नियात्रा:
धर्मेन्द्र विह्वल
नेपालऽक व्यवशायिक राजधानीक नाम सँ चिन्हल जाएबला वीरगञ्ज सँ सटल बारा जिलाक सिमरामे अवस्थित विमानस्थलमे हमरालोकैनकेँ काठमाण्डू सँ लऽ कऽउड़ल विमान आई समयेपर पहुँचौने छल । हमरा सर्लाही जिलाक मुख्यालय मलंगवा पहुँचबाक छलए । सर्लाही मिथिलाक एक महत्वपूर्ण क्षेत्र अइछ । जँ मैथिल सभ्यताक बात करी तँ सर्लाहीक महत्वकेँ अस्वीकार नै कएल जा सकै छै । अदौकाल सँ मिथिला सभ्यता आ संस्कृतिक एक महत्वपूर्ण केन्द्रक रुपमे रहल ई जिला मैथिल विद्वत परम्पराक दृष्टिएँ सेहो महत्वपूर्ण मानल जाइत अइछ ।
२०८२ कात्तिक २६ गते अर्थात २०२५ नोभेम्बर ११ क दिन ओतऽ एक कार्यक्रम छै, जाहिमे हमरा सहभागी होबाक छलए आ कार्यक्रम सँ एकदिन पहिने अर्थात आई कात्तिक २५ गते (१० नोभेम्बर) काठमाण्डू सँ प्रस्थाना कऽ हम सिमरा पहुँचल रही । जँ विमानयात्रा कएल जाए तँ जनकपुर या सिमरा दूटामे सँ कोनो एक विमानस्थल प्रयोग कऽ पहुँचल जा सकैए मलंगवा । हवाईमुल्यमे कनेक अन्तर छै । कोनो विमानस्थल प्रयोग कएल जाए मलंगवा पहुँचबाहेतु गाड़ी प्रयोग करहि पड़त । ओना नेपालऽक रस्ते अनेक सड़क प्रयोग कऽ एतऽ पहुँचल जा सकै छै । भारतके रस्ते सेहो आएल जा सकैत छै । एहिहेतु भारतऽक सीमावर्ती क्षेत्र धैर रेल आ सड़क यातायातऽक बहुतो साधन उपलब्ध छै ।
पथलैया सँ मलंगवाक यात्रा आठ घण्टामे
बुद्ध एयरक विमान आई बहुत टाइममे सिमरामे अवतरण केने रहए । दिनऽक ठिक चाइर वजल रहै ।मुदा सबकिछु अपने सोचल नै हौई छै । एहिबेर मलंगवा पहुँचबाहेतु जे तरहदुत भेल ताहि प्रकारक अनुभव कहिओ नै भेल रहए । समयक व्यय से अलग । सामान्यतया सिमरा सँ मलंगवा बेसी सँ बेसी दू घण्टाक गाड़ीक यात्रा कऽ पहुँचल जा सकैए, मुदा एहिबेर करिव आठ घण्टाक समय व्यय करऽ पड़ल । पत्रकार महासंघ सर्लाही आ सुनौलो सिसोट नामक संस्थाक सहकार्यमे काइल पत्रकारसभलेल एकदिनमा अनुशिक्षण कार्यक्रम होबाक छलै आ हमरा ओहि कार्यक्रममे सहजकर्ताक जिम्मेबारी निर्वाह कऽ देवाक जिम्मेबारी देल गेल छलए । पत्रकार महासंघके अध्यक्ष भाई ओमप्रकाश ठाकुर एहि जिम्मेबारीक लेल करिव आठ÷दस दिन पहिने आग्रह केने रहैथ । यद्यपि व्यस्तताक बादो हुनक आग्रह अस्वीकार नै कएल भेल रहए ।
