मिथिला दलान
धर्मेन्द्र विह्वल
हम तहिया कलेजऽक विद्यार्थी नै रही । शायद ४०÷४१ साल पहिनेक कोनो महिना (स्मरण नै अइछ) । हम पहिलबेर मटिहानीक यात्रा केने रही से हमरा एखन मोन पड़ैए । तहिया हम पत्रकारितामे प्रवेश नै केने छलौं । जनकपुरऽक हमर पड़ोसी परमादरणीय डा रोहिणीबल्लभ शर्मा पोखरेल मटिहानीस्थित याज्ञवलक्य लक्ष्मीनारायण विद्यापीठमे अध्यापन करैत छलैथ । संस्कृत आ नेपाली साहित्यक आधिकारिक विद्वान डा पोखरेल मैथिलीक सेहो विशिष्ट जानकार छलैथ । ओ जा जीवित छलैथ हमरा हुनकर सान्निध्यक अवसरि प्राप्त होइत रहल । बहुतकिछु ज्ञान प्राप्त भेल अइछ हुनका सँ । उएह यात्रामे कोनो सन्दर्भमे हम मटिहानी जा हुनका सँ भेट केने छी से हमरा स्मरण अइछ, तकरबाद तँ हम कएकबेर एतऽ गेलौं स्मरण नै अइछ ।
जनकपुरसँ सटले प्रसिद्ध मटिहानी नगरमे देखिते–देखिते आमूल परिवर्तन आएल छै । एतौका परिवर्तनऽक हम निरन्तरऽक साक्षी छी । जनकपुरमे कलेज पढ़ैतकाल हम मटिहानी अनेक प्रयोजनार्थ अनेकबेर गेल छी । भारतऽक मधुवनी, दरभंगा जेबालेल हुअए या मधवापुर भारतीय वजारमे जा कऽ आवश्यकताक सामाग्री खरीददारी करबालेल हुअए या विद्यार्थीकालीन राजनीतिक सहभागितालेल हुअए मटिहानी पहुँचबाक अनुभव हमरा अइछ ।
पछिलाबेर शायद २०८१ सालऽक जेठ÷अखाढ़के महिनामे एतऽ गेल रही । पत्रकारिता पृष्ठभूमिक अनुज हरिप्रसाद मण्डल मटिहानी नगरपालिकाक दोसरबेर मेयर निर्वाचित भऽ काज कऽ रहल छलैथ÷करै छैथ । नगरपालिकामे हुनकाद्वारा भेल काजऽक बारेमे सुनने रहियैक, देखबाक इच्छा छलए, सएह इच्छापूर्तिहेतु गेल रही । बेस प्रभावित भेल रही ।
मृतखनी अर्थात मटिहानीक अनेक महत्व
मिथिलामे मटिहानी स्थान विभिन्न कारण सँ चर्चित अइछ । एहि स्थानऽक सम्बन्ध रामायणकाल सँ छैक । रामायणकालीन किछु मिथकीय अवधारणा एहि स्थान सँ जुड़ल छै । किछु मिथकके बारेमे हम अपन पुस्तक मिथिला मिथिकमे चर्चा केने छी । तस्मैया बाबा, पीर बाबा, लक्ष्मीनारायण मठ, राम–जानकी विवाह प्रयोजनार्थ मटकोरहेतु माइटक प्रयोग आदि आदि अनेक सन्दर्भ जुडल अइछ एतऽ सँ । हम जहिया–जहिया एतऽ जाइत छी मोन–मस्तिष्क आ दृष्टिमे किछ’ नव तकबाक आकांक्षा जोड़ मारैत रहैए ।
जनविश्वास छै जे राम—जानकीक विवाहहेतु एक विशाल मण्डपऽक निर्माण जनकपुरमे करबाएल गेल छलै आ ओहिमे प्रयुक्त माइट एतैकेँ अर्थात मृतखनीक छैक । पर्यटकलोकैन जनकपुरऽक जानकी मन्दिर नजदिकमे निर्मित विवाहमण्डपकेँ वास्तविक बुझैत छैथ । मुदा ई प्रतिकात्मक मात्र अइछ । वास्तविक विवाह मण्डप जनकपुर उपमहानगरपालिकास्थित निचला पिड़ारी नामक जगहपर रहल विश्वास कएल जाइत छै । ई मण्डप मणि–मण्डपक नाम सँ प्रसिद्ध छै ।

