काठमाण्डू, ३ जेठः सरोकारवाला सबहक अनुसार जलवायु परिवर्तनके कारण हिमाली क्षेत्रमे जोखिम अत्यधिक रूपसँ बइढ़ रहल अइछ। शुक्रदिनसँ शुरू भेल सगरमाथा संवादक दोसर दिन ‘हिमाली क्षेत्रक जोखिम आ मूल्याङ्कन’ विषयपर भेल समानान्तर सत्रमे, विशेषज्ञसभ कहलैन जे जलवायु परिवर्तनक असर कम करबाक उपाय अवलम्बन नै कएलासँ हिमाली क्षेत्रमे बसोबास कएनिहार लोककेँ आओर बेसी जोखिम छै ।
चीनके विज्ञान प्रतिष्ठानक निर्देशक डा. टाओ वाङ कहलैन जे विश्वभैर तापमान बढ़लाक कारण हिमाली क्षेत्रमे गहिर असर भेल अइछ। स्वीट्जरल्याण्डक ज्युरिक विश्वविद्यालयक वरिष्ठ अनुसन्धान सहयोगी डा. साइमन एलन कहलैन जे जलवायु परिवर्तनक असरसँ बचबाक लेल स्थानीय स्तरमे क्षमता विकास आवश्यक अइछ।
क्यानडाक बिजिजी इञ्जिनियरिङ इन्कक वरिष्ठ भू–वैज्ञानिक इञ्जिनियर एमिली मार्क कहलैन जे जलवायु परिवर्तनक असर वातावरणीय प्रणाली आ विकास दुनूपर नकारात्मक प्रभाव पहुँचल अइछ।
जापानक केइयो विश्वविद्यालयक प्रोफेसर राजीव शाँ कहलैन “विश्वव्यापी चुनौतीसभकेँ समाधान करबाक लेल स्थानीयसँ ल क वैश्विक स्तरधैर सहयोग आ विविधता जरूरी छै।”
जर्मनीके भू–विज्ञान अनुसन्धान केन्द्रक प्रमुख डा. निल्स होभिअइ कहलैन “जलवायु अनुकूलनक लेल प्राकृतिक प्रकोपसभके पूर्वानुमान प्रणाली विकास, जलवायु परिवर्तनके असरमे निगरानी आ वातावरणीय दिगोपनक उपाय जरुरी अइछ।”
ओसभ कहलैन जे पहाड़ आ हिमाली क्षेत्र पृथ्वीक सबसँ गतिशील आ नाजुक प्रणालीमे अबैत छै, आ एहन क्षेत्र भुस्खलन, बाढ़ि, हिमताल विस्फोट आ हिम भुस्खलन जकाँ श्रृंखलाबद्ध प्रकोपक जोखिममे लगातार बेसी संवेदनशील भ रहल अइछ।
वैज्ञानिकसभक कहब अइछ जे जलवायु परिवर्तन एहि जोखिमसभकेँ आओरो तेज बना रहल छै, जे पहाड़ी क्षेत्रके पूर्वाधार, समुदायक जीवन आ जीविकोपार्जन सङे निचला क्षेत्रमे बसोबास कएनिहार अरबौं लोककेँ खतरा भ सकैत अइछ।
जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी अन्तरसरकारी प्यानलक छठम् मूल्याङ्कन प्रतिवेदन (२०२३) अनुसार, पृथ्वी क तापमान यदि २ डिग्री सेल्सिअइ बढैत छै तँ अधिकांश पहाड़ी क्षेत्रमे कमसँ कम मध्यम स्तरके जोखिम अबै छै, आ किछु क्षेत्रमे तँ उच्च जोखिम सेहो देखेने छै। रिपोर्ट अनुसार भविष्यमे एहन जोखिम आ जलचक्रमे परिवर्तनक कारण दीर्घकालिन विकासक लेल पहाड़ी जोखिमके मूल्याङ्कन आ निगरानी अनिवार्य होएत।
एहि सत्रक सहजीकरण त्रिभुवन विश्वविद्यालयक इञ्जिनियरिङ अध्ययन संस्थानक प्राध्यापक डा. विष्णुप्रसाद पाण्डे कएने छल। रासस