सर्लाहीक पत्रकारसभसँग हमर बहुत पुरान आ घनिष्ट सम्बन्ध रहि आएल अइछ । हुनकासभसँग अत्यन्त आत्मिीयताक बोध होइए । हमरा बुझने एहि जिलाक पत्रकारिताक विकासमे थोड़बहुत भूमिका हमरो अइछ । ठिक वीस वर्ष पहिने हम एतऽ पत्रकारिताक तालिम सञ्चालन केने रही । हमर सहजकर्ताक कयारियरऽक शायद दोसर तालिम छल ई । आजुक दिन एहि जिलाक पहिल पुस्तऽक पत्रकार जे सक्रिय छैथ से सब उएह तालिमऽक सहभागी छैथ जँ कही तँ अन्यथा नै हएत । एहन पृष्ठभूमिमे भाई ओमप्रकाशक आग्रह हम कोना अस्वीकार क सकै छी । ई सम्बन्ध नवीकरणऽक अवसर सेहो छल । आभार भाई ओमप्रकाश ।
२०६१÷६२ मे आयोजित ओहि तालिमऽक बाद हम बेरबेर विभिन्न प्रयोजन सँ एतऽ अबैत रहलौं । मुदा एहिबेरुक यात्रा विगत सँ किछु भिन्न रहल । कहबी छै ने जे सबकिछु अपन सोचलेजकाँ नै होइत छै । उपर उल्ल्ेख कऽ चुकलौं जे हम एहिबेर काठमाण्डू सँ एतऽ जेबालेल सिमरा विमानस्थलऽक प्रयोग केने रही आ विमान आई विनाविलम्ब नियत समयपर अवतरण केने रहए । काइल सँ मलंगवामे सञ्चालन होबऽबला तालिमक आयोजक संस्थाक अध्यक्ष अरुणप्रतापकुमार सिंह पिन्टु सेहो काठमाण्डू सँ हमरासँगे आएल रहैथ । सिमराक बाद यात्राक संयोजन हुनके जिम्मा छलैन ।
निजगढ़के जंगलमे हाथीक त्रास
विमानस्थलपर गाड़ी आएल रहए । गाड़ीमे चालक सञ्जीव आ अरुणक छोट भाए विकास रहैथ । आब हमसभ गाड़ीमे चाइरगोटे रही । हमरालोकैन सिमरामे जलपान कऽ गाड़ीमे सवार भऽ पथलैयादिस आगाँ बढ़लौ । शायद एक÷डेढ़ किलोमीटर आगाँ बढ़ल रही गाड़ीक टायर पन्चर भऽ गेल । गाड़ी मिस्त्री ताइक कऽटायर बनबैत ओतऽ सँ करिव एक÷डेढ़ घण्टाबाद पुनः आगाँ बढ़ल गेल ।
हे ले, ई कि भेलै ? पथलैया सँ कने आगाँ बढ़लाक बाद जंगलमे टायर फेर पन्चर भऽ गेल । आब समस्या ई जे कएल कि जाए ? जंगलमे त गाड़ी रोइक नै सकै छी । निजगढ सँ पहिने कोनो मिस्त्री आ वर्कशपऽक जोगाड़क कोनो सम्भावना नै छै आ निजगढ़ एखनो करिव दस किलोमीटर दूर अइछ । चालक सञ्जिव कहलैन, आब जे हेतै देखल जेतै इएह टायरपर निजगढ़ धैर चलल जाए आ ओतऽ टायर बनाओल जाए । एखन पथलैयाँ सँ आसपासऽक जंगलमे जंगली हाथीक बहुत बेसी आवाजाही छै आ जंगली हाथीक ई यात्रा चन्द्रनिगाहपुर धैर रहै छै ।
स्थानीयक अनुभव छैन, जंगली हाथीक कारण एखन एहि क्षेत्रक जनजीवन प्रभावित रहैत छै । कहिओकाल तँ हाथी राजमार्गक बीचोबीच आइब ठाड़ भऽ जाई छै आ घण्टो यातायात प्रभावित भऽ जाई छै । सर्लाहीके पत्रकार टंक क्षेत्रीक कहब छैन, हाथीक वासस्थानऽक अतिक्रमण अर्थात जंगलक विनाशऽक कारण हाथी जंगल सँ बाहर आइब मानव वस्तीदिस एबालेल बाध्य अइछ । वारा निजगढ़के पत्रकार गुरु गौतमक कहब छैन, आई जतऽ मानव छै शायद ओतऽ कहिओ विगतमे हाथीक वासस्थान आ आवाजाहीक रस्ता रहल हेतै तएँ आई हाथी अपन पुरान वातावरण ताइकरहल अइछ आ बीच सड़कपर आइब ठाड़ भऽ जाइए ।
