फोनपर बात भेल छलए । लोकेशक फोन नहि लागल छलै । जे हुअए हेमबाबु, नरी, नरेन्द, जिज्ञासुलगायतसँ जिलाक पत्रकारिता आ पत्रकारक अवस्थाक मादे विमर्श भेल । निष्कर्ष छल–अवस्था सन्तोषजनक नहि अइछ । विज्ञापन वजार अत्यन्त छोट भेल जा रहल छै । स्थानीय विज्ञापनक पैघ अंश डिजिटल आ सामाजिक सञ्जालक हिस्सा बनैत जा रहल अइछ । पत्रिकाक वजारक अवस्था आर दयनीय बनल जा रहल छै । विक्री शुन्यक अवस्थामे छै । समस्या दोसरो छै एहि जिलामे लोकऽक संख्या घटैत आ मिडियाक संख्या बढैत जा रहल छै ।
दोसर दिन अर्थात माघ १६ गतेक दिन महत्वपूर्ण छल । मुदा कार्यक्रम सुरु होबामे एखन समय बाँकी छलैक । हमरासभक बीचक वितलाहा रातिक सहमतिमोताविक आई ईश्वरी गंङ्गाधाम जेबाक छल । मायाजी सहजकर्ता आ पथप्रदर्शक दुनु छलैथ । हमरालोकैन भोरक करिव सात वजे मयाजीक गाडीसँ ओम्हर विदा भेलौं । कने दूरधैर गाडी आगाँ गेलाक बाद ओतऽसँ प्रदल जेबाक छलै । गोठालापानीक क्षेत्र कने उचाईमे छै मुदा ई जगह ओतऽसँ सोझे नीचा पडै छै । छोटछिन नदि किनारमे भगवानक छोटेछिन मन्दिर छैक । ई नदीकेँ ईश्वरीय अर्थात ईश्वरी गंङ्गा कहल जाइत छै । दशरथ चन्द नगरपालिका वार्ड न ४ आ ६ क सीमापर अवस्थित ई जगहक भ्रमण हमरालेल पहिल छल ।
एबाकाल कने कठिनाई भेल आ जेबाकाल सेहो कने चढाईक कारण दिक्कत हएत से स्वाभाविके । मुदा एतऽ एलाक बाद ठीके ईश्वरीय अनुभूति होइत छै । पहाडक खोँजमे कलकल बहैत नदि किनारमे मन्दिर । लोकऽक आवाजाही शून्यक बराबरि । हम पूजारीसँ एहि स्थानक बारेमे पुछलियैन । हुनकर जवाफ छलए–त्रेतायुगमे भगवान श्री राम एतहि स्नान कऽ कऽ भगवान शिवऽक तपस्था केने छलैथ । भगवान राम जाहि जगहपर तपस्या केने विश्वास कएल जाइछ ओ स्थान स्थानीय स्तरमे रामपातालक नामसँ प्रसिद्ध अइछ जे ईश्वरी गंङ्गासँ कने उपरक जगहपर पडैत छै ।
हमसभ ओतऽसँ विदा होइत पुनः गोठालापानी वजार एलौ आ जगन्नाथधाम गेलौं । वैतडीक ई दोसर महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटकीय स्थानक रुपमे परिचित अइछ । स्थानीय धार्मिक विश्वासमोताविक ईश्वरी गंङ्गासँ सम्बन्धित ई जगह मूल सदरमुकाममे अवस्थित भेलाक कारणे एतऽ बेसी लोक पहुँचैत अइछ । मायाजी हमरा आ सिद्धराज भट्टजीक सँगे छलैथ । ओ एहि स्थानसभक बारेमे जानकारी दऽ रहल छलैथ । करिव नओ वाजिगेल छलै । हमरालोकैन वजारक चौकपर जलपान केलौं आ आबऽक गन्तव्यदिसि विदा भेलौ– कार्यक्रम स्थल अर्थात शहीद दशरथ चन्दजीक जन्मस्थल वसकोट । आगाँ बढैतकाल धनगढीमे क्रियाशील पत्रकार शिवराज भट्टजी भेटलैथ । वैतडी एबासँ पहिने हुनकासँगे हम सम्पर्कमे छलौं । ओ एतऽ एबालेल सहजीकरण केने रहैथ । पहिने सँगे एबाक कार्यक्रम छल मुदा हुनकर आन व्यस्ताक कारण सम्भव नहि भऽ सकल । ओ कहलाह–हमहुँ जलपान कऽ रहल छी । आहाँसब आगाँ बढू । हम पाछाँसँ अबैत छी ।
