नियात्रा : मिथिला दलान

धर्मेन्द्र विह्वल
राजविराजऽक प्रसिद्ध स्थानमे सँ एक अइछ नेता चौक अर्थात दशन चौक । दशन अर्थात मधेश आन्दोलनऽक शहीद । चितवनऽक भरतपुर सँ एतऽ अबैतअबैत साँझऽक करिव सात बाइज गेल रहए । आइ २०८२ सालऽक माघ महिनाक सातम् दिन । एतऽ एबामे हमर गाड़ीकेँ करिव दस घण्टा सँ बेसीकेँ समय व्यय करऽ पड़लै । भरतपुर सँ हेटौंड़ा, हेटौंडा सँ मदन भण्डारी मार्ग होइत सिन्धुली आ ओतऽ सँ भिमान, वर्र्दीवास होइत चोहर्वा आ सिरहा । सिरहा सँ हुलाकी सड़कपर ५५ किलोमीटरके यात्रा करैत राजविराज पहुँचल रही । सड़कसबहक हालैत नीक नै छै । यात्रामे समय बेसी व्यय होबाक इहो एक प्रमुख कारण । दोसर, हमर जनसम्पर्क सम्बोधनके प्रयास सेहो ।

ओना समय बेसी नै भेल रहै, साँझऽक साते तँ बाजल रहै । मुदा मौसमऽक प्रतिकूलताक कारणे अवस्था किछु भिन्न बुइझ पड़ै छलए । हमर गाड़ी नेता चौकमे स्थापित शहीद स्तम्भकेँ दहिना करैत हनुमाननगर रोडदिसि बइढ़ गेल । हमरा अन्नप्राशनके एक कार्यक्रममे सहभागी होबालेल कृष्णा पार्टी प्यालेस जाएब अनिवार्य । मुदा ई स्थान देखल नै रहए.। लोक सँ पुछैत आ गुगल सँ सम्पर्क करैत हमसभ गन्तव्यपर पहुँचलौं । मूल सड़केपर रहै हमरासभऽक गन्तव्य, बेसी ताकऽ नै पड़ल । समय आगाँ बइढ़रहल छलै, लागल शर्दऽक प्रभाव विस्तार भऽ रहल छै । ओना हम काठमाण्डू सँ आएल लोक शर्दऽक बड़ बेसी प्रभाव तँ नै अनुभव भेल मुदा शर्द तँ शर्दे छियै ने, ओ अपन असैर किछुओ तँ देखेबे करतै । यात्रामे हमरासँग रहैथ पुत्र आदित्येन्द्र । ओ गुगलके माध्यम सँ स्थानऽक खोजीमे रस्ताभैर लगातार सहयोग कऽ रहल छलैथ । हमरा नीक लागल जे गुगलमे राजविराजऽक नक्शा आ एतौका बारेमे आवश्यक सामान्य जानकारी आब उपलब्ध छै । गुगल सँ सहयोगप्राप्तिहेतु आहाँके प्रक्रिया सिख तँ पड़त । मुदा हमर समाज एखनो ई सिखबाहेतु कतेक तैयार अइछ ? ई अध्ययनके फराक विषय भऽ सकैए ।
राजदेवीक नगरी राजविराज

राजविराज नगरपालिकाक नाम प्राचीन राजदेवी मन्दिर सँ जुड़ल मानल जाइत छै । राजदेवी माता एहि भूमिमे विराजमान होबाक मान्यताअनुरूप एहि नगरपालिकाक नाम राजविराज राखल गेल अध्येता लेखक अजयकुमार झा जानकारी देलैन । किछु गोटेके कहब छैन जे एकर पुरान नाम राजपुर रहै । जँ एहि बातकेँ सेहो स्वीकार करी तँ इहो नाम राजदेवी भगवति सँ सम्बद्ध रहल मानल जा सकैए । राजविराजऽक अग्रज पत्रकार मुरलीप्रसाद यादवके मोताबिक ई नगरपालिका नेपालऽक आधुनिक इतिहासमे एक सक्रिय राजनीतिक शहरऽक रूपमे स्थापित रहैत आएल अइछ । नेपालऽक लोकतान्त्रिक आन्दोलन आ राजनीतिमे सदैत महत्वपूर्ण भूमिका रहल राजविराजऽक योगदान पछिला समयमे नेपालऽक चर्चित मधेश आन्दोलनऽक सन्दर्भमे सेहो रहल जगजाहिर छै ।
