काठमाण्डू, २ भादबः ‘हिन्दूकुश हिमालय क्षेत्र’मे रहल देशसभक संसद बीच साझा धारणा, संवाद आ समन्वयकेँ लेल भ रहल ‘हिन्दूकुश हिमालय संसदीय बैसार’ आइसँ एत सुरू भ रहल अइछ । हिन्दूकुश क्षेत्रक देशसभक संसद बीच नीति तथा कानुन निर्माण आ दीर्घकालिन विकासमे ज्ञान, सीप तथा नवका धारणाकेँ आदान-प्रदान करबाक उद्देश्यसँ आयोजित ई बैसारक संयोजक सङ्घीय संसद, कृषि सहकारी तथा प्राकृतिक स्रोत समिति कएने अइछ ।
अन्तर्राष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केन्द्र (इसिमोड)क प्राविधिक सहयोगमे होएबला बैसारमे हिन्दूकुश हिमालय क्षेत्रक देशसभ नेपाल, भारत, चीन, बङ्गलादेश, भुटान, म्यानमार आ पाकिस्तानक संसदीय प्रतिनिधिक सहभागिता रहत ।
सङे, बैसारमे हिन्दूकुश हिमालय क्षेत्रमे रहल देशक जनप्रतिनिधि, संसदीय समितिक प्रमुख तथा प्रतिनिधि तथा जलवायु परिवर्तन, वायुप्रदूषण आ वातावरणक विषयसँ सम्बन्धित विज्ञक सहभागिता रहत । हिन्दूकुश हिमालय क्षेत्र जलवायु परिवर्तन, जैविक विविधताक क्षति आ प्रदूषणक प्रभावक सङे तीव्र सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनसँ विभिन्न सङ्कटक सामना क रहल अइछ । अइसँ पारिस्थितिक प्रणाली, प्राकृतिक स्रोत, जीविकोपार्जन आ मानव जीवनकेँ गम्भीर असर क रहल अइछ । ज्वलन्त पर्वतीय मुद्दाकेँ राष्ट्रिय, क्षेत्रीय आ विश्वव्यापी मञ्चमे साझा दृष्टिकोण, सक्रिय सहभागिता आ समुचित रूपसँ उठेबाक बैसारक सङ्कल्प अइछ ।
आयोजक समितिक संयोजक वीरबहादुर बलायर बतौलैन जे बैसार हिन्दूकुश क्षेत्रमे जलवायु परिवर्तन, वातावरण प्रदूषण आ जैविक विविधतामे भेल असर, जोखिम आ ओइ क्षेत्रक अवसरक बारेमे विस्तृत आ गहन बातचित होएत । हिन्दूकुश हिमालय एकटा जैविक विविधता आ सांस्कृतिक रूपसँ धनीक पर्वतीय क्षेत्र छियै, जे अफगानिस्तान, बङ्गलादेश, भुटान, चीन, भारत, म्यानमार, नेपाल आ पाकिस्तान क आठ देशमे पसरल अइछ ।
विश्वव्यापी जलवायु परिवर्तनक कारण हिमाली क्षेत्र तुलनात्मक रूपसँ उच्च जोखिममे अइछ । वैज्ञानिक अध्ययन अनुसार, हिमाली क्षेत्रक तापक्रम वृद्धि विश्वक औसत तापक्रमक तुलनामे ०.३ डिग्री सेल्सियससँ ०.७ डिग्री सेल्सियसधैर बेसी होबाक अनुमान कएल गेल अइछ । उच्च तापक्रम वृद्धिक कारण अइ क्षेत्रमे रहल हिमालक दू तिहाइ हिम भण्डार पघैल जाएत, से अनुमान विभिन्न अध्ययनमे उल्लेख अइछ । हिन्दूकुश क्षेत्रमे वातावरणीय आ सामाजिक-आर्थिक चुनौतीक बारेमे सांसदसभसँ बातचित करबाक आ सामूहिक रूपसँ सम्बोधन करबाक लेल क्षेत्रीय साझा मञ्चक कमी रहल अवस्थामे राष्ट्रिय, क्षेत्रीय आ अन्तर्राष्ट्रीय मञ्चपर पर्वतीय मुद्दाक लेल आओर प्रभावकारी रूपसँ वकालत करबामे ई कार्यक्रम सहयोगी होएत, से अपेक्षा कएल गेल अइछ । रासस