गाडी झुलाघाट सडकदिसि बढिरहल छलै । कने आगाँ गेलाक बाद बसकोट मोडपर गाडी रोकि हमरालोकैन पैदल आगाँ बढलौ । शायद २०÷२५ मिनटक यात्राक बाद शहीद चन्दक जन्मघरक आङन पहुँचलौ । दिव्यधामक अनुभूति भेल । आश्चर्य लागल जे आइसँ सओ वर्ष पहिने एहि गाममे केहन चेतना रहल हेतै जे एतेक विकट जगहक लोक राणाशाहीविरुद्ध प्रजातन्त्र वहालीक आन्दोलनमे सहभागी भेलैथ आ राणाद्वारा मारल गेलाह । सलाम अइछ शहीद । हम अपनाकेँ धन्य बुझैत छी जे आहाँक जन्म धरतीक माइट छुवाकऽ अवसरि हमरा भेटल । जएँ आहाँ शहादत देलियै तएँ हमरासभकेँ स्वतन्त्र प्रजातान्त्रिक नेपालक नागरिक होबाक गौरवबोध अइछ ।

बैतडीक बसकोटस्थिथ सहीद दशरथ चन्दक जन्म घरमे हुनक प्रतिमा ।
सम्मानित कएल गेलाक बाद हमरा बजबाक अवसरि भेटल आ हम अपन विचार व्यक्त करैतकाल शहीद चन्दक उएह चेतनाक बात करैत स्थानीय लोकऽकेँ चन्दक सपना आ वर्तमान पुस्ताक लोकऽक दायित्वक सम्बन्धमे चर्चा केने रही । कार्यक्रमक प्रमुख अतिथि नेपाल ललितकला प्रज्ञा–प्रतिष्ठानक कुलपति नारदमणि हार्तम्छालीक हाथे हम सम्मान ग्रहण केलौं । आदरणीय कुलपतिजीप्रति आभार । ओहि सन्दर्भमे हम शहीद दशरथ चन्द स्मृति प्रतिष्ठानक आजीवन सदस्यता सेहो ग्रहण कऽ गौरवबोध केलौं । हम प्रतिष्ठानक अध्यक्ष विनोदबहादुर चन्दजीप्रति कृतज्ञता व्यक्त करऽ चाहैत छी । मुदा सबसँ बेसी अनुग्रहित छी हेमबाबु लेखकप्रति जे हमरा आई ई शहीद भूमिसँ प्रत्यक्ष साक्षत्कार कऽ सकबाक अवसरि प्रदान केलैन ।
दुपहरक करिव दू वाजिगेल छलए । हमरासभ कार्यक्रम स्थलपर व्यवस्था कएल गेल अपनासभक भोजक शैलीमे थारीमे परसल गेल भोजन केलौं । स्थानीय परिकार आ शैली । अत्यन्त स्वादिष्ट । भात, दालि, तरकारी, अचार, पापड आ दही पकौडा । अदभुत । हमरा तँ भुखो लागल छलए आ स्वादिक्ष्ट सेहो लागल । परसन लऽ कऽ खेलियै । भोजन करैत करिव तीन वाजिगेल छलए । आब विदा भेनाई जरुरी बुझाएल मायाजी आ हमराबीच आँखिसँ संवाद भऽ रहल छल । हम हेमबाबुसँ अनुमति लेलौं । जँ सम्भव हएत तँ आई हमरालोकैन धनगढी पहुँचबाक प्रयत्न करबै । जँ आइए धनगढी पहुँचि गेलों तँ काइल भोरे काठमाण्डू जेबामे सहज होबाक बात कहलापर हेमबाबुसँ अनुमति लेबामे सहजता भेल नहि तँ ओ साहित्यिक कार्यक्रममे सहभागी भऽ मैथिली कविता सुनेबालेल जोड कऽ रहल छलैथ । हम कहलियैन–सुदूरपश्चिमक बैतडीमे मैथिली कविता कोनो दोसरबेर हेतै । एखन जाए दिय, छुट्टी नहि अइछ । ओ स्थानीय उत्पादन गुड उपहार दऽ विदा केलैथ ।
ओतऽसँ विदा भऽ हमरालोकैन आगाँ बढलौं तँ माया जी पाताल भुमेश्वरक चर्चा केलैन । हुनक कहब छलैन–एतऽधैर आएल छी तँ पाताल भुमेश्वर एकबेर पहुँचबे करु । पर्यटकीय दृष्टिए अत्यन्त महत्वपूर्ण मुदा बहुत लोकक दृष्टिसँ दूर ई स्थान अत्यन्त महत्वपूर्ण अइछ ।
मायाजी एहि स्थानक बारेमे एना कऽ चर्चा केलैना जे ओतऽ जेबाक लोभकेँ नहि रोकि सकलौं ।
