आइ जेनजी शहीद दिवसः सड़कके असन्तोषसँ सुशासन आ संस्थागत रूपान्तरणधैर


सिबी अधिकारी/रासस
काठमाण्डू, २३ भादबः एक साल पहिने काठमाण्डूके सड़कपर देखल गेल ओ दृश्य नेपालक राजनीतिक तथा सामाजिक इतिहासमे बहुत दिनधैर स्मरण कएल जाएत ।

हाथमे प्लेकार्ड, मोबाइलमे लाइभ आ मनमे परिवर्तनक आकाङ्क्षा लेने हजारौँ युवा सड़कपर उतैर गेल छल। हुनक आक्रोश तत्कालीन एकटा निर्णयक विरोधमे देखाइत छल, मुदा ओकर जइड़मे सदियोसँ जमा भेल असन्तोष छल।

सामाजिक सञ्जालपर लगाएल प्रतिबन्धसँ शुरू भेल जेनजी आन्दोलन क्रमशः राज्य सञ्चालनके शैली, राजनीतिक नेतृत्वक कार्यक्षमता, भ्रष्टाचार, नातावाद, बेरोजगारी, सार्वजनिक सेवा आ अवसरक असमानताक विरोधमे उठल आवाजमे बदैल गेल।

आइ भादब २३ गते ओइ आन्दोलनके एक साल पूरा भेल अइछ। आन्दोलनमे जान गेल युवाक स्मरण आ सम्मानमे सरकार आइ सार्वजनिक छुट्टी देने अइछ।

एक सालक अवधिमे देश राजनीतिक रूपसँ पैघ परिवर्तनक अनुभव केलक अइछ। तहिना, आन्दोलनद्वारा उठाएल सुशासन आ जवाफदेहिताक सवाल एखन राज्य सञ्चालनक मूल बहसके हिस्सा सेहो बइन गेल अइछ।

सामाजिक सञ्जालसँ सड़कधैर

जेनजी आन्दोलनके तत्कालीन पृष्ठभूमि सामाजिक सञ्जालपर लगाएल गेल प्रतिबन्ध छल। सामाजिक सञ्जालक प्लेटफॉर्मपर प्रतिबन्ध लगेलापर युवामे असन्तोष बइढ़ गेल। डिजिटल पीढ़ीक लेल सामाजिक सञ्जाल केवल मनोरञ्जनक माध्यम नै; सूचना, अभिव्यक्ति, शिक्षा, व्यवसाय, रोजगार आ सामाजिक सम्बन्धक महत्वपूर्ण आधार सेहो बइन गेल छल। तेँ युवा प्रतिबन्धकेँ अपन अभिव्यक्ति आ डिजिटल अधिकारपर हस्तक्षेपक रूपमे लेलैन। सामाजिक सञ्जालपर शुरू भेल विरोध किछुए दिनमे सड़कधैर पहुँचल।

भादब २३ आ २४ गतेक आन्दोलनमे काठमाण्डूसहित देशक विभिन्न ठामपर युवा प्रदर्शनकारीक उल्लेखनीय उपस्थिति देखल गेल। आन्दोलनक स्वरूप आ माँग विस्तार होइत गेलापर ई खाली सामाजिक सञ्जालक स्वतन्त्रताक सवाल नै रहल।

भ्रष्टाचार नियन्त्रण, राजनीतिक जवाफदेहिता, सार्वजनिक संस्थामे सुधार, रोजगार सृजना, अवसरमे समानता, पारदर्शिता आ राज्य सञ्चालनमे नवका पीढ़ीक सहभागिता आन्दोलनक प्रमुख विषय बइन गेल।

किए आक्रोशित छल नवका पीढ़ी ?