मटकोरहेतु माइट खनल गेल ई स्थान कालान्तरमे मृतखनीक नाम सँ चिन्हल जाए लागल आ पाछाँकाल अपभ्रंश भऽ ई स्थान मटिहानी नाम सँ प्रसिद्ध भेल (मिथिला मिथक) । आइयो मटिहानीक एक पोखैर स्थानीय वासिन्दाबीच मृतखनी पोखैरऽक रुपमे चिन्हल जाइत छैक । मटिहानीमे प्रसिद्ध लक्ष्मीसागर नामक पोखैर आ लक्ष्मीनारायणके मन्दिर विद्यमान अइछ । हालके नेपालऽक मधेश प्रदेशमे अवस्थित महोत्तरी जिलामे पडऽबला मटिहानी धार्मिक–आध्यात्मिक आ शैक्षिक पर्यटनके दृष्टि सँ महत्त्वपूर्ण मानल जाइत अइछ ।
तस्मैया बाबा, मटिहानी मठ आ लक्ष्मीनारायण मन्दिर
एहि स्थानऽक दोसर परिचय स्थापित होइत अइछ तस्मैया बाबा आ लक्ष्मीनारायण मठ सँ । मिथिला प्राचीनकालहि सँ विभिन्न धार्मिक स्थल, मठ—मन्दिर, सरोवरसबहक कारण महिमा–मण्डित रहि आएल अइछ । मटिहानीमे एक प्रसिद्ध मठ छै, एकर स्थापना तस्मैया बाबाक अभिपे्ररणा सँ भेल विश्वास कएल जाइत अछि (मिथिला मिथक) ।
ई मठ वैष्णव सम्प्रदायक हिन्दूसबहक पावन आश्रम मानल जाइत अइछ । ई वैष्णव मठ नेपालेक एक महत्वपूर्ण मठके रुपमे मान्यताप्राप्त अइछ । एकरा राजमठ अर्थात मठसबहक मठके रुपमे चिन्हल जाइत अइछ । मठके भितर लक्ष्मीनारायण मन्दिर छै । एहि मठके नेपाल आ भारतमे अपन विशिष्ट गरिमा आ महिमा रहल बात पत्रकार महासंघ महोत्तरीक अध्यक्ष महेश दास आ पत्रकार नागेन्द्र कर्ण जानकारी देलैन ।
मटिहानीक सम्बन्धमे एखन धैर छ सओ वर्षके आधिकारिक लिखित इतिहास उपलब्ध रहल जानकारी दैत पत्रकारद्वय दास आ कर्णक मोताबिक इस्वी सम्वत् १७५१ दिस एहि मठऽक स्थापना तपस्वी तस्मैया बाबाद्वारा भेल मानल जाइत अइछ । एहि मठऽक महन्थकेँ मानमहन्थ कहल जाइत छैन । जनकपुरऽक जानकी मन्दिर, राम मन्दिर, रत्नसागर मठ, बसहिया मठलगायतऽक मठसबहक महन्थकेँ पगरी देबाक अधिकार इएह मानमहन्थकेँ छैन ।

लक्ष्मीसरमे नहाइतकाल तस्मैया बाबाकेँ लक्ष्मीनारायणक मूर्ति भेटलैन आ तत्पश्चात विधिपूर्वक पूजापाठ कऽ तस्मैसहित भोग लगाएल गेल छल । लक्ष्मीनारायण मठ करिव १५ विघा क्षेत्रफलमे फैलल अइछ । उपलब्ध तथ्यअनुसार तत्कालीन मकवानपुरके राजा हेमकर्ण सेन लक्ष्मीनारायण मठकेँ एक हजार तीन सओ विघा जमिन दान केने रहैथ । पत्रकार महासंघ महोत्तरीक पूर्व अध्यक्ष कमलेश मण्डल पछिला समयमे अतिक्रमणऽक शीकार भऽ रहल एहि मठऽक जमिनमे सँ कते जमिन बाँकी छै ? खोजीक विषय रहल बात बतौलैन ।