ई नेपालक तराई–मधेश क्षेत्रक पहिल आ नेपालऽक चारिम नगरपालिका रहल जानकारी पत्रकार अरूणकुमार यादव देलैन । वि.स. २०१६ सालमे एहि नगरकेँ नगरपालिका घोषणा कएल गेल रहै । ई नगर नेपालऽक मधेश प्रदेशक प्रसिद्ध सप्तरी जिलाक सदरमुकाम अर्थात मुख्यालय अइछ । पत्रकार अरूणके मोताविक ई एक ऐतिहासिक शहर मानल जाइत छै ।
नियोजितरूपेँ बनल पहिल नगर
एहि नगरकेँ नेपालऽक पहिल योजनाबद्ध (टाउन प्लानिङ) नगर होबाक प्रतिष्ठा प्राप्त छै । पहिने एहि जिलाक मुख्यालय हनुमानगर रहैक । मुदा वि.सं. १९९४ मे सप्तकोशी नदीक बाइढ़ आ कटान हनुमाननगरकेँे प्रभावित केलाक बाद मुख्यालयलेल दोसर उपयुक्त आ सुरक्षित स्थानऽक खोजी कएल गेल आ राजविराजकेँ मुख्यालय होबाक गौरव प्राप्त भेलै । लेखक अजयक मोताविक तात्कालीन बडाहाकिम प्रकाशशमशेर जबरा उपयुक्त स्थानऽक खोजी कऽ शहर बसेबाक जिम्मेवारी तहियाक ख्यातिप्राप्त इन्जिनीयर डिल्लीजंग थापाकेँ देलैन । इन्जिनीयर थापाक नेतृत्वमे गुलाबी शहरऽक रूपमे प्रसिद्ध भारतऽक जयपुरके नक्शाक आधारपर टाउन प्लानिङ्ग कऽ वि.स.ं १९९४÷९५ सँ निर्माण सुरू भेल आ १९९८ मे राजविराज नगर बसाएल गेल से मानल जाइत अइछ । अग्रज पत्रकार वैद्यनाथ झाक कहब छैन–जँ आहाँ ई नगरऽक यात्रा कऽ रहल छी तँ एकबेर एतौका नगर निर्माण संरचनाक अध्ययन अवश्य करी

पत्रकार झा कहैत छैथ–प्रारम्भिक चरणमे राजविराज शहरऽक योजना ६० बिघाक प्लटमे कएल गेल छलै । लेखक अजयक अनुसार एहि योजनामे मुख्य सडक, सहायक सडक, आवासीय तथा व्यावसायिक प्लटसब निर्धारित कएल गेल छलै । गुदडी, गल्लालाइन, कचहरी आदि स्थान सुनिश्चित कएल गेल छलै । पाछाँ सरकारी कार्यालय आ कर्मचारी आवासलेल १० बिघा जमिनमे आर शहरी क्षेत्र विस्तार कएल गेल दावी लेखक अजयके छैन ।
महेन्द्र राजमार्गक रूपनी सँ १० किलोमीटर, हुलाकी सडक खण्डऽक बर्साइन सँ १० किलोमीटर, भारदह सँ करिव १८ किलोमीटर आ भारतीय सीमा कुनौली सँ करिव ११ किलोमीटर के दूरीमे अवस्थित अइछ राजविराज । मैथिली साहित्य परिषदके पूर्व अध्यक्ष बौद्धिक व्यक्तित्व देवेन्द्र मिश्र राजविराजऽक बारेमे जानकारी दैत कहैत छैथ–ई नगर ऐतिहासिक दृष्टिएँ जतेक महत्वपूर्ण अइछ धार्मिक आ आध्यात्मिक दृष्टिएँ सेहो एकर ओतबए महत्व छै । राजदेवी मन्दिर एहि ठामऽक प्रसिद्ध शक्तिपीठ अइछ । तहिना करिव १० किलोमीटरक दूरीपर अवस्थित छिन्नमस्ता भगवती (सखड़ा) मन्दिर हिन्दू धर्मावलम्बीहेतु बहुत पैघ आस्थाक केन्द्र छैक । तहिना लगेक भारदहमे अवस्थित कंकालिनी मन्दिरऽक कारण सेहो राजविराजऽक प्रसिद्धिमे वृद्धि भेल अइछ ।
राजविराज सँ हमर विविध सम्बन्ध
