दशक पहिने खुला दिसामुक्त घोषणा, मुसहर बस्ती अखनो शौचालयविहीन


जनकपुरधाम, ९ अखारः नेपालकेँ खुला दिसामुक्त राष्ट्र घोषणा कएल गेल करिब आठ साल बितलाक बादो धनुषाके एकटा मुसहर बस्तीके स्थानीय अखनो खुला स्थानमे शौच करबाक लेल बाध्य अइछ । सरकारक खुला दिसामुक्त अभियान आ सरसफाइ क्षेत्रमे कएल गेल लगानीके बाबजुद धनुषाके सहिदनगर नगरपालिका–५ स्थित पचहर्वा मुसहर बस्तीके अधिकांश परिवार खुला स्थानमे शौच करबाक लेल बाध्य अइछ ।

बस्तीके उर्मिला सदाके लेल खुला स्थानमे शौच करब दैनिक जीवनके बाध्यता अइछ । घरमे शौचालय नै भेलासँ ओ राइत या भोर अन्हारमे शौच करबाक लेल खेतदिस जाइत छैन । “खुला स्थानमे शौच कएलापर लाज लागैत अइछ । खेतके मालिक बेइज्जत सेहो करैत छै”, ओ कहलैन, “ई समस्या महिलाके लेल आओर जटिल बनल छै ।”

एक सओसँ बेसी घर रहल उक्त बस्तीमे तीनटा घरमे मात्रे शौचालय अइछ । बाँकी परिवार सालोसँ खेतबारी, बाँसक झारी आ सड़क कातमे दिसापिसाब करैत आएल अइछ । उक्त वाडकेँ २०७५ सालमे खुला दिसामुक्त घोषणा कएल गेल छल । मुदा, दलित समुदायक ई बस्ती सरसफाइ सुविधाके पहुँचसँ दूर अइछ ।

स्थानीय शोभेन्द्र सदाके कहब अनुसार बस्तीमे करिब ३ सओ ७० गोटेके बसोबास अइछ । वृद्धवृद्धा, महिला, पुरुष आ बालबालिका सेहो खुला स्थानमे शौच करबाक लेल बाध्य अइछ । किछ परिवार लग शौचालय निर्माणक लेल आवश्यक जग्गा नै अइछ, तँ किछ आर्थिक अभावक कारण निर्माण नै क सकल स्थानीय परमदेवी सदाके कहब छैन । किछ परिवार सरकारी सहयोगके आशामे शौचालय निर्माण नै कएने ओ बतौलैन ।

परमदेवीके कहब अनुसार महिला राइतमे पुरुष सुतलाक बाद या भोरमे इजोत हुअसँ पहिने खेतदिस जेबाक लेल बाध्य अइछ । “खुला स्थानमे साँप तथा विषालु किराके डर रहैत छै, कियो देखत की सेहो चिन्ता रहैत छै”, ओ कहलैन, “वर्षाक समयमे खेत डुबान भेलापर समस्या आओर गम्भीर भ जाइत छै ।”

उक्त बस्तीके अधिकांश परिवार सुकुमवासी अइछ । हुनकासभ लग पर्याप्त जग्गा नै अइछ, नै शौचालय निर्माण करबाक लेल आवश्यक आर्थिक स्रोत । बसोबास क रहल छोट घरबाहेक अन्य जग्गा नै भेलासँ ओइ बस्तीके स्थानीय दोसरके खेतबारीमे निर्भर होबाक अवस्था अइछ । अइसँ सरसफाइ मात्रे नै, मानव मर्यादा आ सुरक्षासँ सम्बन्धित प्रश्न उठल स्थानीय रामदयाल सदाके कहब छैन ।

रामदयालके कहब अनुसार खुला दिसापिसाबके कारण बस्ती लगपासके वातावरण दुर्गन्धिन भ रहल अइछ । “शौचालय अभावक कारण पेटझरी, आउँ, टाइफाइडलगायत रोगके जोखिम बढ़ल छै”, ओ कहलैन, “सरसफाइके कमीसँ बालबालिका आ वृद्धवृद्धा बेसी प्रभावित होइत छै ।”

हरवाचरवा अधिकार मञ्चके केन्द्रीय सचिव रामदयाल सदाके कहब अनुसार सहिदनगर नगरपालिकामे मात्रे एक हजारसँ बेसी परिवार शौचालयविहीन अइछ । धनुषाके सबैला नगरपालिका, विदेह नगरपालिका, मिथिला विहारी नगरपालिका तथा क्षीरेश्वरनाथ नगरपालिकालगायत स्थानीय तहके विपन्न बस्तीमे अखनो शौचालयके समस्या रहल हुनक कहब छैन ।

नेपालकेँ २०७५ सालमे खुला दिसामुक्त राष्ट्र घोषणा कएल गेल छल । ओइ समय नेपाल दक्षिण एसियाके पहिल खुला दिसामुक्त राष्ट्र बनल दाबी कएल गेल छल । मुदा, पचहर्वा मुसहर बस्तीके यथार्थसँ घोषणाके प्रभावकारितापर प्रश्न उठौने अइछ । सरसफाइ अभियानक नामपर अरबो टका खर्च भेलाक बादो विपन्न, दलित आ सुकुमवासी समुदायधैर आधारभूत सुविधा नै पहुँचब चुनौतीके रूपमे देखाएल सहिदनगर नगरपालिकाके स्थानीय युवा कमलेश यादव बतौलैन । विपन्न दलित समुदायक आधारभूत सरसफाइके अधिकार सुनिश्चित नै भेलाधैर खुला दिसामुक्त राष्ट्रके उपलब्धी पूर्ण रूपमे सार्थक नै होबाक हुनक कहब छैन । (रासस)

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