मिथिलामे ‘झुला’ पावैन सुरू


महोत्तरी, १२ साओन: मिथिला क्षेत्रमे अखन झुला महोत्सवकेँ माहौल अइछ। साओन शुक्ल तृतीयासँ पूर्णिमाधैर चलैबला ई पावैन रैवदिन साँझसँ सुरू भेल अइछ ।

लक्ष्मीनारायणके ई पावैन मठ मन्दिरमे सामूहिक रूपसँ मनाएल जाइत अइछ। लक्ष्मीनारायणके अवतार मानल जाएबला सीता-राम आ राधा-कृष्णके प्रतिमाकेँ विशेष झुलामे झुलाएब ई पावैनके मुख्य विधि अइछ। झुलामे राखल प्रतिमाकेँ डोरी ध क झुला गीत गाबैत श्रद्धालुसभ डोलाबैत छैथ।

महोत्तरीक मटिहानीमे रहल लक्ष्मीनारायण मन्दिरसँ लक्ष्मीनारायणके प्रतिमा डोलीमे राइख ढोल पिपहीके सङ झुलाघर पहुँचा क पावैन सुरू कएल गेल अइछ। झुला उत्सवमे मिथिलाक लोकलयमे झुला, मलार आ कजरी गीत गेबाक चलन अइछ। झुलनोत्सव कहल जाएबला ई पावैन प्राचीन मिथिला क्षेत्रमे सब ठाम मनाएल जाइत अइछ, तइयो महोत्तरीक मटिहानी स्थित लक्ष्मीनारायण मठ आ मन्दिर एवम् जनकपुरमे रहल जानकी मन्दिरके झुला प्रसिद्ध अइछ।

प्राचीन मिथिलाक राजधानी जनकपुरधाम सीताक नैहर भेलाक कारणेँ जमायकेँ प्रसन्न करएबला मिथिलाक परम्परा अनुसार ई पावैन मनेबाक लेल वि.सं. १७८७ दिस सन्त सुरकिशोर दास सुरू करौने छल, से लक्ष्मीनारायण मठक उत्तराधिकारी महन्थ डा. रवीन्द्रदास वैष्णव कहैत छैथ।

जनकपुरमे पहिने राम-सीताक विआह होइत काल राजा जनकद्वारा दहेजमे देल गेल हीरा, रत्न आ मणिमाणिक्यक ढेर लागल छल आ ओ पहाड़ जकाँ बइन गेल, से कहल जाइत अइछ। अखन मणिपर्वत कहल जाएबला ओ स्थान जनकपुर स्थित जानकी मन्दिरसँ लगभग पाँच किलोमिटर उत्तर-पश्चिममे अवस्थित अइछ। झुला पावैनमे साओन शुक्ल तृतीयाक दिन अइ मणिपर्वतके पूजा क पावैन करब मिथिलाके पुरान परम्परा अइछ।

महोत्तरीक मटिहानीमे अलगसँ झुलाघर बनल अइछ। जत लक्ष्मीनारायण मठ आ मन्दिरसँ विष्णुलक्ष्मीक प्रतिमा डोलीमे आइन क झुलामे झुलाएल जाइत अइछ। साओन पूर्णिमाक दिन विष्णुलक्ष्मीक प्रतिमा झुलाबैबला डोरीकेँ तोइड़ क पावैन समाप्त करबाक मिथिलामे परम्परा अइछ। रासस

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