राजविराज सँ हमर बहुत पुरान सम्बन्ध अइछ । हम एतऽ बरोबरि जाइत रहलौ अइछ । जहिया हम एसएलसी(मेट्रिक)सेहो नै पास केनै रही तहिये सँ ई नगरके हम देखिरहल छी । तहिया हमर पिताजी एतऽ नेपाल सरकारऽक जिला सहकारी अधिकारीके रूपमे कार्यरत रहैथ । पाछाँकाल संयोग एहन भेलै जे राजविराज सँ सटले तिलाठीमे हमर विवाह भेल आ किछु वर्ष पहिने हमर छोटकी धीयाक विवाह राजेविराजमे भेलै । एतबए नै पत्रकारिताक सम्बन्धमे सेहो एहि नगर सँ हमर विशेष सम्बन्ध रहि आएल अइछ । एहिबेर सरस्वती पुजा (माघ ९ गते)कऽ दिन हमर नाइत सात्विकऽक मुड़न छलै । एहिबेर राजविराज आगमनऽक एकटा प्रयोजन इहो छलए ।

करिव ४२ वर्ष सँ अधिक भऽ गेल हम राजविराजकेँ निरन्तर देखिरहल छी । एकटा बात निरन्तर कचोटैए– प्रचूर सम्भावना रहितो ई नगर आ जिलाकेँ अपेक्षित विकास नै भऽ सकलै । एतऽ राष्ट्रिय स्तरके नेता आ राजनाीतिकर्मीक कहिओ कमी नै रहलै, मुदा जाइन ने किए, विकास ककरो प्राथमिकतामे नै रहलै । सत्य पुछी तँ ४२ वर्ष पहिलुका आ आजुक नगरमे विकासऽक दृष्टिएँ खासे परिवर्तनऽक बोध नै होइत छै ।
घरऽक संख्या तँ बढ़ल छै मुदा लोकऽक पलायनकेँ नै रोकल जा सकलैए । किछु सड़क तँ बनल छै मुदा यातायातऽक क्षेत्र व्यवस्थित नै भऽ पाएल छै । पर्यटनकेँ अनन्त सम्भावना रहितो पर्यटककेँ आकर्षित कऽ सकबाक नीतिक नितान्त अभाव छै । विद्यालय आ कलेजऽक कमी तँ नै छै मुदा अध्ययनहेतु पैघ संख्यामे विद्यार्थीसभ जिला सँ बाहर जेबालेल बाध्य छै । स्थानीय स्तरमे श्रमिक, कच्चा पदार्थ आ सडक सञ्जालऽक सहज उपलब्धता रहितो उद्योग, कलकारखाना आ व्यवशायक अभावऽक कारणे रोजगारीक अवसरिक सिर्जना नै भऽ पाइबरहल छै ।
नगरकातमे रहल खाँड़ो आ नगरबीचमे रहल भलुवाही नदीक अवस्था ओहिना बुझाएल । कटान नियन्त्रण आ तटबन्ध सबदिनका मुद्दा छै एतऽ । हम जखन एहिबेर राजविराज एलौं, बुझाएल जे प्रतिनिधिसभाक निर्वाचनऽक रंग धीरेधीरे चइढ़रहल छलै । आशा करै छी, एहिबेरके निर्वाचनके माध्यमे उपर्युक्त मुद्दासब सम्बोधन प्राप्त करत ।
तिलाठीक सरस्वती पूजनोत्सव :
राजविराज आइब कऽ सासुर तिलाठी नै जाएब, ई कोना भऽ सकैए ? माघ ७ गतेके रातुक विश्राम हमरालोकैन ओतै केलौं । पत्नी मुन्नी मुड़नक तैयारीक सन्दर्भमे दू÷चाइर दिन पहिने आइबगेल रहैथ । नेपाल–भारत सीमाक नजदिक अवस्थित ई गाम तिलाठी–कोइलाड़ी गाउँपालिकाक केन्द्र अइछ । उत्तर सँ आबऽबला खाँडो नदी गामक पूव सँ आगाँ बढैत भारतदिसि जाइए । वर्षायाममे डुबान आ कटानऽक समस्याक कारण सेहो ई गाम चर्चामे रहैत अइछ । तिलाठी जेबाक रस्तामे एखन किछु सुधार बुइझ पड़ल । नीक पक्की सड़क छै । रस्तामे पड़ऽबला पुलसबहक स्तरोन्नति भेल छै । गामऽक सड़क–डगहरसबमे सेहो सुधार भेल बुझाएल । मुदा मोनमे एकटा प्रश्न अइछ–ई अवस्था कहिया धैर रहतै ?