जेनजी पीढ़ीक असन्तोष एक दिन वा एकटा घटनासँ पैदा नै भेल छल। बहुत दिनसँ देशमे व्याप्त राजनीतिक अस्थिरता, बेरोजगारी, महँगी, सार्वजनिक सेवा प्रवाहक सुस्ती, भ्रष्टाचारक आरोप, अवसरमे पहुँचीक असमानता आ राजनीतिक संरक्षणक संस्कृतिसँ युवामे निराशा बढ़ैत गेल छल।

उच्च शिक्षा प्राप्त कएलाक बादो रोजगारक लेल विदेश जाए पड़बाक बाध्यता बहुतो युवाक साझा समस्या छल। देशमे उद्यम करबाक प्रयास करैत काल प्रशासनिक झंझट, पूँजीक अभाव, नीतिगत अनिश्चितता आ बजारक सीमिततासँ चुनौती आओरो बइढ़ गेल छल।

युवा राज्यसँ केवल रोजगारक अवसर नै ओसभ निष्पक्ष व्यवस्था चाहैत छल। ओसभ योग्ताक आधारपर अवसर मिलएबला शासन चाहैत छल। सरकारी कार्यालयमे सेवा लेबाक लेल राजनीतिक पहुँच वा चिनजान आवश्यक नै हो, एहन व्यवस्था चाहैत छल। अइ कारणेँ आन्दोलनक मूल भावना छल जे राज्य नागरिकके प्रति उत्तरदायी होएबाक चाही।

आन्दोलन राजनीतिक दल आ नेतृत्वपर सेहो गम्भीर प्रश्न उठौलक। नवका पीढ़ी अपनाकेँ निर्वाचनक समय मात्रे स्मरण कएल जाएबला मतदाता नै, बल्कि नीति निर्माण आ शासन प्रक्रियाक सक्रिय हिस्सेदारक रूपमे स्थापित करए चाहलक।

आन्दोलनके बाद विकसित राजनीतिक घटनाक्रमसँ सेहो परिवर्तनक जनइच्छा प्रतिबिम्बित होइत देखाइत अइछ। बितल फागुन २१ गते सम्पन्न निर्वाचनमे नवका राजनीतिक शक्तिकेँ मजबूत जनादेश भेटल अइछ।

निर्वाचन परिणामकेँ बहुतो लोक पुरान राजनीतिक कार्यशैलीक प्रति असन्तोष, नवका नेतृत्वक प्रति अपेक्षा आ परिवर्तनक इच्छाक अभिव्यक्तिक रूपमे विश्लेषण केलैन। अइ अर्थमे जेनजी आन्दोलन प्रत्यक्ष रूपेँ मात्र नै, बल्कि अप्रत्यक्ष रूपेँ सेहो नेपालक राजनीतिक बहसकेँ प्रभावित केलक देखाइत अइछ।

सुशासन प्राथमिकतामे

प्रधानमन्त्री वालेन्द्र शाहक नेतृत्वमे वर्तमान सरकार सुशासन, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार नियन्त्रण आ प्रशासनिक सुधारकेँ प्राथमिकतामे रखने अइछ। सरकार सार्वजनिक सेवा प्रवाहकेँ परिणाममुखी बनाब, सरकारी संरचनाकेँ चुस्त बनाब, सार्वजनिक निकायमे नियुक्ति प्रक्रियाकेँ पारदर्शी बनाब तथा डिजिटल प्रविधिक प्रयोग आ विस्तारकेँ प्राथमिकतामे रखने अइछ।

संघीय मन्त्रालयक संख्या घटा क १८ कायम कएल गेल अइछ। मन्त्रालयक संख्या घटेलापर वार्षिक करीब २० अरब टका राज्यकोषमे बचत होबाक अनुमान अइछ। मन्त्रालय घटेबाक निर्णयकेँ सरकार प्रशासनिक खर्च कम करबाक आ राज्य संयन्त्रकेँ प्रभावकारी बनेबाक सुधारक रूपमे प्रस्तुत केलक अइछ।

‘आब लाइन नै, अनलाइन’ कहैत सरकार ‘नागरिक एप’केँ आओरो परिष्कृत बनाक सञ्चालनमे अनने अइछ। सरकारद्वारा देल जाएबलासभ प्रकारक सेवाकेँ डिजिटल बनाक एकीकृत प्लेटफॉर्मसँ सेवा प्रवाह करेबाक लक्ष्यअनुसार उक्त एपकेँ पहिनेसँ चलैत आएल छल। एकेटा एपसँ विभिन्न सरकारी सेवा प्राप्त कएल जा सकैत अइछ।

