डॉ शेफालिका वर्मा
प्रतिदिन गृहस्थीक हिसाब
लिखैत लिखैत
नून तेल जोड़ैत जोड़ैत
आय हम अपनहि जिनगीक
लेखा जोखा कर’ बैसि गेलौं
अपनहि मोन केर गणित
सोझराव’ लागलौं
की भेटल की हेरायल
जिनगी भरि तँ भावनाक
व्यापार करैत रहलौं
नफा नोकसान सोचने बिनु
हृदयक समस्त पूंजी दांव पर
लगाय देलौं
आय ओझराय गेलौं अपनहि भावनाक
जाल में
जोड़ घटाव भाग में !!
सारहीन लाग’ लागल
जीवनक सब तत्व
चिन्हार चेहरा अनचिन्हार भ गेल
ठोर पर फाटल दूध सन हँसी
आबि गेल
अन्तरक कोनो कोन
लहलहुआन भ’ गेल—————–
विप्रलब्धा सँ ,,





