भूमि आयोगमे जग्गा प्राप्तिके लेल ११ लाखके निवेदन


काठमाण्डू, १० फागुनः राष्ट्रिय भूमि आयोगमे जग्गा प्राप्तिके लेल निवेदन दर्ता करैबला ‘भूमिहीन दलित’, ‘भूमिहीन सुकुम्वासी’, ‘अव्यवस्थित बसोबासी’ के सङ्ख्या ११ लाख पहुँचल अइछ । जग्गा माँग करैबलामे भूमिहीन दलित आ भूमिहीन सुकुम्वासी तीन लाख आ अव्यवस्थित बसोबासी आठ लाख रहल आयोग जनौलक अइछ ।

आयोगक विज्ञ सदस्य टेक बहादुर शाह एकद्वार प्रणालीसँ लगत सङ्कलनके लेल स्थानीय तहसँ समवंय आ सहकार्य कएल गेल जानकारी देलैन । आयोग मातहतके जिला समिति, सम्बन्धित पालिका तथा वाडसँ समवंय करैत सबके प्रमाणीकरण करबाक ओ बतौलैन । भूमिहीन सुकुम्वासीके व्यवस्थापन राज्यक दायित्व भेलासँ लगत सङ्कलन सुरु कएल गेल हुनक कहब छैन ।

भूमिहीन सुकुम्वासी तथा अव्यवस्थित बसोबासीके सिफारिस करबाक क्रममे स्थानीय तह नीकसँ अध्ययन तथा मापदण्डके प्रक्रिया पूरा कएलाक बाद मालपोत कार्यालयमे जमीन अइछ की नइ ओइके लगत परीक्षण कएल जाएत से विज्ञ सदस्य शाह उल्लेख केलैन । ई प्रक्रिया पूरा कएने भूमिहीन सुकुम्बासीकेँ आयोग मातहतके जिला समिति लालपूर्जाके लेल भूमि, सहकारी तथा गरिबी निवारण मन्त्रालयलमे सिफारिस करत सेहो ओ जानकारी देलैन ।

निवेदन दर्ता कएने भूमिहीन सुकुम्बासी तथा अव्यवस्थित बसोबासी परिवारके प्रमाणीकरणक लेल आयोग स्थानीय तहसँ समवंयमे काज क रहल जनौलक अइछ । “ओकरासभकेँ व्यवस्थापन करबाक क्रममे जंगल तथा सार्वजनिकस्थल, सांस्कृतिक सम्पदालगायत अतिक्रमण क बनाएल गेल बस्ती नै देल जाएत । भूमिहीन सुकुम्बासीके अर्थ देशर्भर कोनो ठाम जमीन नै भेल परिवार तथा परिवारक आयआर्जन, स्रोत या प्रयाससँ जग्गाके प्रबन्ध करबाक लेल असमर्थ व्यक्ति आ निजप्रति आश्रित परिवारक सदस्यकेँ परिभाषित करैत छै”, विज्ञ सदस्य शाह कहलैन ।

‘भूमिहीन दलित’ राष्ट्रिय दलित आयोगद्वारा दलितक सूचीमे सूचीकृत समुदायक भूमिहीन सुकुम्बासीकेँ मानल गेल अइछ । सुकुम्बासी व्यवस्थापनक क्रममे ‘भूमिहीन दलित’केँ प्राथमिकतामे राखबाक आयोग जनौलक अइछ । रासस

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