एपमे नागरिकता, राहदानी, शैक्षिक प्रमाणपत्र आ मतदाता परिचयपत्रक विवरण प्राप्त कएल जा सकैत अइछ। तहिना, नागरिक लगानी कोष, सञ्चयकोष आ सामाजिक सुरक्षा कोषक खातामे जमा नगदके विवरण प्राप्त कएल जा सकैत अइछ।

सेवा प्रवाहमे अनियमितता, ढिलासुस्ती आदि हटाक नागरिककेँ द्रुत सेवा सुनिश्चित कएल गेल अइछ। अइसँ सार्वजनिक सेवाकेँ सरल, सुलभ आ सहज बनाएल गेल अइछ। नागरिकता, राहदानी, सवारीचालक अनुमतिपत्र (लाइसेन्स) तथा मालपोत सेवाकेँ चुस्त आ प्रभावकारी बनाएल गेल अइछ। आर्थिक मितव्ययी नीतिसँ आर्थिक सुशासनक आधार मजबूत होइत गेल अइछ।

प्रशासनिक संरचनामे सुधारक प्रयास

सरकार अनावश्यक प्रशासनिक संरचनाक खारेजी तथा समायोजनमार्फत सार्वजनिक खर्च घटाब आ प्रशासनिक कार्यक्षमता बढ़ाब क नीति आगाँ बढ़ौने अइछ।

राजनीतिक दलसँ निकट मानल जाएबला ट्रेड युनियन तथा विद्यार्थी संगठनक प्रभाव घटेबाक तथा सार्वजनिक संस्थाकेँ दलगत हस्तक्षेपसँ मुक्त करबाक प्रयास सेहो सुधारक एजेण्डामे राखल गेल अइछ। सार्वजनिक निकायमे होएबला नियुक्ति प्रक्रियाकेँ पारदर्शी आ योग्यतामे आधारित बनाब क विषय सेहो जेनजी आन्दोलनद्वारा उठाएल गेल महत्वपूर्ण सवालसँ जुड़ल अइछ।

राज्यक महत्वपूर्ण निकायमे नियुक्ति करैत काल राजनीतिक निकटतासँ बेसी योग्यता, अनुभव आ कार्यक्षमताकेँ प्राथमिकता देबाक माँग नवका पीढ़ीक प्रमुख अपेक्षा रहल अइछ।

विश्वविद्यालयकेँ दलगत राजनीतिसँ मुक्त करबाक विषय सेहो जेनजी आन्दोलनक व्यापक सुधार एजेण्डासँ जुड़ल अइछ। उच्च शिक्षाक संस्थाकेँ शैक्षिक उत्कृष्टता, अनुसन्धान आ नवप्रवर्तनक केन्द्र बनाब क चुनौती मुदा एखन बाँकी अइछ।

डिजिटल अधिकार आ नवका पीढ़ीक अपेक्षा

जेनजी आन्दोलन डिजिटल पीढ़ीक आन्दोलन भेलासँ डिजिटल अधिकार एकर महत्वपूर्ण पक्ष अइछ। सामाजिक सञ्जालपर प्रतिबन्ध लगेबाक बदला ओकरा जिमेवार, सुरक्षित आ पारदर्शी ढंगसँ सञ्चालन करबाक नीति आवश्यक अइछ, ई बहस आन्दोलनक बाद आओरो मजबूत भेल अइछ।

डिजिटल माध्यमसँ नागरिक सरकारक निर्णयपर प्रश्न उठाएब , सूचना प्राप्त करबाक आ सार्वजनिक बहसमे सहभागी भ सकबाक, वातावरण लोकतान्त्रिक शासनक महत्वपूर्ण आधार अइछ।

सरकार प्रशासनिक सुधार आ सुशासनपर जोड़ देने अइछ। निजी क्षेत्रक लगानी बढ़ेबाक , उद्यमशीलताकेँ प्रोत्साहन देब, स्टार्टअप आ नवप्रवर्तनकेँ सहज बनाएब, सीपमूलक शिक्षाक विस्तार करब तथा युवाकेँ उत्पादनसँ जोड़बाक नीति आवश्यक अइछ।

