टोपी समाजवादी


राेशन जनकपुरी

राेशन जनकपुरी

समाजवादके टोपी
जेना मन हो तेना पहिरु ,
टोपिए त छै
मन होय त सुनटा पहिरु,
मन होय त उनटा पहिरु,
टोपी पहिरने देख क’
लोक कहबे करत,
जे टोपी पहिरने छै ,
अहाँ चाहबो सेहे करैछी,
जे लोक कहय
जे देखही टोपी पहिरने छै !
जहिना सूती होइ, नइँ होइ,
लेकिन सूती लिखल कमीज पहिरला पर
लोक कहैछै देखही
सूतीके कमीज पहिरने छै,
तहिना समाजवादी टोपी पहिर’ ला,
समाजवादी भेनाइ जरुरी नइँ छै,
बस टोपीके समाजवादी कहि देने भ’जाइछै।
के करे ओतेक झंझट !
समाजवादी होब’ला
गरिबहा, जन बनिहार स दोस्ती,
ओकरा लेल संघर्ष,
की की की की !
ओह ! के करे ओतेक झंझट,
कुर्ताके क्रीज खराव कर’ के जरुरते नइँ,
बस समाजवादी लिखल टोपी पहीर लीय,
पाँच बरखमे एकबेर, वा बीचमे कहियो काल
गरिबहा आ जनबनिहार स भेटघाँट क’ लीय,
आ बात खत्तम।
ओना त समाजवादी टोपी होइछै अन्तर्राष्ट्रीय,
लेकिन लोक अपना हिसाबे सेहो बनालै छै,
देस, क्षेत्र, वंश, गोत्र,
जेहन अनुकूल हो तेहन,
जेना नेपाली टोपी,
भारतीय टोपी ,
गान्धी टोपी,
अमेरिकी टोपी (हैट)
चिनियाँ टोपी,
जरुरत हो त
गम्छाके टोपी ।
(ई अलग बात छै
जे कहियो काल
जनता सेहो
‘कागजके टोपी’ पहिरा दैछै ।)
टोपी पहिर’ के कैटा फायदा छै,
अइ स अहाँ माथ सेहो झाँइप सकै छी
अपन मूँह सेहोे नुका सकै छीे।
समाजवादी होइ, नइँ होइ,
माथा आ मूँह समाजवादी होे नइँ हो,
समाजवादी टोपी पहिरने छी त,
लोक मुदा कहत,
देखही समाजवादी टोपी पहिरने छै ।
समाजवादी टोपी पहिर’के आरो फायदा छै,
अहाँ समाजवादी टोपी स मूँह झाँइप क’
जेना मन हो तेना,
तरह तरह स
मुसका सकै छी ।
अखन लोक अहिना करै छै,
समाजवादी होब’के झंझट नइँ करै छै
बस टोपी पहीर लै छै
चाहे टोपी त’रमे मूँह नुका लै छै।
अहूँ किया करब झंझट
जेना मन हो तेना
उनटा सुनटा
पहीर लीय टोपी समाजवादी।
होइ, नइँ होइ,
लोक कहिएदेत समाजवादी टोपीबला,
आ नइँ कहलक त कहबा लेब,
माइर लोक बौआइत रहैछै,
बरु ओकरोसबके पहिरा देबै ‘टोपी’ ।

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