‘भाषा जीवन्त राखबाक लेल मातृभाषा पत्रकारिता आवश्यक छै’


काठमाण्डू, ९ जेठः मातृभाषा पत्रकारिता भाषा संरक्षणमे महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करबाक सरोकारवालासभक कहब अइछ।

भाषा आयोगक अध्यक्ष डा. गोपाल ठाकुर कहलैन, “भाषाकेँ जीवन्त राखबा लेल मातृभाषा पत्रकारिता आवश्यक छै आ एकरा प्रविधिसँ जोइड़ क आगाँ ल जाए पड़त।”

प्रेस काउन्सिल नेपालद्वारा आयोजित कार्यक्रममे पाँच टा मातृभाषामे अनुवादित आचारसंहिता पुस्तिका एवम् संहिता भाषागत पत्रकारिता विशेषाङ्कक सार्वजनिककरण भेल। ओहि अवसरमे डा. ठाकुर कहलैन, “भाषा जोगेबा लेल सबके सामूहिक प्रयास जरूरी छै। जँ स्थानीयपन नै रहल आ मौलिकता छोड़ल गेल तँ मातृभाषा नै रइह सकैत अइछ। पत्रकारिताक माध्यमसँ मातृभाषाकेँ संरक्षण करब जरूरी अइछ।”

ओ कहलैन “जे भाषा लिखित रूपमे नै छै, तकरा प्रवर्द्धन लेल प्रेस काउन्सिल नेपाल आ भाषा आयोग संयुक्त रूपसँ काज करबा लेल तैयार अइछ। मातृभाषामे पत्रकार आचारसंहिता अनुवाद करबाक कार्य सकारात्मक प्रयास छै से कहैत डा. ठाकुर कहलैन, “भाषाकेँ एकसँ दोसरमे अनुवाद करब स्वयंमे नव सृजन छी। ई एकटा साहसिक यात्रा एड्भेन्चर छी।”

वर्तमानमे नेपाली मिडियामे आठ टा मातृभाषाके आचारसंहिता प्रयोगमे अइछ। डा. ठाकुर, प्रेस काउन्सिलक अध्यक्ष बालकृष्ण बस्नेत आ राससक अध्यक्ष धर्मेन्द्र झाद्वारा संयुक्त रूपसँ ओहि पुस्तिकासभके सार्वजनिक कएल गेल अइछ।

भोजपुरी, राई (वान्तावा), तामाङ, डोट्याली, आ लिम्बू भाषामे अनुवादित पत्रकार आचारसंहिता सार्वजनिक कएल गेल अइछ। पहिने काउन्सिल मैथिली, थारू आ नेपाल भाषामे सेहो अनुवादित आचारसंहिता सार्वजनिक क चुकल अइछ।

कार्यक्रममे राससके अध्यक्ष धर्मेन्द्र झा कहलैन “मातृभाषा पत्रकारिता आर्थिक संकटसँ गुजैर रहल छै, ताहि कारण ओ फस्टा नै सकलै। कोनो वर्ग आ समुदायके पहिचान जोगेबाक मुख्य साधन भाषा छियै। भाषा पहिचान, परिचय आ सभ्यतासँ जुड़ल विषय छी। आब स्थानीय निकायकें सेहो भाषा संरक्षणमे उत्तरदायी बनेबाक समय आइब गेल अइछ।”

ओ कहलैन, “देशक बहुत रास भागमे एखनो लोकसभ नेपाली भाषा नै बुझैत छै, तें मातृभाषामे पत्रकारिता जरूरी अइछ। आम जनताकेँ सूचित करबाक लेल मातृभाषा पत्रकारिताके विकल्प नै अइछ।” ओ कहलैन जे मातृभाषा आ स्थानीयपनकेँ उपेक्षा कएलासँ देशक लोकतन्त्र सबल नै भ सकैत अइछ।

प्रेस काउन्सिलक अध्यक्ष बालकृष्ण बस्नेत कहलैन, “काउन्सिल भाषाभाषीसभके संरक्षण आ संवर्द्धनमे निरन्तर कार्य क रहल छै आ ई सेहो एक महत्वपूर्ण प्रयास छी।” ओ कहलैन, “भाषागत पत्रकारिताकेँ कोना सशक्त बनेल जाए ताहिपर गम्भीर बहस होएबाक चाही। भाषागत पत्रकारितासँ हमर पत्रकारिता आओरो सुन्दर बनल अइछ, कारण जे संचारक सबसँ निकट आ बुझनिहार भाषा मातृभाषा छी, से ओकर प्रवर्द्धन लेल काउन्सिल काज क रहल अइछ।”

गोरखापत्र संस्थानक महाप्रबन्धक लालबहादुर ऐरी कहलैन, “पत्रकार आचारसंहिता केवल पत्रकारद्वारा नै, बल्कि सबकेँ बुझनाइ जरूरी अइछ। आब पत्रकारिताक गुणस्तर विषयपर बहस आ विमर्श जरूरी अइछ। गोरखापत्र संस्थान विभिन्न भाषामे सामग्री निर्माण करैत भाषाभाषीसभके संरक्षणमे सहयोग दैत रहल अइछ।”

सार्वजनिक सेवा प्रसारणक सञ्चालक समिति सदस्य फूलमान बल कहलैन, “पत्रकारिताक माध्यमसँ मातृभाषाक विस्तार लेल संचारक शैलीमे परिवर्तन आवश्यक अइछ। पत्रकारिताक माध्यमकेँ रूपान्तरण होएबाक चाही। एखन न्यू मिडियाके जमाना छै। अनुवादित सामग्रीसभकेँ भिजुअल, अडियो आ अन्य माध्यमसँ सेहो प्रस्तुत करबाक चाही, जाहिसँ न्यू मिडिया अनुकूल बनए।”रासस

ताजा खबर
धेरै पढिएको