प्रत्यक्षतः कहलियैन–आहाँ पर्यटन व्यवशायी छी । आहाँ कहै छी तँ निश्चय नीक जगह हएत । चलू, एकबेर पहुँचि अबै छी ।कते काल लगतै ।
ओ कहलैन–मुश्किलसँ पैदल आधा घण्टा । मुदा पहाडक आधा घण्टाक चढाईक अर्थ हम बुझिरहल छलियै । कठिनाह तँ हेबे करतै । तैयो हम हुनक आग्रह अस्वीकार करबाक अवस्थामे नहि छलौं ।
गोठालापानीसँ १८ किलोमिटर दूरीमे अवस्थित सतबाँझसँ सिउँडे पहुँचैत करिव साढे चारि वाजिगेल छल । आब एतऽसँ पैदल यात्रा करबाक छलए मायाजकि अनुसार आधा घण्टा । आब हम, मायाजी आ शिद्धराजजी चलनाई सुरु केलौं । आधा घण्टा तँ नहि करिव ४०÷४५ मिनट लागिगेल । पूरा चढाई । चढैतकाल तँ बड वेजाए लागिरहल छलए मुदा चढाईक बाद उपर पाताल भुमेश्वर पहुँचलाक बाद जेना सब थकान छुमन्तर भऽगेल ।
चारुदिसि हरियाली । पाटन नगरपालिका आ सुर्नया गाउँपालिकाक सिमानपर अवस्थित सिद्धनाथ सामुदायिक वनक्षेत्रमे अनुमानित ८५ मिटर लम्बाई आ ४५ मिटर चौडाईक एक ताल छै । चारुदिसि बाँज, कटुस आ लालिगुराँसक जंगल । बीचमे ताललगेमे शिवमन्दिर आ मन्दिरक दक्षीण सटल मूल गुफा, जे पाताल गुफाक नामसँ प्रख्यात अइछ । एकर अगलवगलमे अन्य तीनटा गुफा ।स्थानीय स्तरमे एहि स्थानक बारेमे अनेक विश्वास आ ंिवदन्ती व्याप्त अइछ । ताहिसम्बन्धमे एखन एतऽ चर्चा नहि कएल जा रहल अइछ । मुदा एते कहब अनिवार्य जे एहि स्थानक आवश्यक अध्ययन भेनाई अपरिहार्य अइछ । पर्यटन व्यवसायी मायाजीक मोताविक निजीस्तरसँ एहि सम्बनधमे किछु अध्ययन तँ भेल अइछ मुदा ओ पर्याप्त नहि अइछ । मायाजी कहलैन–करिव ११ वर्ष पहिने एक फ्रान्सेली नागरिक मोरिस डुसेनक नेतृत्वमे गुफाक अनुसन्धानक काज आगाँ बढल छलए । ओहिबेरमे मूल गुफाभितर करिव आठ सओ मिटरक दूरीधैरक यात्रा तय कएल गेल छल । गुफाक अन्त्य नहि भेल छलै । एकर अर्थ छै गुफा आगाँ सेहो गेलैए– मायाजी जानकारी दऽ रहल छलैथ ।

बैतडीक पाटन नगरपालिका आ सुर्नया गाउपालिकाक सिमानमे अवस्थित पाताल भुमेश्वर गुफा क्षेत्रमे रहल ताल ।
पत्रकार शिद्धराजजी स्थानीयक हवाला दैत कहलैथ– स्थानीयक विश्वास अइछ गुफाक दोसर मुहँ आठ नओ किलोमिटरक दूरीमे वहैत सुर्नया नदिमे खुलैत अइछ । सत्यता कि अइछ नहि जानि । जते मुहँ ओते बात । मुदा एकटा बात निश्चित जे एहि स्थानक अध्ययन अनुसन्धानमे आधिकारिकरुपसँ राज्यक संयन्त्रकेँ सक्रिय भेनाई जरुरी अइछ । जँ एकर उचित अध्ययन अनुसन्धान भऽ सकए तँ निश्चय ई स्थान सुदूरपश्चिम नेपालक एक महत्वपूर्ण पर्यटकीय गन्तव्य बनि सकैत अइछ । आब हमरालोकैन घुरिरहल छलौ या कही उतैररहल छलौं सिउडेदिसि, जतऽ गाडी हमरालोकैनकेँ प्रतीक्षा कऽ रहल छलए ।
(राष्ट्रिय समाचार समितिकक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा, पत्रकारिता, साहित्य एवम् समसामयिक विषयसबमे सशक्त रुपमे कलम चलबैत आइब रहल छइथ ।)