खायर जे किछु, साँझऽक करिव साढ़े सात वजे हमरालोकैन निजगढ़ पहुँचलौ । ई स्थान पछिला समयमे वेस चर्चित अइछ । मधेश आ काठमाण्डूकेँ जोडऽबला फास्टट्रयाक सड़क एतऽस बइनरहल छै । तहिना अन्तर्राष्ट्रिय विमानस्थलक निर्माणहेतु सेहो ई स्थान चर्चामे अइछ ।निजगढ़मे टायरके सामान्य मरमत कएल गेल । अरुणजी नव टायरक खोजी केलैन मुदा ओतऽ से सम्भव नै भऽ सकल । हमरालोकैन पुनः आगाँ बढ़लौं । आबऽक लक्ष्य चन्द्रनिगाहपुर छल । हमसभ कोनो हिसाबे ओतऽ पहुँचलौं । ओतऽ अरुणजी नव टायर किनलैन आ हमरालोकैन आगाँ बढ़लौं, रातुक करिव नओ बाइज गेल रहए ।
कनेक आगाँ बढ़लाक बाद मिथिलाक चर्चित नदी वागमति अबै छै । ई उएह स्थान अइछ जतऽ पहाड़ सँ वहैत आइब वागमति मैदानी भागमे प्रवेश करैत अइछ । बागमतिक एहिपार रौतहटसमाप्त भऽ ओहिपार सुरु होइत छै सर्लाही जिला अर्थात हमर गन्तव्य । बागमति पुल पार केलाक बाद अबै छै कर्महिया । एतऽ ट्राफिक पुलिस चौकी छै । जाइन नै किए, भारतीय नम्बर प्लेटके गाड़ी देखि ट्राफिक पुलिसक एकटा अधिकारी समस्या ठाड़ कऽ देलैन । करिव ४५ मिनट गाड़ी ओतहि रोकल गेल । बादमे पुलिसक एक उच्च अधिकारीक सहजीकरणऽक बाद समस्या समाधान भेल ।
हरिवनमे मित्रमिलन : अतीतऽक स्मृति
ओम्हर हरिवनमे पत्रकार मित्रलोकैन ओमप्रकाश, टंक क्षेत्री, रोशन न्यौपाने, डुकु कोइराला बहुत समयसँ रस्ता जोहिरहल छलैथ । अन्ततः करिव सवा दश वजे हमरालोकैन हरिवन पहुँचलौ । हरिवनमे भोजन करैत गप्पसरक्का चललै । हमरा पुरना दिनऽक याद आबऽ लागल । पहिने एहि जिलामे उपर उल्लेख भेल नामऽक अतिरिक्त अमन कोइराला, राजेश मिश्र, राजेश झा, विश्वनाथ ठाकुर, चुडामण्ी वाग्ले, सुनील ठाकुर, अग्रज वेनिवहादुर कार्की, शंकर श्रेष्ठ, रामबाबु खडका, सोम दियाली, प्रकाश मैनाली, रमेश गाउँले, कृष्ण इस्माली, पूर्णबहादुर थापा, कृष्ण थपलिया, बख्तियार अलीक सँग बहुत महत्वपूर्ण आ अन्तरंग समय बितौने छी आ एखन ओ स्मृति अनायस ताजा भऽ उठल । एखन एहिमे सँ बहुतो गोटे सर्लाहीमे नै छैथ । मुदा जतऽ छैथ अधिकांश पत्रकारितेमे संलग्न छैथ । भोजन कऽ ओत सँ विदा भेलौं । टंक हमरेसँग रहलैथ । मलंगवा पहुँचैत रातुक करिव बारह बाइज गेल छलए, अर्थात तिथि बदैल गेल छलए ।