भारतीय सीमा सँ सटल ई गाम सीमा सुरक्षाक दृष्टिएँ सेहो चर्चामे अबैत रहैत अइछ । स्थानीय वासिन्दालोकैन खाँड़ो नदीक समस्या आ सीमा सुरक्षाक सम्बन्धमे सबदिन आवाज बुलन्द करैत आएल छैथ । साहस देखबैत आएल छैथ । एहि हिसाबे किछु लोक एकरा ‘सजग गाम’ सेहो कहैत छैथ ।
मैथिल संस्कृति, परम्परा आ साहित्यक एक सशक्त केन्द्रक रूपमे स्थापित तिलाठी नेपालमे मैथिल ब्राम्हणक सम्भवतः सब सँ पैघ वस्ती मानल जाइत छै । एतऽ एखन सरस्वती पूजाक अवसरि छलै । आजुक नेपालमे सम्भवतः सब सँ पैघ स्तरमे सरस्वती पूजा इएह गाममे होइत छै । ई गाम नेपालऽक प्रशासन, राजनीति आ शिक्षा क्षेत्रमे पैघ योगदान पहुँचाबऽबला व्यक्तिसभऽक जन्मस्थानऽक रूपमे सेहो चिन्हल जाइत अइछ ।
ऐतिहासिकरूपेँ शिक्षा आ विद्वताक दृष्टिएँ प्रसिद्ध रहल ई गामऽक एकटा परिचय सरस्वती पूजनोत्सव सेहो छै । विगत सओ वर्ष सँ अधिक भेल हेतै, एतऽ भव्यतापूर्वक सरस्वती पूजा होइत आइबरहल छै । विराटनगरके कलेजमे भौतिकशास्त्र अध्यापन करबैत आइबरहल राजीव मिश्रक कहब छैन–त्रीचन्द्र संस्कृत विद्यालय (पाठशाला)कऽ समय सँ एतऽ ई पूजा होइत आइबरहल छै ।
विद्याक केन्द्र प्राचीन विद्यालय
हनुमाननगरस्थित माध्यमिक विद्यालय सँ अवकाशप्राप्त प्रधानाध्यापक मोतिनारायण मिश्रक मोताबिक एतऽ संस्कृत विद्यालय कहिया स्थापना भेलै तकर यकिन नै कएल जा सकै छै मुदा शायद राणाकालमे तात्कालीन राजा त्रीभुवन आ राणा शासक चन्द्रशमशेरके समयमे वि.सं. १९७५ (इ १९१८) के आसपास एहि विद्यालयक नामकरण त्रीचन्द्र संस्कृत पाठशाला कएल गेलै । स्मरणीय अइछ उच्च शिक्षाहेतु देशऽक सब सँ पुरान संस्था त्रीचन्द्र कलेजके स्थापना सेहो इएह समयावधिमे भेल छै । स्थानीय जानकारलोकैनकँे अनुसार ई पाठशाला एहि क्षेत्रक सब सँ पुरान शैक्षिक संस्था भऽ सकैए । तिलाठी–कोइलाडी गाउँपालिका वार्ड नम्बर १ के अध्यक्ष दिनेश्वर मिश्रक कहब छैन– विद्यालयके सम्बन्धमे अनुसन्धान आवश्यक छै । ओ कहैत छैथ–मुदा एकटा बात निश्चित जे ई विद्यालय एहि क्षेत्रमे शिक्षाक प्रसारमे महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह केने अइछ आ तकर सब सँ बेसी प्रभाव तिलाठी गामपर पड़लै । अधिवक्ता सुमनकुमार मिश्र कहैत छैथ– एहि विद्यालयक स्थापना कहिया भेल से तँ यकिनपूर्वक नै कहल जा सकै छै । मुदा एते निश्चय जे ई बहुत पुरान छै । ओ कहैत छैथ–सम्भव छै, एकर स्थापना मकवानपुर सेनकालीन राजाक समयमे भेल हुअए, तहिया नेपाल आ भारतके राजनीतिक अस्तित्व नै रहैक ।