एहि मठऽक मध्यमे भगवान लक्ष्मीनारायणके भव्य मन्दिर अवस्थित अइछ । मन्दिरऽक चारुकात भव्य महल प्रतीत होबऽबला दरवारके ढाँचामे कलात्मक शैलीक आकर्षक भवन । ई संरचना ककरो प्रभावित कऽ सकैत छै । एहि ठाम लक्ष्मीनारायण मठ, तस्मैया बाबाक मन्दिर, पीर बाबाक आश्रम आ मठकेँ आगाँमे लक्ष्मीनारायण सरोवर विद्यमान छै । एहि मठके भितर रहल तस्मैया बाबाक मन्दिरमे एखनो रात्रीविश्रामलेल दैनिक बिछाओन लगाओल जाइत छै । जनविश्वास छै जे भोरमे देखलापर ओ बिछाओन केओ सुइत कऽ उठलसन लगै छै ।
मटिहानी जेबाक अनेक रस्ता
मटिहानी अनेक रस्ते पहुँचल जा सकैत अइछ । भारतके रस्ता सँ मधवापुर होइत अथवा भिट्ठामोड़, वर्दीवास आ जनकपुर सँ कोनो रस्ते जलेश्वर आइब ओतऽ सँ आठ÷नओ किलोमिटरके दूरी तय कऽ कऽ मटिहानी वजार पहुँचल जा सकैत अइछ । महोतरीक पिपरा वजार सँ धीरापुरकेँ रस्ता आ सोहर्वाक रस्ता होइत तथा धनुषाक कोल्हुवा–तुलसियाही होइत सेहो मटिहानी पहुँचल जा सकैत अइछ । तहिना जनकपुरऽक माछ बजार होइत सेहो मटिहानी जेबाक रस्ता छै । पहिने रस्ता खराव होबाक कारणे यात्रामे समस्या रहैत छलैक मुदा एखन सब रस्ता नीक भेलाक कारणे एतऽ आएब जाएब सहज भऽगेल अइछ ।
जलेश्वरके रस्ते मटिहानी जा रहल छी तँ आहाकेँ जलेश्वरनाथ महादेवऽक दर्शनके अवसरि सेहो प्राप्त भऽ सकैए । महोत्तरी जिलामे अनेक शिवालयसब अइछ, एहि शिवालयसबमे सब सँ महत्वपूर्ण मानल जाइत अइछ जलेश्वरनाथ महादेव मन्दिर (मिथिला मिथक) । एहि मन्दिरमे शिवलिंग जलमे डुबल पाओल जाइत अइछ ।
प्राचीन जनकपुरऽक रक्षकमे सँ एक मानल जाएबला जलेश्वरनाथऽक उत्पतिक सम्बन्धमे यकिन तथ्य उपलब्ध नै अइछ, मुदा मिथिला महात्म्य, शिव, पदम, स्कन्द, बृहद विष्णु पूराणमे मात्र नै नेपाली समाजमे प्रचलित स्वस्थानी कथामे समेत एहि महादेव आ क्षेत्रक चर्चा अइछ । एहि सँ अनुमान लगाएल जाए सकैए जे ई स्थान अत्यन्त प्राचीन अइछ ।

शिवरात्री, महिनाक पहिल एवं तेसर सोम, श्रीपञ्चमी, श्रावणी, होलीलगायतऽक पर्वक समयमे करिब दस फिटभितर रहल जलेश्वर शिवलिंगक दर्शन कएल जा सकैए । पत्रकार राकेशप्रसाद चौधरीक अनुसार एतौका मूर्ती मानवनिर्मित नहि भऽ प्राकृतिक रहल आ स्वउत्पति भेल विश्वास अइछ । जलेश्वरनाथ महादेवऽक दर्शन कऽ आगाँ बढ़लाक बाद किछु दूरीपर अवस्थित अइछ प्रसिद्ध सुगा गाम । विद्वताक दृष्टिएँ एहि गामके नाम चर्चित रहल अइछ । नेपालऽक, शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, न्याय, साहित्य, अनुसन्धानऽक क्षेत्रमे ई गाम अपन फराक परिचय बनौने अइछ । सुगा सँ कनिए आगाँ आएत मटिहानी वजार ।