दोसर दिन तालिमक आयोजन कएल गेल । जिलाक ३० गोटे पत्रकार सहभागी रहैथ । नव आ पुरान दूनु पुस्तऽक पत्रकारक सहभागिता छलए तालिममे । आइकाइल मधेशमे पत्रकार तालिमऽक बात तँ कएल जाई छै । माग होइ छै । मुदा सहभागिताक दृष्टिएँ अवस्था निराशाजनक रहै छै । मुदा एतहुका तालिममे देखलियै जे सहभागीसभ पूरा समय देलैन आ सुरु सँ अन्त धैर रहलैथ । एहिहिसाबे देखी तँ तालिम स्वयमे सफल रहए से मानल जा सकै छै ।
सर्लहिया देवी आ मलंग स्थान
सर्लाहीक मलंगवा राजनीतिक दृष्टिएँ अत्यन्त सचेत आ चर्चित स्थान मानल जाइए । नेपालमे सत्ताक शक्तिमे सदैत सर्लाहीक सहभागिता रहल । मधेश आन्दोलनऽक सन्दर्भमे तँ ई जिला अत्यन्त चर्चामे रहल बात ककरो सँ छपित नै अइछ । मधेश आन्दोलनऽक बहुत बाद धैर केन्द्रमे बनल प्रत्येक सरकारमे सर्लाहीक सहभागिता एकहिसाबे अनिवार्य मानल गेल । मुदा राजनीतिक ई प्रचूर शक्तिक प्रभाव एतहुका जनजीवन आ भौतिक तथा मानवीय विकासपर बड़ वेसी पड़लजकाँ नै बुझाइत छै । भौतिक आ मानवीय विकासऽक दृष्टिएँ सर्लाही एखनो पछुआएलेजकाँ लगैत अइछ । सर्लाहीमे एक मान्यता छै एखन, एतहुका नेता सम्पन्न आ प्रभावशाली तँ छैथ मुदा तकर लाभ जनसामान्यकेँ नै भेटल छै ।
हम एहिबेर करिव दू वर्षक बाद मलंगवा पहुँचल रही, कोनो खास परिवर्तन नै बुझाएल । मलंगवाक पर्यटकीय आकर्षणक केन्द्र बइन सकबाक सम्भावना रहल मलंग बाबाक स्थान सेहो ओहिना अइछ । उपरो चर्चा केलौ जे मलगंवा सर्लाही जिलाक सदरमुकाम अर्थात मुख्यालय अइछ । भारतीय सीमासँ जुड़ल मलंगवा पूर्व–पश्चिम राजमार्गक नवलपुरसँ करिव पच्चीस किलोमिटरक दूरीमे अवस्थित अछि । एहि ठामक नामकरणक बारेमे एक मिथक प्रचलित अछि ।
स्थानीय जनश्रुतिअनुसार बहुत समय पहिने (समयकेँ यकिन नहि कएल जा सकल छै ।) हालक मलंगवा क्षेत्र घना जंगल रहैक । तहिया एतऽ वस्ती विकसित नै भेल रहैक । एक समयक बात छै, दक्षीणसँ एक सिद्ध पुरुष एहि जंगलमे आइब आश्रम स्थापना कऽ रहऽ लगलाह । उएह एहि क्षेत्रमे वस्ती बैसौलैन से मानल जाइत अइछ । ओ हिन्दू या मुस्लिम के रहैथ ताहि बातऽक यकिन नै भऽ सकल अइछ । मलंग बाबाक नाम सँ स्थापित आ परिचित ई सिद्ध पुरुषकेँ हिन्दू आ मुस्लिम दुनू समुदायक लोक बड्ड श्रद्धा करै अइछ । मुस्लिमसभ मलंग बाबाकेँ सिद्ध पीठकेँ मलंग मजार कहैत चादर ओढ़ा भक्ति–भाव प्रदर्शित करैत छैथ । ओतऽ मुस्लिमसभ कुरानक आयतक उच्चारण करैत नमाज पढैÞत छैथ तँ हिन्दूसभ मलंग समाधि–स्थलक रूपमे एतऽ भव्य पूजापाठ करैत वलिप्रदानसमेत करैत छैथ । इएह मलंगक नामसँ एहि स्थानक नाम मलंगवा रहल से विश्वास कएल जाइत अछि । (विह्वल धर्मेन्द्र, मिथिला मिथक, २०२४) । एहि महत्वपूर्ण स्थानकेँ मलंगवाक विकासऽक एक आधार बनाएल जा सकैत छलै मुदा नीतिनिर्मातालोकैनकैँ प्राथमिकतामे ई जगह नै पड़ल छैन ।

हम विगतमे एक दूबेर एहि पीठपर गेल छी । जिम्मेबार पक्षक उदासनिता ओहिना बुझबामे आओत । एहिबेर सेहो ओहिना बुझाएल, कोनो परिवर्तन नै । हम पत्रकार टंककेँ पुछलियैन, एहि स्थानक विकासक कोनो योजना नै छै ? ओ कहलैन, योजन बनेबाक समय ककरालग छै ? सम्बन्धित निकाय आ व्यक्तिकेँ राजनीतिक हिसाबकिताब सँ फुर्सद होइन तखन ने ?
जिलाक दोसर महत्वपूर्ण जगहऽक रुपमे स्थापित छैथ सर्लहिया देवी । जिलाक परिचय सँ जुड़ल ई जगह सेहो नीतिनिर्माताक प्राथमिकतामे नै अइछ । एहि जिलाक नाम सर्लहिया देवीक नामपर पड़ल बात मानल जाइत अछि । नवलपुरसँ मलंगवा जेबाक सड़क खण्डमे सलेमपुर नामक स्थान पडैÞ छै । सलेमपुरसँ करिव दश किलोमिटर पश्चिममे पडैÞत अइछ हेमपुर आ इएह हेमपुरमे सर्लहिया देवीक मन्दिर अइछ । (विह्वल धर्मेन्द्र, मिथिला मिथक २०२४) ।

स्थानीय मान्यताअनुसार एहि ठाममे विगतमे पैघ जंगल रहैक । एक दिन एकटा किसान ओहि जंगल भऽ कऽ कतौक लेल यात्रा कऽ रहल छल आ थाइक कऽ ओहि जंगलक एक ठाम विश्राम करबालेल पइड़रहल । किसान निन्न पइड़गेल । निन्द्रामे ओकरा एकटा देवी दर्शन दैत स्वयं सर्लहिया देवी होबाक बात कहलखिन । देवी सपनामे किसानकेँ एक ठामक जानकारी करबैत ओतऽ अपन मूर्ती गड़ल होबाक जनतब देलखिन आ ओतऽ उत्खनन कऽ मूर्ती स्थापित करबाक आदेश देलखिन । सपना देखितहि निन्द्रा सँ जागल किसान देवीक कहलाहा स्थानमे जा खनलकऽ तँ ओतऽ ठीके एकटा मूर्ती भेटलैक । ओ मूर्ती ओतहि स्थापित कऽ एक मन्दिरक निर्माण कएल गेल । ई मन्दिरसँ जुड़ल दोसर जन–विश्वाससेहो ई अछि जे सूर्योदयक बाद उक्त मन्दिर जाएब वर्जित अछि ।
यात्राक क्रममे टंक आ ओमप्रकाशक सँग निरन्तर रहए आ ओसभ सर्लाहीक सम्बन्धमे हमरा लगातार आवश्यक जानकारी दऽ रहल छलैथ ।
(राष्ट्रिय समाचार समितिक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा, पत्रकारिता, साहित्य एवम् समसामयिक विषयसबमे सशक्त रुपमे कलम चलबैत आइब रहल छइथ ।)