महोत्तरीक मटिहानीमे वि.सं १७७५ मे सेनकालीन समयमे संस्कृत विद्यालयक स्थापना भेल मानल जाइत अइछ । सम्भव अइछ, तिलाठीक संस्कृत विद्यालय सेहो उएह समयमे स्थापित भेल हुअए । पूर्व प्रधानाध्यापक मिश्रक अनुसार, एहि पाठशालामे पहिने शास्त्री धैरके अध्ययन–अध्यापन होइत छलै । मुदा पाछाँकाल ई पाठशलाक अवस्था लचर होबऽ लगलै आ ६०÷६५ वर्ष पहिने एकरा सामान्य विद्यालयमे रूपान्तरण कएल गेलै । ओ जानकारी दैत कहलैन–करिव सओ वर्ष पहिने एहि विद्यालयक प्राचार्य रहैथ पं काशिनाथ ठाकुर । ओहि समयमे तिलाठी गाममे अगिलग्गीक घटना बहुत होइक । एहि समस्याक समाधानहेतु पं ठाकुर एकदिन गौवाँसभकेँ एकत्रित कऽ माता सरस्वतीक पूजनामेत्सव कएल जाए आ माता गामक रक्षा करथिन से उपाय सुझौलैन । तहिया सँ एहि गाममे विद्यालयक प्रागंणमे निरन्तर सरस्वतीक पुजा होइत आइबरहल छैक आ लोकऽक विश्वास छै जे तहिया सँ एहि गाममे अगिलग्गीक घटनामे कमी आएल छै ।
सरस्वती पूजामे भव्य मेला

एतऽ प्रत्येक वर्ष सरस्वतीक मूर्ती बनैत अइछ आ भव्य मेलाक आयोजन होइत अइछ । पछिला समयमे जतऽ बहुतो ठाममे मेलाप्रतिक आकर्षणमे कमी आइबरहल छै, तकर विपरित एहि गाममे मेलाप्रतिक आकर्षणमे निरन्तर वृद्धि भऽ रहल छै आ प्रत्येक वर्ष मेलाक भव्यता विस्तार भऽ रहल छै । सरस्वती पूजनोत्सवक अवसरिपर तिलाठी आबी आ पाठशाला जा मेलामे सहभागी नै होइ से केना भऽ सकैए । सरस्वती पूजाक दिन मध्यान्हकाल पितियौत सार शैलेशकेँ लऽ हमहुँ पाठशाला पहुँचलौ । सम्भवतः ई मेलामे हमर तेसरबेर सहभागिता रहए ।
हमरा बुझाएल जे मेलाक आयोजनमे बहुत परिवर्तन एलैए । आकार आ प्रकार बढलैए । आब मेला सप्ताहव्यापीरूपमे आयोजित होइत छै । गंगा आरती, विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुरुष आ महिला कुश्ती मेलाक खास आकर्षण छलै एहिबेर । नेपाल आ भारतऽक सीमावर्ती क्षेत्रक बहुतो श्रद्धालुक सहभागिता रहै छै मेलामे ।
एहिबेर । ई मेला पछिला दिनमे स्थानीय प्रतिभाक खोजी आ प्रवद्र्धनक माध्यम बनल अइछ । मैथिली गीत, संगीत आ नाटकऽक प्रवद्र्धन आ विकासक मार्गमे सेहो ई मेलाक आयोजन सहयोगीसिद्ध भऽ रहल छै । मुदा दोसर पक्ष सेहो छैक । मेलाक नामपर किछु विकृति सेहो अनुभव भेल । नशालु लागू पदार्थक उपलब्धता सहज भेलजकाँ लागल हमरा । हमरालग बेसी समय नै छलए । कनेकाल रहि ओतऽ सँ हम विदा भऽ गेलौं ।
देवी छिन्नमस्ताक शरण