मखानसँग पर्यटन प्रवर्धन
मटिहानी आब पुरान वजारटा नै रहिगेल अइछ । एखन ई क्रमशः आधुनिकीकरणक रस्तामे अग्रसर अइछ आ एकर श्रेय जाइत छैन मेयर मण्डलकेँ । एहि नगरमे आब नीक आ व्यवस्थित वजार, वस्ती, रहबाक (धर्मशाला, नगरपालिका गेष्टहाउस, होटल आदि)व्यवस्था उपलब्ध अइछ । ओना विकासऽक आवश्यकता आ प्रक्रियाक अन्त कहिओ नै होइ छैक, एहि अवधारणाक अपवाद मटिहानी सेहो नै भऽ सकैए ।
पछिला समयमे पर्यटककेँ आकर्षित करबालेल नगरपालिका ‘चलू मटिहानी’ क अवधारणा कार्यान्वयनके प्रयत्न कऽ रहल अइछ, आ ई नारा काज कऽ रहल छैक । तस्मैया बाबाक खन्ती आ ओछाओनऽक संँगहि तीन सओ वर्ष पुरान राजकीय संस्कृत विद्यालय आ याज्ञवलक्य लक्ष्मीनारायण विद्यापीठ देखबालेल पर्यटक आब मटिहानी अबैत छैथ ।

स्थानीय सरकारद्वारा अपन पालिकाक प्रसिद्ध स्थानपर शुरू कएल गेल काज आ प्रचार–प्रसारऽक नारा आगन्तुकलोकैनकेँ मटिहानीदिसि क्रमशः आकर्षित कऽ रहल छै । पत्रकार महेश दास आ नागेन्द्र कर्णक अनुसार मेयर आ नगरपालिकाक संयोजनमे एतऽ आबऽबला अतिथिकँे लक्ष्मीनारायण मन्दिरमें प्रार्थना आ लक्ष्मीनारायण सागरमें आरती, मठ आ नेपालऽक सब सँ पुरान गुरुकूलकँे भ्रमण अवलोकनऽक अवसरि उपलब्ध कराओल जाइत अइछ ।
पत्रकार दासके मोताबिक एकरा सँगसँंग स्थानीय उत्पादन मखानऽक सँग अतिथिकेँ विदाई कएल जाइत अइछ । पछिला दिनमे स्थानीय नगरपािलका मखानके प्रवद्र्धन कऽ स्थानीय आर्थिक गतिविधिकेँ तीव्र बनेबाक योजनापर काज कऽ रहल अइछ । राससके पत्रकार गोपाल वराल कहैत छैथ, नगरपालिकाक एहि प्रयास सँ मटिहानीक प्रसिद्धि आओर बढ़Þल अइछ आ एतऽ आबऽबला आगन्तुकऽक संख्या दिनप्रतिदिन बइढ़ रहÞल अइछ ।

एहि सबहक अतिरिक्त मटिहानीमें प्रतापी थान मन्दिर, राघो बाबा मन्दिर, राजा सलहेशके ंमन्दिर सेहो महत्वपूर्णं अइछ । स्थानीय लोकऽक मोताबिक पछिला समयमे वजारमे बनल घड़ी टावर, जलेश्वर–मटिहानी रोड आ मटिहानी–जनकपुर रोडपर निर्मित प्रवेशद्वार, आधुनिक गेस्टहाउस, लक्ष्मीसरमें सुरम्य घाट आ आकर्षक पक्का बाड़, लक्ष्मीनारायण मठके सामने बनल भव्य दूर्गा ंमन्दिरलगायतके संरचना मटिहानीके नव परिचय प्रदान कऽ रहल अइछ । ५१ फीट ऊँचाईक घड़ी टावरपर चइढ कऽ देखलाबाद मटिहानी शहरऽक मनोरम दृश्यके आनन्ंदटा नै बल्कि पड़Þोसी भारतीय मधवापुर बजारऽक मनोरम दृश्य सेहो देखि सकैत छी । स्थानीय विद्यापीठके उपप्राध्यापक मैथिली अभियानी जितेन्द्र झा पछिला दिनमे नगरक्षेत्रमे निर्मित भौतिक संरचनाक सम्बन्धमे टिप्पणी करैत कहैत छैथ, ई विकास संरचनाक माध्यम सँ मिथिला संस्कृति, परम्परा, आ स्थानीय पहिचानकँे आर मजबुत बनेबाक प्रयास कएल गेल अइछ ।
मिथिला परिक्रमाक विश्रामस्थल आ रावण दहन
मटिहानी बजार मिथिलाक माध्यमिक परिक्रमा सँ सेहो जुड़ल अछि । फागुन शुक्लपक्षमे जनकपुर सँ सुरु होबऽबला एक सओ ३३ किलोमिटरके धार्मिक पैदल यात्रा कएल जाएबला १५ दिनके मिथिला माध्यमिकी परिक्रमाक चारिम दिनऽक पड़ावस्थल मटिहानी होइत छै । दशमीक समयमे रावण दहन सेहो एतौका महत्वपूर्ण आकर्षण रहि आएल अइछ । बहुतो लोक ई आयोजन देखबालेल मटिहानी जाइत अइछ । हमहुँ एक÷दू बेर एहि आयोजनमे सहभागी भेल छी । .

मेयर मण्डलके कहब अइछ, ई नगर संस्कृत शिक्षाक अध्ययन केन्ंद्र आ संत परंम्परा सँ जुडल रहबाक सँगहि रामायणक विभिन्न सन्दर्भ सँ सेहो सम्बन्धित छै, एहि पृष्ठभूमीमे ई पहिचानसबकेँ आर मजबूत कऽ स्थाई बनौनाई जरुरी छै आ नगरपालिका ताहि उद्देश्य सँ काज कऽ रहल अइछ । मेयर मण्डल कहैत छैथ, मटिहानीक आध्यात्मिक सम्बन्ध जनकपुर, जलेश्वर आ भारत मधुवनीक विभिन्न जगह सँ रहल अवस्थामे एतौका विकासऽक एक महत्वपूर्ण आधार धार्मिक पर्यटन प्रवद्र्धन भऽ सकैत अइछ ।
मेयर मण्डल उपर्युक्त बातऽक जानकारी दैत कहलैन, एहि पालिकाक विकासहेतु पछिला दिनमे मटिहानी बाजार क्षेत्रकेँ ‘फ्री वाईफाई जोन’ बनाएल गेल अइछ । तहिना एतऽ शिक्षा, कृषि, रोजगारवृद्धि, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सड़क यातायात, भौतिक संरचना आदि विकास कार्यपर जोड़ देल गेल जानकारी दैत मेयर मण्डल आर्थिकरुपेँ समस्याग्रस्त वस्तीमे सामूहिक घर (बसघर) के निर्माण कएल गेल बतौलैन । पत्रकार महासंघ महोत्तरीक पूर्व अध्यक्ष कमलेश मण्डलके कहब छैन, नगरपािलकाक काज ठिके छै मुदा सफाई आ स्वच्छता प्रवद्र्धनके दिशामे आर काज हएब आवश्यक छै । पत्रकार मण्डल मानवीय विकासऽक दिशामे सेहो ठोस काज हएब आवश्यक बुझैत छैथ ।
तीन शताव्दी पुरान विद्यालय
आहाँ जँ मटिहानी जेबाक योजनमे छी तँ ओतऽके प्राचीन विद्यालयकेँ अवलोकन महत्वपूर्ण भऽ सकैत अइछ । राजकीय संस्कृत माध्यमिक विद्यालय बहुत पुरान विद्यालयके रुपमे चर्चित छै । मानल जाइत अइछ, तस्मैया बाबाक शिष्य जयकृष्ण दासद्वारा वि.सं.१७७५ मे संस्कृत पाठशालाक रुपमे ई विद्यालयक स्थापना कएल गेल रहए । बादमे एकर नाम परिवर्तन भेलै ।