सुशासनक अर्थ केवल भ्रष्टाचार नियन्त्रण नै अइछ। नागरिक अपन श्रम, सीप आ योग्यतासँ सम्मानपूर्वक जीवनयापन क सकथि, एहन आर्थिक वातावरणक सृजना करब सेहो सुशासनक महत्वपूर्ण हिस्सा अइछ। राजनीतिक परिवर्तनक सङे प्रशासनिक संस्कृतिमे परिवर्तन होबाक चाही। सरकारी कार्यालयमे सेवा लेबाक लेल झंझटमे कमी आएल अइछ। निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी अइछ।

सत्तापक्ष आ प्रतिपक्षक साझा जिमेवारी

जेनजी आन्दोलन कोनो एकटा राजनीतिक दल वा समूहकेँ मात्र प्रश्न नै छल। ई समग्र राजनीतिक संस्कारपर प्रश्न उठौलक। तेँ एकर समाधान सेहो सामूहिक राजनीतिक प्रतिबद्धतासँ मात्र सम्भव अइछ।

सत्तापक्ष सुशासन आ संस्थागत सुधारक एजेण्डाकेँ निरन्तरता दिय पड़त । प्रतिपक्ष तथा नागरिक समाजकेँ सेहो सरकारके गलत काजक आलोचना मात्र नै आवश्यक सुधारमे रचनात्मक भूमिका निर्वाह करबाक चाही ।

आबक बाट

जेनजी आन्दोलन एकटा पीढ़ीक बेचैनीकेँ आवाज देलक। ओइ आवाज राजनीतिक नेतृत्व, राज्यके संस्थासभकेँ अपन काज करबाक शैलीक विषयमे पुनर्विचार करबाक लेल बाध्य केलक।

आबक आवश्यकता आन्दोलनक भावनाकेँ निरन्तर राजनीतिक असन्तोषमे सीमित राखब नै अइछ। ओकरा राष्ट्र निर्माणक ऊर्जामे बदलनाइ अइछ।

राज्य संरचनामे आवश्यक सुधार, प्रशासनिक झंझटक अन्त्य, कानुनी प्रक्रियाक सरलीकरण, भ्रष्टाचार नियन्त्रण, गुणस्तरीय शिक्षा, रोजगार सृजना आ डिजिटल अधिकारक सुनिश्चितता अगिला दिनक मुख्य प्राथमिकता बनबाक चाह से देखाइत अइछ।

राष्ट्रीय स्वार्थ, सामूहिकता आ बृहत्तर एकताकेँ केन्द्रमे राइख आगाँ बढ़ब से आवश्यक अइछ। सत्तापक्ष आ प्रतिपक्ष दुनू राजनीतिक प्रतिस्पर्धासँ उपर उइठ नागरिकके सेवा आ राष्ट्रिय हितकेँ प्राथमिकता देलापर मात्रे परिवर्तनकेँ स्थायित्व भेटत। एक साल पहिने सड़कपर उठल आवाज एकटा पीढ़ीक प्रश्न, ‘हमर भविष्य कहिया बदलत ?’ आब ओइ प्रश्नके उत्तर नारामे नै, नीति आ परिणाममे देबाक समय आएल अइछ।

युवा जे परिवर्तन ताकै छैथ, से तखने सार्थक हएत जखन देशेमे सम्मानपूर्वक बाँचबाक अवसर आएत, सरकारी सेवा सहज आ पारदर्शी हएत, सार्वजनिक संस्थापर नागरिकके विश्वास बढ़त आ राज्यक निर्णयमे नागरिकक आवाजक अर्थपूर्ण स्थान हएत ।

जेनजी आन्दोलनके वास्तविक सफलता सरकार परिवर्तनमे मात्र नै, राज्य सञ्चालनके संस्कारमे परिवर्तनमे हएत। सड़कपर जन्मल असन्तोष संस्थागत सुधार होइत नागरिकके दैनिक जीवनमे देखाएबला परिणाममे रूपान्तरित भेलापर मात्र एक साल पहिने देल गेल बलिदान आ उठाएल आवाजक दीर्घकालीन अर्थ भेटत।

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