नाइतके मुुड़नऽक दिन अर्थात सरस्वती पुजाक दिन भोरमे हमरालोकैन सखड़ा अर्थात छिन्नमस्ता भवगतीक मन्दिर गेल छलौं । राजविराजक नेता चोकसँ ११ किलोमीटर पश्चिममे अवस्थित ई मन्दिर मिथिला क्षेत्रक प्रसिद्ध स्थान मानल जाइत छै ।
सखड़ा गाममे स्थापित भेलाक कारणे ई देवी सखडेÞश्वरी नाम सँ सेहो चर्चित छैथ । केओ एहि मन्दिरमे स्थापित देवीकेँ छिन्नमस्ता कहि पूजा करैत छैथ तँ केओ एहि देवीकेँ महिषासुरमर्दिनी कहि विश्वास करैत छैथ । देवीक नाम जे हुअए स्थानीय वासिन्दाक अनुसार देवी अत्यन्त जागृत छैथ ।

ई मन्दिर स्थापनाक सन्दर्भमे एक मिथक (मिथिला मिथक ः धर्मेन्द्र विह्वल)प्रचलित अछि । ई क्षेत्र विगतमे मिथिला राज्यमे पडैÞत छल । हाल मन्दिर रहल क्षेत्र विगतमे घना जंगल छल । मिथिलाक राजा सकरसिंहकेँ एक राइत देवी सपनामे दर्शन देलखिन आ कहलखिन, ‘हम आहाँक राज्यमे विनामन्दिरक रहिरहल छी । आहाँ आऊ आ जंगल साफ कराऊ । ओतऽ पोखैर सेहो छै । ओहि पोखैरकेँ सेहो साफ करबाऊ । पोखैर साफ करैतकाल आहाँकेँ हमर मूर्तीलगायत आन किछु मूर्ती भेटत । ओतऽ मन्दिर बना मूर्ती स्थापित करू ।’ ई सपनाक बाद राजा तुरत्ते हाल मन्दिर रहल स्थानदिसि प्रस्थान केलैन । ठीके सकरसिंहकेँ जंगल आ पोखैर भेटलैन । जंगल आ पोखैर साफ करबऽबैतकाल देवीक मूख्य मूर्तीसहित अन्य मूर्ती भेटलैन । राजा सकरसिंहद्वारा स्थापित होबाक कारणे देवीक नामे सकरेश्वरी पइड़ गेलैन आ ई जगह सकरा नाम सँ चर्चित भेल । कालान्तरमे अपभ्रंश होइत देवीक नाम सखड़ेश्वरी आ स्थान सखड़ाक रूपमे चर्चित भेल । एखनुक आधुनिक मन्दिर निर्माण कार्यक प्रारम्भ तात्कालीन भारतीय रेल मन्त्री ललितकुमार मिश्रद्वारा भेल अइछ ।
नित्य वलिप्रदान आ फूलहेस
एहि मन्दिरमे सबदिन वलिप्रदान होइत छै । मुदा आश्चर्यक बात ई जे वलिप्रदान करबाकाल बहल शोणीतपर माछीलगायतऽक कोनो कीड़ा नै बैसैत छै (मिथिला मिथक ः धर्मेन्द्र विह्वल) । एतबए नै एहन शोणीत कपड़ापर पड़लाक बाद तकर दागो नै लगैत छै । छिन्नमस्ता भगवतीक कौवला केला सँ केहनो मनोकामना पूर्ण होबाक विश्वास छै । एहि सन्दर्भमे फूलहेसऽक (मिथिला मिथक ः धर्मेन्द्र विह्वल) महत्व अइछ । फूलहेसऽक सामान्य अर्थ होई छै भगवतीक मूर्तीपर चढ़ाएल फूल भक्तक सोझाँ प्रसादक रूपमे खसब ।

