कमिसन (मगही कविता)


फुलगेन मगही

अपन दल आ पाटीके लोक मातरे कतौ होइके चाही

कतबो कमिसन दबाउत त, सबटा ठीके बुझायत ।

बोलीके बात आ पनापरके रबैया सब जनबे करैय हय,

बिना कमिसन कुछ नइ, इ बात  लोक कहबे करैय हय ।।

 

अपन लोकके केलहा बैमानीयो सबटा ठीके  बुझाइत

दोसर गोरा कुनो काम करत त, अपना देखल न जाइत ।

दोसरके बसमे करैला पावर लोक खुब देखेबे करैय हय,

बिना कमिसन कुछ नइ, इ बात सब लोक कहबे करैय हय ।।

 

कुन नेता आ  कुन पाटी केहन हय से के न जनैय हय <

अपन बेरमे अपन खिचातानी सबकेसब करबे करै  हय ।

आइय  दुधसे धोइल न हय ,कोइ से सब जनबे करैय हय,

बिना कमिसन कुछ नइ, इ बात लोक कहबे करैय हय ।।

 

खाली अपन सरकार आ कुर्सी अपना सिको रहेके चाही

जनताके नामपर हातीके दात देखाके,  चिबेबे करैय हय ।

अपन देशके बिकाश दोसरेके इसरामे प्रम्परा से  चलैय हय,

बिना कमिसन कुछ नइ, इ बात सब लोक कहबे  करैय हय ।।

 

जनता ,कार्यकर्ता,सबके मिसन आइय कमिसनके चलैय हय

निचासे उपर आइय एक दोसरपर हरदम देखु  भिरले रहै हय ।

अपन बिकास आ निकास केना लगतै, जोगारमे सिढी रहै हय,

बिना कमिसन कुछ नइ, इ बात सब लोक कहबे करैय हय ।।

ताजा खबर
लोकप्रिय