हम जतेकबेर मटिहानी गेल छी प्रत्येकबेर ई विद्यालय जेबाक प्रयत्न करैत रहलौं अइछ । विद्यालयक व्यवस्थापनमे दिनराइत सक्रिय रहनिहार स्वयकेँ विद्यालयक चरवाहा घोषित केने प्राचार्य ईश्वरी पौडेल सँ हमर पुरान आत्मीय सम्बन्ध अइछ । विगतमे पौडेल पत्रकारितामे सक्रिय रहैथ आ पाछाँ पूर्णकालीन शिक्षककेँ रुपमे ई विद्यालयमे संलग्न भेलैथ तथा एहि संस्थाक विकासमे स्वयंकेँ समर्पित कऽ देलैन । हम जहियाजहिया मटिहानी जाइत छी पौडेल सँ भेंट होइत अइछ । हिनकाद्वारा विद्यालयमे प्राप्त होबऽबला स्वागतभाव हमरा आह्लादित करैत अइछ । एकबेरके यात्रामे हम विद्यालयक एक कक्ष निर्माणक शीलान्यास सेहो केने छी से मोन पड़ैए ।

पौडेलके मोताविक गुरुकुलीय परम्परामे आधारित ई विद्यालयमे प्रारम्भेकाल सँ पाणिनी व्याकरणकेँ अध्ययन–अध्यापन होइत आएल अइछ । जयकृष्ण दासके बाद हुनकर शिष्य बनमाली दासके समयमे विद्यालयमे अध्ययनरत विद्यार्थीमध्य १०८ गोटेकेँ भोजनऽक व्यवस्था कएल गेलै । पोडेल जानकारी दैत कहैत छैथ, विसं. १८०१ मे मकवानपुरके राजा हेमकर्ण सेन मटिहानीमे लक्ष्मीनारायण मठके स्थापना कऽ पर्याप्त मात्रामे जमिन उपलब्ध करौलैन । मुदा वर्तमानमे ई विद्यालय आर्थिक समस्या सँ ग्रस्त अइछ । गुरुकुलीय शिक्षामे धिरेधिरे आधुनिक विषयसब समावेश करैत शिक्षाकेँ आधुनिकता सँ जोडबाक प्रयत्न होइत आएल अइछ । एखन एहि विद्यालयमे ज्योतिष, न्याय, व्याकरण, वेद, साहित्यसहित अङ्ग्रेजी, गणित, विज्ञानसमेत पठनपाठन होबाक बात प्राचार्य पौडेल बतौलैन ।
पौडेलके अनुसार विगतमे ब्राह्मण वटुकमात्र पठनपाठन कऽ सकबाक व्यवस्था रहल एहि विद्यालयमे एखन सब जातजाइत, धर्म परम्पराक छात्रछात्रा अध्ययनरत अइछ । पौडेलके अनुसार विद्यालयमे हिन्दू परम्परासम्बद्ध विद्यार्थीसँगहि इस्लाम धर्म परम्परासम्बद्ध विद्यार्थीकेँ सेहो अध्ययन कऽ पेबाक स्वतन्त्रता छै ।

हम बेरबेरक यात्राक बातसब एतऽ स्मरणक आधारपर परसबाक प्रयास केलांैं । मुदा एकटा बात हम स्वीकार करऽ चाहब जे हम एखन धैर मटिहानीमे राइत नै बितौने छी । मोनमे तीव्र इच्छा अइछ जे दू राइत एतऽ रही आ मटिहानीकेँ देखी आ अध्ययन करी । देखै छियै कहिया अवसरि भेटैए ? कि भाइ मेयर ?
राष्ट्रिय समाचार समितिक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा, पत्रकारिता, साहित्य एवम् समसामयिक विषयसबमे सशक्त रुपमे कलम चलबैत आइब रहल छइथ । सं.
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