रोशन जनकपुरी

रोशन जनकपुरी
चलू खोजैछी नवका वर्ष ,
नया कलेवरमे
पुरने वर्ष अइछ
आइब रहल ,
पुरने गीत अइछ
गाइब रहल ।
चलू खोजैछी नवका वर्ष ।
केओ अइछ फँक्का
फाँइक रहल ,
केओ मुर्गा अइछ
चाइभ रहल ,
कोना कहू अइछ
नवका वर्ष
इहो हमरे अइछ
दाइब रहल ।
चलू खोजैछी नवका वर्ष ।
चलू खोजैछी
नवका वर्ष,
लुकझुक अन्हारके
कोरा बैसल लाली जे
सुरुजक पराती
गाइब रहल ,
नया कलेवरमे
आएल ई पुरना वर्ष
अइछ पुरने राग
सुनाइब रहल,
चलू खोजैछी नवका वर्ष,
टप टप स्वेदसिक्त
जे धरतीमे
जीवनगीत सुनाइब रहल,
चलू खोजैछी नवका वर्ष ।
Cover Image: Ai Generated