स्थानीयस्तरमे मान्यता अइछ कि, जखैन कोनो भक्त कोनो मनोकामना राइख देवीक प्रतिमासमक्ष करवद्ध भऽ प्रार्थना करैत अइछ तखैन देवी ओकर प्रार्थना स्वीकार कऽ अपन शरीर अर्थात मूर्तीपर चढ़ाओल गेल फूल खसबै छैथ आ प्रार्थना स्वीकार होबाक जनतब दैत छथिन । ई फूल भक्त प्रसादक रूपमे ग्रहण कऽ बड़ा जतनसँग रखैत छैथ । मान्यताअनुसार जखैन देवीक शरीर सँ फूल नै खसैत अइछ तँ देवी ओहि भक्तक प्रार्थना स्वीकार नै केलीह से मानल जाइत अइछ । मन्दिर जा कऽ फूलहेसऽक प्रक्रिया जँ देखी तँ आश्चर्यजनक अवस्था देखल जा सकैत अइछ । कोनो भक्तद्वारा चढ़ाएल गेल फूल देवीक मूर्ती सँ तत्काल खसैत देखल जा सकैए तँ कोनो भक्तद्वारा चढ़ाएल गेल फूल दिनभैर प्रतीक्षा केलाक बादो नै खसैत अइछ ।
मन्दिरक सोझाँ पँचविघवा पोखैर
सखड़ा मन्दिरऽक मुख्यद्वारके सामने एकटा पैघ पोखैर छै जे पाँच विघा क्षेत्रफलमे फैलल मानल जाइत छै । एहि पोखैर(मिथिला मिथक ः धर्मेन्द्र विह्वल)क सम्बन्धमे स्थानीय स्तरमे एक मिथक प्रचारित अइछ । ई पोखैरके सम्बन्ध प्रसिद्ध सखडेÞश्वरी मन्दिर सँ अइछ । एहि मन्दिरक मूर्ती जते प्राचीन छै ई पोखैर सेहो ओतबए प्राचीन मानल जाइत छै ।

एहि पोखैरक बारेमे एक मान्यता छै, केहनो अकाल आ रौदीक अवस्थामे सेहो ई पोखैर नै सुखाई छै । स्थानीय विश्वासअनुसार देवीकेँ इएह पोखैरके जल चढैत छैन तएँ पोखैर नै सुखाइत छै । पोखैरक जल अत्यन्त पवित्र मानल जाइत छै । एहि मन्दिरमे वर्षभैर वलिप्रदान होइत छै ।
सब वलिक शोणीत इएह पोखैरमे जाइत छै मुदा पोखैरक पाइनक रंग आ स्वरूपमे कोनो परिवर्तन नै अबैत छै ।
राजविराजस्थित घरमे मुडन संस्कार सम्पन्न भेलाक बाद एहि मन्दिरमे सेहो मुडनऽक औपचारिकता निर्वाह कएल जेबाक छलै । कएल गेलै । बड़ा नीक सँ सब काज सम्पन्न भेलै । भगवति सदैत कृपा बनौने रहथुन । करिव दू घण्टा बिता कऽ हमरालोकैन ओत सँ विदा भेलौं ।
एहिबेरूक हमर यात्रा आब करिवकरिव सम्पन्न भऽ गेल छलए । बौवाकेँ कूलदेवऽकेँ गोड़ लगेबाहेतु धीया शीवार्ती आ ओझाजी (दीपककुमार झा) अपन गाम गोविन्दपुर गेलैथ । ओ सब गाम सँ घुरलाक बाद हमरालोकैनकेँ राजविराज जेबाक छलए । हम आ सरबेटा मिहिर मन्दिरऽक पुवरिया गेटपर रहल एकटा चाय दोकानपर विश्राम कऽ हुनकासभकेँ बाट जोहैत चाह पिबऽ लगलौं । किछुकालक प्रतिक्षाक बाद हुनका सभक आगमन भेल । हम सभगोटा गन्तब्य राजविराजदिस प्रस्थान कएलौँ ।
(राष्ट्रिय समाचार समितिकक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा, पत्रकारिता, साहित्य एवम् समसामयिक विषयसबमे सशक्त रुपमे कलम चलबैत आइब रहल छइथ ।) -सं.





