जापानिज इन्सेफ्लाइटिससँ अइ साल ३५ गोटेक मृत्यु


काठमाण्डू, ८ पुसः जापानिज इन्सेफ्लाइटिसके सङ्क्रमणसँ अइ साल ३५ गोटेक मृत्यु भेल अइछ ।

स्वास्थ्य सेवा विभागक परिवार कल्याण महाशाखाअन्तर्गतके बाल स्वास्थ्य तथा खोप शाखाके प्रमुख डा. अभियान गौतमके कहब अनुसार १ सओ ७९ गोटेमे जापानिज इन्सेफ्लाइटिसके सङ्क्रमण पुष्टि भेल छल ।

अइ साल जापानिज इन्सेफ्लाइटिसके एक हजार ७ सओ ३९ गोटे शंकास्पद बेमारीके परीक्षण कएल गेल ओ बतौलैन ।

बितल साल सन् २०२४ मे २५ गोटेके जापानिज इन्सेफ्लाइटिसके कारण मृत्यु भेल छल । प्रत्येक साल जापानिज इन्सेफ्लाइटिससँ मृत्यु होएबलाके सङ्ख्या बइढ़ रहल ओ बतौलैन । बितल साल ८६ गोटेमे जापानिज इन्सेफ्लाइटिसके सङ्क्रमण पुष्टि भेल छल ।

सन् २०१४ मे चाइर गोटे, सन् २०१७ मे एक गोटे आ सन् २०२३ मे सात गोटेके जापानिज इन्सेफ्लाइटिसके कारण मृत्यु भेल छल ।

डा.गौतमके कहब अनुसार अइ साल तीन सालके उमेरसँ ल क ८९ वर्षधैरके व्यक्तिमे जापानिज इन्सेफ्लाइटिसके सङ्क्रमण पुष्टि भेल छल । जापानिज इन्सेफ्लाइटिसके कारण २८ जिला उच्च जोखिममे अइछ ।

मृत्यु होएबला अधिकांश ४० वर्षसँ उपरके व्यक्ति अइछ । मृत्यु भेलमध्ये नौ प्रतिशत खोप लगौने तथा अन्य खोप नै लगौने रहल ओ बतौलैन । जाड़ बढ़लाक कारण आब जापानिज इन्सेफ्लाइटिसके सङ्क्रमण कम होबाक ओ बतौलैन ।

ई रोग विशेष क साओनसँ कातिक महिनाधैर बेसी लागैत अइछ । नेपालमे ८२ प्रतिशत बालबालिकाकेँ जापानिज इन्सेफ्लाइटिस विरुद्धक खोप लगाएल गेल अइछ ।

जापानिज इन्सेफ्लाइटिस ‘क्युलेक्स’ प्रजाइतक मच्छरके कटलासँ लागैबला एक प्रकारक गम्भीर रोग अइछ । ई मच्छर साँझ तथा भोरक समयमे बेसी सक्रिय होइत अइछ । धान खेत, दलदल आ पाइन जमैबला स्थान मच्छरके प्रजनन स्थल भेलासँ एहन क्षेत्रमे सङ्क्रमणके जोखिम बेसी होइत अइछ । नेपालमे सन् १९७८ मे पहिल बेर रुपन्देही जिलामे जापानिज इन्सेफ्लाइटिस पुष्टि भेल छल । (रासस)

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